कॉंपती हुई आवाज़ में संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हुए इरफ़ान को सुना जाये, सड़क पर अपने हक़ के लिये उतरे हुए छात्रों में ना जाने कितने एैसे युवा हैं जिनके सपने चकनाचूर हैं।
इनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिये, आपको सैल्यूट इरफ़ान साहब❤️
जज लोया केस पर डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी का इंटरव्यू भारत में ब्लॉक कर दिया गया।
इंस्टाग्राम का कहना है कि यह भारत के कानूनी प्रावधानों के तहत हुआ।
सीधा सवाल है की कौन सा कानून लागू किया गया? किस प्राधिकरण ने यह आदेश दिया? क्या कोई न्यायिक आदेश है? अगर कार्रवाई कानून के अनुसार हुई है, तो उसका पूरा आधार सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? लोकतंत्र में सवालों का जवाब पारदर्शिता से होना चाहिए, प्रतिबंध से नहीं।
@saltbylutyens
Pellet guns, lathis and tear gas were used against students peacefully protesting in Delhi.
I met 19-year-old Sahil Lochab. Shot with pellets, he may lose an eye. His “crime”? Demanding an end to paper leaks and a fair future for our students.
@AmitShah ji, I have two questions:
1. Did you approve the use of lethal force, including pellet guns, against students? If not, who did?
2. Were the men in plain clothes beating students with lathis police personnel or volunteers? Who authorised their deployment?
Desh jawab maang raha hai.
ये मोहम्मद इरफ़ान हैं, इन्हें औपचारिक शिक्षा नहीं मिली।
दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में रहते हैं, ये भी जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन का हिस्सा थे लेकिन लोगों तक इनकी आवाज़ शायद पहुंच नहीं सकी,
लोकतंत्र पर इनकी बात एक बार ज़रूर सुनिए।
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को आप लोगो ने नहीं सुना तो सब बेकार है ,
इस युवा लड़की नेहा बोरा ने सभी को दीवाना कर दिया , आज पूरा विपक्ष इस लड़की की तारीफ कर रहा है
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
मैं पहले दिन से इस बात पर कायम हूं कि CJP को BJP ने ही बनाया है.
पहले दिन से प्लान था कि विपक्ष को डिस्क्रेडिट करके, अपने हिसाब का विपक्ष तैयार कर दिया जाए.
एयरपोर्ट पर परमिशन देना हो, या जंतर-मंतर पर धरना चलते देना हो. सब कुछ प्लान के हिसाब से था.
मैं ये गारंटी के साथ कह सकता हूं- 20 तारीख से पहले मोदी सरकार चाह देती तो 1 घंटे धरना ना चल पाता, लेकिन सरकार ने स्क्रिप्ट के हिसाब से चलने दिया.
वांगचुक जिन्हें खुद अमित शाह ने जेल से निकाला था, उनका भूख हड़ताल करना, और अचानक से एक सुबह उन्हें उठा लेना. सब कुछ स्क्रिप्ट के हिसाब से था.
बस 20 तारीख को जो हुआ, वो ना BJP को पता था, ना ही CJP को अंदाजा. बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंच गए.
यहां से सब कुछ स्क्रिप्ट के बाहर चला गया. इसलीए CJP की पूरी टीम ही मौके से गायब हो गई. किसी को एक लाठी नहीं पड़ी.
देश भर से आए बच्चों ने सब कुछ झेला, और उसके बाद ये मामला बहुत बड़ा हो गया. जो अब BJP और CJP के कंट्रोल से बाहर था.
स्क्रिप्ट का अंत करीब-करीब ऐसा ही था, जिसमें सरकार संवेदनशील लगे और विपक्ष के नाम पर कुछ लोग खड़े कर दिए जाएं, जो सरकार के हिसाब से हों.
क्योंकि विपक्ष पिछले 3 साल में बहुत ज्यादा मजबूत हो गया था. खासकर युवाओं के बीच में अपनी पहुंच मजबूत की थी. इसी बात को तोड़ने के लिए CJP का नाटक किया गया.
जब 20 तारीख के बाद मामला स्क्रिप्ट के बाहर गया तो पहले कुछ वक्त इंतजार हुआ. फिर वांगचुक को खुद सरकार ने सूप पिलाकर मामला खत्म किया.
और आखिर में धमेंद्र का इस्तीफा हो गया.
इस्तीफे के बाद जिस तरह से सरकार के मंत्री बता रहे हैं कि धरना तत्काल खत्म किया जाए, वो बताता है कि इसे कौन चला रहा था.
