एक वक्त ऐसा भी आता है, जब न पद काम आता है, न पैसा, न शक्ति।
सब यहीं रह जाता है—और इंसान अकेला चला जाता है।...
तिब्बत के ग्यीरोंग की तस्वीर बेहद डरावनी है।अचानक से सब कुछ मौका भी नहीं मिला..... होना यहीं है अंतिम रूप से चाहे कितना भी भाग लो ...
डॉ धीर सिंह धाभाई
#flood#nepal
‘बाँधने मुझे तो आया है,जंजीर बड़ी क्या लाया है?
यदि मुझे बाँधना चाहे मन,पहले तो बाँध अनन्त गगन।
सूने को साध न सकता है,वह मुझे बाँध कब सकता है?
~ राष्ट्रकवि दिनकर
हनक सत्ता की सच सुनने की आदत बेच देती है,
हया को, शर्म को आख़िर सियासत बेच देती है।निकम्मेपन की बेशर्मी अगर आँखों पे चढ़ जाए,
तो फिर औलाद पुरखों की विरासत बेच देती है।
~ कुमार विश्वास
ओमी ( चतुर ) ने सोनम वांगचुक के लिए क्या बोला...
रैंचो ( आमिर खान ) , राजू रस्तोगी ( शरमन जोशी ) , फरहान कुरैशी ( र. माधवन ) कब बोलेंगे...
"चुप्पियाँ बढ़ती जा रही हैं
उन सारी जगहों पर जहाँ बोलना ज़रूरी था..."
मैं बहुत दिनों से उस कमरे में था जहाँ रोशनी नहीं आती थी... जब मैं बाहर आया तो धूप इतनी तेज़ थी कि मेरी आँखें जलने लगीं... मैं वापस अंधेरे कमरे की तरफ़ भागा... लेकिन तब तक उस कमरे का दरवाज़ा बंद हो चुका था... अब मैं न धूप में रह सकता हूँ... न अंधेरे में...
~ विनोद कुमार शुक्ल
मुझे अच्छा लगा ये वीडियो, so sharing with you all.
राम को न भुलाओ, मतलब? जब भी कुछ पाने के लिए कपट, छल, पाप करो तो याद रहे ईश्वर देख रहा है।
कठिन मगर सच की राह चुनो।
इसे अपने भाई बहनों से भी शेयर करो।
अल्टीमेटम की डेड लाइन खत्म हो चुकी है. बातचीत का रास्ता बंद हो चुका है.
डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है ईरान के लिए आज की रात कयामत की रात है. डोनाल्ड ट्रंप कहा है, ईरान के पूरे Civilization को मिटा देंगे.
ईरान ने ट्रेन समेत परिवहन सेवा को बंद कर दिया है. भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी कर रहा है 48 घंटे तक जो ईरान में जहां है वहीं रहे, कोई सफर न करे.
ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने ट्वीट कर कहा है ईरानी अपने राष्ट्र के लिए लड़ने और बलिदान देने के लिए तैयार हैं.
पूरी जंग में ईरान ना झुका और ना टूटा, वो शुरु से सीमित संसाधनों से लड़ रहा. आज भी लड़ेगा. सवाल हार जीत का नही है, उसूल और जज्बे का है.
मत जियो सिर्फ़ अपनी खुशी के लिए
कोई सपना बुनो ज़िंदगी के लिए।
जिसके दिल में घृणा का है ज्वालामुखी,वह ज़हर क्यों पिये खुदकुशी के लिए।
सारी दुनिया को जब हमने अपना लिया,कौन बाकी रहा दुश्मनी के लिए।
सब ग़लतफहमियाँ दूर हो जाएँगी,
हँस मिल लो गले दो घड़ी के लिए।
रचना-श्रीउदयभानु हंस
हारे हुए मन के लिए सब कुछ असंभव प्रतीत होने लगती है..लोगों के ताने हृदय बेधते हैं...बेफालतू के सुझाव बेकार लगते है..एकांत को हम अपना जीवन बना लेते हैं...और उसी के साथ घुटते रहते हैं..आपको समझने वाला कोई नहीं होता..आप संसार के लिए एक उपहास का विषय बन कर रह जाते हैं।