आज भुवनेश्वर से दिल्ली लौटने के क्रम में दिल्ली एयरपोर्ट पर सहयात्री डॉ. नीलम एवं उनके परिवार से मिलकर अत्यंत प्रसन्नता हुई।
चूँकि डॉ नीलम का परिवार भुवनेश्वर से आ रहा था, मैंने उनके बच्चों नचिकेत और आर्यन से ओड़िआ में ही संवाद करना शुरू किया। मेरे प्रश्नों का जवाब उन्होंने सहज और शुद्ध ओड़िआ में दिया। बातों-बातों में पता चला कि डॉ नीलम सोमलकर मूलतः महाराष्ट्र के निवासी हैं जो कि भुवनेश्वर में कार्यरत हैं। दूसरी और सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले नचिकेत और आर्यन जिनकी मातृभाषा मराठी है उनके मुख से इतनी सहज और शुद्ध ओड़िआ सुनकर आश्चर्य भी हुआ और गर्व भी। यही एक भारत, श्रेष्ठ भारत और NEP की सच्ची भावना है। नचिकेत और आर्यन को आशीर्वाद और अनेकों शुभकामनाएं।