आप खुद सोचिए, ये जितने सेलिब्रेटी हैं, ये अचानक से कैसे बोलने लगे. एक जैसी टीशर्ट पहनकर, कॉओर्डिनेटेड तरीक से. जिनके लिए पैसा ही सब कुछ है, वो देश की चिंता क्यों करने लगे, वो भी अचानक.
अब लोगों के बीच ये भ्रम पैदा हो गया कि CJP की सरकार सुन रही है, विपक्ष वही है. सरकार यही भ्रम लोगों में बनाए रखना चाहती है. और स्क्रिप्ट के हिसाब से ये बात लोगों में चली गई.
सरकार को अपने हिसाब का विपक्ष मिल गया, जिसे वो अपने हिसाब से चला सकती है. जो भी इस भ्रम जाल में फंस रहा है, वो अपना और देश का नुकसान कर रहा है.
इस पूरे आंदोलन में लेफ्ट के जितने भी छात्र संगठन, कांग्रेस के छात्र और युवा संगठन और बाकी विपक्ष के छात्र संगठन शामिल हैं, उनकी मंशा साफ थी. वो असल में विपक्ष का काम कर रहे थे.
इस आंदोलन में जितने भी युवा थे, जो देश के अलग-अलग कोनों से जुड़े, सबकी मंशा साफ थी.
बस CJP का मामला अलग है, जिसपर बहुत संदेह है. इसे लेकर सावधान रहना ठीक.
आज छात्रों को बहुत बड़ी जीत मिली है।
याद रहे, प्रदर्शन में जिन छात्रों पर घातक हमले हुए - किसी का हाथ टूटा, किसी का पैर, किसी की पसली, पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खा कर critical हो गए - इन सबके सीधे ज़िम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।
मांग साफ है, इस हमले के organisers से लेकर implementors तक, सभी की जवाबदेही तय हो और उनपर ऐसी कार्रवाई हो जो छात्रों को दिखे - तब जा कर होगा इंसाफ़।
अमित शाह जी, आपको जवाब तो देना ही पड़ेगा।
Students' demands are non-negotiable.
▪️First: The corrupt and incompetent Education Minister has to be sacked.
• There is some talk going on within the Modi government's Cabinet about moving Mr. Pradhan to another ministry. This is not acceptable to the students of India, and it is not acceptable to anybody.
• The reason is that Mr. Pradhan is a symbol of corruption and of what happened to India's children. He is the symbol of the destruction of the most valuable thing this country has: our students and their future. Dharmendra Pradhan has to be sacked. Period!
▪️Second: The people who attacked the students need to be punished and held accountable.
▪️Third: The leader of the entire machinery behind this, Mr. Narendra Modi, has to apologise for what he has done to the students and to the future of this country.
Leader of Opposition @RahulGandhi 🙌🏼🙌🏼
Bharatiya Kisan Union (Ekta Ugrahan) has announced that it will join the ongoing students' protest at Jantar Mantar in Delhi. The farmers' union will march to the national capital on July 27 and has said its members will remain in Delhi until the students' demands are accepted.
यह नेहा वोरा हैं।
जंतर मंतर पर सबसे लंबा अनशन करने वाली छात्रा।
जिनका कल का भाषण जंतर मंतर पर सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जा रहा है।
आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मिलने के बाद कहा की शिक्षा क्षेत्र में होने वाले सुधारो पर हमारी सबसे अच्छी बातचीत राहुल जी के साथ हुई।
राहुल उन्हें माइक देकर एक तरफ खड़े हैं।
कोई और ऐसा कर सकता है?
राहुल गांधी ने प्रेस के सामने जैसे ही साहिल को पेश कर बताया कि किस तरह सुरक्षा बलों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया है, सी आर पी एफ ने जांच के आदेश दे दिए। बीते 4 दिन से दिल्ली पुलिस व सुरक्षा बल इस बात से इनकार कर रहे थे कि उन्होंने पैलेट गन का प्रयोग किया। अब पता चल रहा है कि आर ए एफ ने 12 बोर पम्प गन का इस्तेमाल किया था।
रोज रात में जंतर मंतर जाता हूं - एक फर्क देखा.
लाठी चार्ज, पेलेट गन और आंसू गैस चलने के बाद जेन ज़ी की माओं ने धरने पर आना शुरु कर दिया है, बहुत गुस्से में हैं.
हमारी पीढ़ी तो घरों में पिट कर बड़ी हुई है लेकिन जेन ज़ी को बड़े नाज़ों से पाला जा रहा है जिन पर मोदी ने किलों लगी लाठियां चलवाई हैं.