🙏 धन्य है ये शिक्षा विभाग...मत करों ये फालतू ढोंग.. रियलिटी चेक दिन में आपसे होती नही रात में करेंगें..
टॉर्च लेकर रात में भवन जर्जर देखने से उसकी मरम्मत के लिए फंड जारी नहीं हो जाएगा.?
जर्जर भवनों या पेयजल की समस्या की मुख्य वजह निरीक्षण की कमी नहीं, बल्कि बजट और संसाधनों की कमी है.!
सुविधाओं की सही जांच कैसे? पेयजल शौचालय और साफ सफाई जैसी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का पता तब चलता है जब 200 से 500 छात्र स्कूल में मौजूद हों न कि सन्नाटे में.!!
यह कैसा आदेश जारी कर दिया?
नियम के हिसाब से सभी सरकारी कर्मचारी उसी गांव में मकान किराए पर लेकर रह रहे होते हैं, जहां पर उनकी पोस्टिंग होती है पर अब हमारे मंत्री जी/आला अधिकारी चाह रहे हैं कि किराए के मकान में नहीं, गांव के किसी व्यक्ति के घर में रुकें रात्रि में और वह घर कैसा होगा, उससे किसी को कोई मतलब नहीं खासकर कि महिलाओं के लिए कितना समस्या उत्पन्न करवाने वाला होगा? शायद इसका अंदाजा आला अधिकारियों/ मंत्री जी को है ही नहीं।
या फिर ये लोग यही चाहते हैं कि शिक्षा विभाग के अधिकारी भी एसडीएम और कलेक्टर की तरह कहीं पर शाम को 5:00 बजे से 9:00 बजे तक रुकें और अपना रात्रि विश्राम उस जगह पर बताएं।
पर यहां पर वह एक और बात भी भूल रहे हैं।
कलेक्टर साहब, एसडीएम साहब के साथ एक ड्राइवर और एक पुलिस कार्मिक भी होता है। प्रिंसिपल के पास में एक पेन के अलावा कुछ नहीं होता। यह बात पता होनी चाहिए।
@madandilawar@RajCMO
सरकार का एक पोर्टल है शाला दर्पण.!
करोडो रूपए सालाना खर्च करके इसका संचालन किया जाता है.!
ये डाउन ही पडी रहती है इसका मेंटिनेश अनवरत चलता रहता है ये सुविधा कम जंजाल ज्यादा है.!
लेकिन 5000 ₹ में AI से बनाई गई वेबसाइट इससे बेहतर चलती है.!
माननीय शिक्षा मंत्री @madandilawar जी से शिक्षक साथियों की ओर से विनम्र निवेदन।
शिक्षा विभाग की मुख्य वेबसाइट शाला दर्पण पर विभाग के लगभग 90% कार्य जैसे—ऑनलाइन उपस्थिति, परीक्षा परिणाम अपलोड, स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC), प्रपत्र-10, अपार (APAAR) सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य संपन्न होते हैं।
दुर्भाग्यवश, यह पोर्टल अधिकांश समय तकनीकी समस्याओं से जूझता रहता है। वर्तमान में प्रपत्र-10 भरने की अंतिम तिथि 20 जुलाई निर्धारित है, लेकिन वेबसाइट न दिन में ठीक से चल रही है और न ही रात में। ऐसे में शिक्षक समय पर कार्य कैसे पूर्ण करें?
माननीय मंत्री जी से विनम्र आग्रह है कि शाला दर्पण पोर्टल की तकनीकी क्षमता और सर्वर व्यवस्था में शीघ्र सुधार कराया जाए, ताकि शिक्षक अनावश्यक परेशानी से बचें और विभागीय कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे हो सकें।
समय पर कार्य की अपेक्षा तभी उचित है, जब व्यवस्था भी समय पर साथ दे।
@RajCMO@rajeduofficial@Dadarwal7@JATbera1@UdtaPanchi__@MohanSihag24@RESMA_7@Ramududi07
#shala_darpan
प्राचार्य काउंसलिंग कार्यक्रम पहले संशोधित अब विधिक कारणों का हवाला देकर स्थगित।
जबकि पिछली दो बार जारी हुए काउंसलिंग के बाद किसी भी प्रकार का विधिक कारण नही बना,
यदि पहले विधिक कारण था तो जारी ही क्यों किया गया था।
आदरणीय मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी गौर करें।
@RajCMO
तो उसके नेचुरल वेट ग्रुप 53 किलोग्राम में क्यों नहीं लड़ने दिया गया और किसको वहां प्रमोट किया था और उसका क्या हुआ यह भी सामने आ गया।
साजिशें छुपती नहीं!
