राहुल गांधी बोले-हमारा एजुकेशन सिस्टम बच्चों को टेंशन देता है: 5 प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर 5 लाख करोड़ खर्च होता है, इतना 5 मंत्रालयों का बजट
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लाखों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की बजाय सरकार जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों पर वाटर कैनन से निशाने साध रही है। मोदी सरकार ने अहंकार और ज़ुल्म की सब हदें पार कर दी हैं।
युवा कांग्रेस, NSUI सहित पूरा कांग्रेस संगठन राहुल जी के नेतृत्व में छात्रों के साथ मजबूती से संघर्ष कर रहा है। प्रधान और प्रधानमंत्री दोनों को सामने आकर अपनी ज़िम्मेदारी लेनी होगी।
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
आदिवासी अस्मिता और अधिकारों के महानायक बिरसा मुंडा जी ने जल, जंगल और ज़मीन की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
उनका संघर्ष, साहस और विचारधारा हमें न्याय, समानता और वंचित समुदायों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने की प्रेरणा हमेशा देते रहेंगे।
“हम तो तबाह हो गए हैं - और सुनने वाला कोई नहीं।”
कल दोपहर के खाने पर एक ऑटो चालक भाई ने यह कहा। एक वाक्य में देश के लाखों ग़रीबों की पूरी कहानी आ गई।
आमदनी का मीटर बंद। महंगाई का ब्रेक फेल। और सुनने वाली सरकार बहरी।
CNG से LPG तक। बच्चों की पढ़ाई से इलाज तक। दूध से लेकर खाने के तेल तक। हर बढ़ता रुपया इनके बजट पर, इनकी रसोई पर, सीधा वार है।
महंगाई मानव मोदी जी सलाह देते हैं - “public transport इस्तेमाल कीजिए।” और जो लोग public transport की रीढ़ हैं वो आज महंगाई के बोझ तले टूट रहे हैं।
आज इनकी थाली में रोटी-दाल के साथ एक सवाल भी है - कल की रोटी कहाँ से आएगी?
सपनों का सौदागर हूं और जुमलों से बहलाऊंगा
आज की रोटी छोड़ दो, कल चांद दिखलाऊंगा
ये है 2047 विकसित भारत की हकीकत।
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही कहा, मुझे 60 दिन दे दो, फिर 60 हफ्ते मांगे, फिर 60 महीने।
जब कुछ नहीं हुआ तो कहा- 2022 तक सबके सिर पर छत होगी, किसानों की आय दोगुनी होगी, 2 करोड़ रोजगार हर साल दूंगा, लेकिन हुआ कुछ नहीं।
अब नरेंद्र मोदी 2047 की बात कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी 2047 की बात कर अपने 2-3 साल शांति से गुजारना चाहते हैं, लेकिन ये हो नहीं पाएगा।
क्योंकि ये परीक्षा ठीक से करा नहीं पा रहे, तेल दे नहीं पा रहे। अब देश को इनके 2047 वाले लॉलीपॉप में कोई इंट्रेस्ट नहीं है।
नरेंद्र मोदी की विदेश नीति देखें तो विदेशों में कोई आपका दोस्त ही नहीं बचा। ईरान से दुश्मनी ले ली और गैस का संकट खड़ा हो गया।
हमारा निवेदन है कि एक अच्छा सलाहकार लाइए, जो आपको अगले 2-3 साल तक मार्गदर्शन दे सके या फिर खुद मार्गदर्शन मंडल में शामिल हो जाइए।
: AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन @Pawankhera जी
NEET पेपर लीक होना BJP सरकार की नाकामी है, यह पाप है
बेंगलुरु में @UdayBhanuIYC के नेतृत्व में @IYC ने NTA को बैन किए जाने और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की पुरज़ोर माँग की
क्या यह मीडिया ने दिखाया?
📍 कर्नाटक
जब मोदी जी इटली में टॉफी खिलाते हुए reels बना रहे थे - पेपर लीक से त्रस्त भारत के युवा सड़कों पर न्याय मांग रहे थे।
क्योंकि NEET Paper Leak ने लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया। कई बच्चों ने तो अपनी जान तक गंवा दी।
और मोदी जी ने न ज़िम्मेदारी ली, न धर्मेंद्र प्रधान को हटाया, न एक शब्द कहा।
अब जब छात्र, NSUI और INC के कार्यकर्ता न्याय की आवाज़ उठा रहे हैं - BJP की प्रदेश सरकारें उन पर लाठियाँ बरसा रही हैं।
जो सरकार छात्रों के सवालों का जवाब लाठी से देती है, वो जवाबदेही से नहीं - डर से चलती है।
पर हम डरने वाले नहीं हैं।
हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा नहीं देते और देश में पेपर लीक रोकने के लिए एक मज़बूत और सुरक्षित सिस्टम नहीं बनता।
यह लड़ाई हर उस छात्र के लिए है जिसका भविष्य इस नाकाम सरकार ने चुराया।
THE INDIAN ECONOMY IS DEAD.
Modi killed it.
1. Adani-Modi partnership
2. Demonetisation and a flawed GST
3. Failed “Assemble in India”
4. MSMEs wiped out
5. Farmers crushed
Modi has destroyed the future of India’s youth because there are no jobs.
ऋतिक मिश्रा
प्रदीप मेघवाल
अंशिका पांडेय
सिद्धार्थ हेगड़े
इन 4 NEET छात्रों ने हताश होकर अपनी जान ले ली
लेकिन यह आत्महत्या नहीं हत्या है. इन मौतों के लिए मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ज़िम्मेदार हैं
आप एक ऐसा सिस्टम नहीं बना पा रहे जहाँ बिना पेपर लीक हुए परीक्षा हो जाये
आपको अंदाज़ा है किस मानसिक यंत्रणा से यह बच्चे गुज़र रहे हैं?
आपको अंदाज़ा है कितने माँ बाप पेट काट कर बच्चों को पढ़ाते हैं?
क्या आप जानते हैं प्रदीप के घर वालों ने उसे सीकर में पढ़ाने के लिए जमीन बेच दी थी - और अब वो इस दुनिया में नहीं रहा
किस नैतिक अधिकार से आप मंत्री बने हुए हैं?
क्या लालच है जो कुर्सी से चिपके हुए हैं?
ढंग से काम नहीं कर सकते तो पद से इस्तीफ़ा दीजिए - और अगर यह इस्तीफ़ा नहीं दे रहे तो आप इनको बर्खास्त कीजिए मोदी जी
आज कीजिए, अभी कीजिए
क्योंकि देश के युवा आपकी और आपके नाकारा शिक्षा मंत्री की क़ीमत अब और नहीं चुकायेंगे
धर्मेंद्र प्रधान जी ने 22 लाख NEET बच्चों के साथ धोखा किया है। साथ ही, संसद का भी अपमान किया है - संसदीय समिति की रिपोर्ट को सिर्फ़ इसलिए ख़ारिज कर दिया क्योंकि उसमें विपक्ष के सांसद हैं।
जो संसद पर ही भरोसा नहीं करते, वो NEET सुधार पर क्या भरोसा करेंगे?
प्रधान जी को अभी हटाइए।