इस वीडियो में भूकंप की भयावहता देखकर दिल दहल उठता है… इमारतें दरकती और ढहती रहीं, चारों ओर धूल के गुबार और जान बचाकर भागते लोग।
100 से अधिक निर्दोष जिंदगियों का यूँ चले जाना बेहद पीड़ादायक है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दें और शोकाकुल परिवारों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दें।
कोलंबिया के हमारे भाई-बहनों के लिए दिल से प्रार्थना, सभी सुरक्षित रहें।
रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज, छात्र नेता ने सरकार पर साधा निशाना
रांची में झारखंड विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे JPSC-JSSC अभ्यर्थियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि सरकार छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रही और बातचीत के बजाय बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन अब छात्र आंदोलन से आगे बढ़कर जन आंदोलन बन रहा है और अभिभावकों से भी समर्थन में आगे आने की अपील की।
पासवान ने मुख्यमंत्री से सीधे बातचीत की मांग करते हुए विपक्ष के समर्थन का भी बचाव किया।
ना मीडिया देखी, ना निहत्थे छात्र... झारखंड की पुलिस ने बर्बरता की सीमाएँ लाँघी
कैमरे में कैद हुआ छात्रों पर सोरेन सरकार का हमला
@RitikaChandola की ग्राउंड रिपोर्ट
झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज की भयावह तस्वीरें सामने आ रही हैं। छात्रों की तरफ़ से कोई हिंसा नहीं हुई, पथराव नहीं हुआ, पेट्रोल बम नहीं चले, उनके बीच कोई गुंडे नहीं थे,
हेमंत सोरेन सरकार को छात्रों की आवाज़ सुननी चाहिए, उन्हें दबाना नहीं चाहिए।
#राहुल_भागना_नहीं
राहुल गांधी के अपने सहयोगी ही उनकी अपील को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
राहुल गांधी ने पोस्ट किया, और उनके सहयोगियों ने फिर लाठियाँ चला दीं।
#राहुल_भागना_नहीं
🚨 झारखंड में छात्रा का बड़ा आरोप!
लाठीचार्ज के कुछ मिनट बाद एक महिला छात्र आंदोलनकारी ने दावा किया:
“एक भी महिला पुलिस अधिकारी नहीं थी। सबको पीटा और खदेड़ा गया। झारखंड सरकार ‘मैंया सम्मान योजना’ चलाती है, फिर भी माताओं-बहनों को पीटा जा रहा है।”
अब सवाल ये है… राहुल गांधी कहाँ हैं?
अंधेरा होते ही फिर से लाठीचार्ज। हेमंत सोरेन सरकार डरपोक है।
पुलिस कार्रवाई पर राहुल गांधी के पोस्ट के बाद झारखंड सरकार ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। ट्वीट के बाद फिर लाठीचार्ज, यह बताता है कि सरकार छात्रों की आवाज़ से कितनी डरी हुई है।
और इससे यह भी साफ़ है