यह अंतरराष्ट्रीय मामला बनेगा। हर पहलवान इस पर लिखेगा। 53 किलोग्राम में लड़ने वाली महिला को अगर 50 किलोग्राम में लड़ाया जाता है तो उसके लिए वजन कितनी बड़ी समस्या होता है इस पर अब दुनिया लिखेगी और देखेगी।
भक्त यहां पर चिल्लाते रहें खुशियां मनाते रहें मगर देश के खेल प्रशासन का भेदभाव पूर्ण रवैया और देश को भी दांव पर लगा देने की कहानियां भी अब छुपेंगी नहीं।
53 किलोग्राम में विनेश को शामिल करने से मना करके जिस अंतिम पंघाल महिला पहलवान को शामिल किया गया था उसे वहां से हारने और अनुशासनहीनता के बाद ओलंपिक संघ ने तत्काल डिपोर्ट कर दिया है।
वह एक अलग कहानी है बड़ी कहानी जो भारतीय कुश्ती संघ और भारतीय ओलंपिक कमेटी को और ज्यादा बेनकाब कर देगी।
- बेल्ट खोल दे रामचंदर
- नही साहेब, मैं नही खोल सकता
- खोल दे, बहुत दर्द हो रहा है ..
रामचंदर कैसे खोलता। थोड़ी देर पहले जब हाथ लगाकर देखा था.. तो समझ गया था कि अंतड़ियां खुल गयी हैं।
बेल्ट ने दबा रखा है।
उसने बेल्ट खोल दी तो...
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साहेब बेहोशी के दौरे में चले जाते, फिर सचेत होते। फिर एक बार बुदबुदाये ..
- अच्छा, एक बात मानेगा मेरी
- हां साहेब
- तू बटालियन चला जा। कहना कि पूरी पलटन शहीद हो गयी। लेकिन कोई पीछे नही हटा
- आपको छोड़कर नही जाऊंगा साहब
पर साहब फिर बेहोश हो चुके थे।
अब जेसीओ रामचन्दर यादव ने उन्हें उठाया, और पहाड़ी के नीचे लाने लगा। रास्ते मे उसे अहसास हुआ। मेजर शैतान सिंह दम तोड़ चुके थे।
बर्फ अब भी गिर रही थी।
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राम चन्दर वहां पहुँचा जहां बटालियन का कैम्प था। पर वहाँ बहुत थोड़े लोग थे। जीप में बिठाकर उसे हेडक्वार्टर लाया गया। उसने कहानी बताई..
बारामूला से उन्हें 2 दिन पहले ही चुशुल सेक्टर में भेजा गया था। वहां LAC के पास रेजांग ला पर एक मोर्चा लगाया गया था। कम्पनी वहीं डटी हुई थी।
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18 नवम्बर की भयंकर सर्दी थी। लेकिन भारतीय सैनिक चौकस थे। रात साढ़े तीन बजे कुछ चीनियों को आते देखा गया। मेजर साहब ने रेंज में आते ही उन पर फायर करने का आदेश दिया।
पहला रेला आते ही एक टुकड़ी ने धुआंधार फायरिंग हुई। चीनी गिरने लगे। वे चींटियों की तरह चढ़े आ रहे थे, मरते जा रहे थे। तीन घण्टे तक लड़ाई चली। फिर थम गई।
सुबह साढ़े छह बजे, रोशनी होते ही बंकरों पर गोले बरसने लगे। मानो बरसात हो रही हो। हर पोस्ट, हर बंकर फटने लगी। आधे घण्टे की शेलिंग के बाद नजारा बदल चुका था।
धुआं छंटते ही चीनी फिर आने लगे। हमारी कई पोस्ट खामोश हो चुकी थी। जो बचे थे, गोलियां दाग रहे थे। मेजर शैतान सिंह को भी शेल का टुकड़ा लगा था।
मगर वे पोस्ट से पोस्ट भागते रहे, जवानों का हौसला बढ़ाते। इसी दौरान गोलियों का एक बर्स्ट लगा। गिर गए, राम चन्दर उन्हें उठाकर ओट में ले आया।
खून तेजी से बह रहा था। साहब बेहोश हो गए। फिर होश में आये। तो जानकारी ली। फिर कहा
- बेल्ट खोल दे रामचंदर
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बर्फबारी कुछ दिन बाद रुकी। सीजफायर हो चुका था, मगर बर्फ की मोटी तह हो चुकी थी। सारे निशान मिट चुके थे।
पूरे तीन माह के बाद बाद जब बर्फ पिघली, इनकी तलाश शुरू हुई।। एक चरवाहे को पहाड़ी पर लाशों के ढेर दिखा।
हैवी शेलिंग से उड़े हुए हाथ पैर, हाथों में अब भी बंदूक, कोई यूँ पड़ा है जैसे अभी उठ कर गोली चलाने लगेगा। गुड्डे गुड़ियों की तरह जहां तहां बिखरे शरीर..
कुमाऊं रेजिमेंट ने अपने 113 सैनिकों की लाशें इकट्ठा की। 18 नवंबर 1962 की उस काल रात्रि में चीनी सेना ने भी अपने 1200 से ज्यादा सैनिक खोए। बाद में आई रिपोर्ट्स बताती है कि चीन को सबसे ज्यादा नुकसान रेजांग ला में हुआ था।
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उस रात, चीनियों नें आसपास की कई पहाड़ियों को बिना लड़े कब्जा किया था। भारतीय सेना के कम फौजी होने के कारण उन्हें पीछे हटकर रिग्रूप होने को कहा गया था।
यह आदेश, रेजांगला में मेजर शैतान सिंह भट्टी को भी मिले थे। मगर उनकी कम्पनी में अपने रिस्क पर, पोस्ट न छोड़ना तय किया था।
नतीजा शहादत होगा, वे जानते थे।
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मेजर शैतान सिंह को परमवीर चक्र मिला। रेजांगला में उस पहाड़ी पर एक स्मारक बनाया गया। जहां कुमाऊं रेजिमेंट के 113 वीर अपनी जान दे गए।
स्मारक 60 सालों तक चीन की ओर देखकर फुसफुसाता था- यहां न किसी को घुसने दिया गया, न आने दिया गया है।
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60 साल बाद वह इलाका, आखिरकार बिना लड़े हम हार गए। इलाका "बफर जोन" हो गया है।
स्मारक तोड़ दिया गया। मेजर शैतान सिंह की हार आज हुई है। यह खबर भारतीय अखबारों में नही है।
@AshwiniVaishnaw#IndianRailway के आज के हालात।
स्लीपर कोच के यात्रियों की दुर्दशा
सामान्य डिब्बों की संख्या बढ़ाना चाहिए नहीं तो सीट से ज्यादा टिकट की बिक्री बंद कर दीजिए।
प्रधानमंत्री मोदी सत्र शुरू होने से पहले 8 मिनट 25 सेकंड बोले - और उनके पास मणिपुर के लिए सिर्फ़ 36 सेकंड थे? मणिपुर पर बोलने के बजाय आप राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर ताने देने लगे?
घटना 77 दिन पुरानी है और आपको वाक़ई में अब पता चल रहा है इसके बारे में?
सच तो ये है कि इस हैवानियत के आप भी उतने ही ज़िम्मेदार हैं जीतने वीडियो में दिखने वाले दरिंदे.
आज इस देश की हर औरत नंगा महसूस कर रही है - लगता है कोई शरीर ही नहीं आत्मा को भी नोच रहा हो.
धिक्कार है, लानत है आप पर मोदी जी, दुर्भाग्य है आप इस देश के प्रधानमंत्री हैं.
ये वो लोग हैं जो बिल्किस बानो के आरोपियों को रिहा करवाते हैं,
ये वो लोग हैं जो विश्वविजेता महिलाओं को का शोषण करने वाली चैंपियन पहलवान बेटियों तक पर अत्याचार करने वालों को संरक्षण देते हैं,
ये वो लोग हैं जो हाथरस में बलात्कार पीड़िता के शव का ज़बरदस्ती दाह संस्कार करा देते हैं,
ये वो लोग हैं जिनका आईटी सेल दिन रात महिलाओं को भद्दी गालियाँ देता है,
असली दोषी दो हैं।
मीडिया और जुडिशरी।
इन दोनों ने अपना काम नहीं किया।
इसलिए मणिपुर में यह सब हो रहा है।
वीडियो तो केवल प्रमाण हैं बाकी इसके कारण तो इन दोनों संस्थाओं का पूरी तरह ध्वस्त हो जाना है।
भाजपा और संघ जैसे हैं वह तो वैसे हैं।
लेकिन जुडिशरी ने सबसे ज्यादा निराश किया।