प्रिय समाजवदियों,
अब हमारे बीच वो महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ श्री राम गोविंद चौधरी जी नहीं रहे, जिन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी व समाजवादी मार्गदर्शक जय प्रकाश नारायण जी और भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की अगुवाई में समाजवादी मूल्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों की मशाल सदैव प्रज्ज्वलित रखी।
बलिया की क्रांतिकारी धरती से उठकर छात्र राजनीति के कठिन मार्ग से होते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक उनकी आवाज़ और अकाट्य तर्कों का सदैव सम्मान हुआ। सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में वो जीवन भर संघर्षरत रहे। उन्होंने जनपक्ष को हमेशा सबसे पहले और ऊपर रखा। विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने तब भी अपनी आवाज़ बुलंद रखी जब सदन में हमारे 50 विधायक भी नहीं थे। जब वो बोलते थे तो सदन उन्हें बड़ी शांति और शिद्दत के साथ सुनता था और उनके खर-प्रखर वाचन और सत्यनिष्ठता से सीख-सबक भी लेता था। उनकी ज़मीनी पकड़ और जनता से गहरे जुड़ाव के कारण वो स्वयं में सौहार्दपूर्ण सकारात्मक सामाजिक राजनीति की एक सक्रिय पाठशाला की तरह रहे। उन्होंने सांविधानिक, लोकतांत्रिक, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा व स्वतंत्रता, समता और व्यक्ति की गरिमा व प्रतिष्ठा के लिए हमेशा निर्भय होकर आंदोलित रहना सिखाया।
एक सशक्त समाजवादी नेतृत्व के रूप में सपा में उनकी भूमिका सदैव एक दिग्दर्शक के रूप में रही। नेताजी और उनका साथ समाजवादी संकल्पों की पूर्ति के संघर्षों में सदैव एकजुट रहा।
अब हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि अपने उन ‘बड़ों के लक्ष्यों’ की पूर्ति में संपूर्ण समर्पण और संकल्प के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ें, जो अब हमारे बीच सैद्धांतिक प्रेरणा मात्र ही विद्यमान हैं।
पुनः पुन: भावभीनी श्रद्धांजलि!
आपका
अखिलेश
कोडीन कांड जारी है… बोतल-का-बोतल और सिरप-का-सिरप करनेवाले यूपी में ही हैं या अपने संगी-साथियों के साथ बोरियाँ भरकर, वो भी सुंरग के रास्ते महाराष्ट्र-कर्नाटक निकल लिए हैं।
गांजागंज, वनस्पति गंज और कोडीनगंज : भाजपाई सरकार की बस यही उपलब्धि है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री राम गोविंद चौधरी जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि !
बरेली में भाजपा द्वारा आयोजित पिछड़ा वर्ग सम्मलेन में कुर्सियां खाली ही रह गईं और मंच पर भाजपाई सांसद व स्थानीय नेतागण कई घंटों तक जनता के आने का इंतजार ही करते रह गये। महाराष्ट्र से आये हुए कुबेर का भ्रष्टाचार का ख़ज़ाना भी काम नहीं आया। उप्र की जनता मंदिर से चुराये गये ‘भाजपा के पाप का पैसा’ नहीं लेना चाहती है।
पीडीए समाज ने अधर्मी भाजपा को हक़ीक़त का आइना दिखा दिया है।
भाजपा ख़त्म!
संपूर्ण विश्व को अनंत चतुर्दशी की अनंत शुभकामनाएँ!!!
जैन समाज में प्रचलित ‘क्षमा वाणी पर्व’ के इस महान अवसर पर ये सीख लें कि जीवन में भूल और गलती से किसी का मन दुखाना सामाजिक व्यवहार का हिस्सा है, जिसके कारण संबंधों में दूरी आ जाती है, जिन्हें आपसी समझ से पाटा भी जा सकता है।
इसीलिए ‘क्षमा वाणी’ के इस महान पर्व से क्षमा माँगने की व्यावहारिक सीख लें और जाने-अनजाने में हुई मन-वचन-करम की गलतियों के लिए आपस में क्षमा के सकारात्मक भाव से मानवीय संबंधों और संवेदनाओं को और भी दृढ़ करें। सबके मत को सहनशीलता के साथ सुनें और उनसे टकराव की जगह समायोजन करते हुए ‘जीओ और जीने दो’ की बात करें। ‘मत के भेद’ को सदैव विविधता को रूप मे देखा जाए और समय रहते उसे ‘मन का भेद’ बनने से रोका जाए तो जीवन सरल और मन शांत हो जाता है। सौहार्द और शांति ही जीवन की सबसे बड़ी और सच्ची उपलब्धि है।
क्षमा वीरस्य भूषणम्!
‘पीडीए रथ’ की पहली यात्रा में रायबरेली में बात इतने बड़े हार से स्वागत की नहीं है कि उसे क्रेन से उठाया जाए, बात अपनों से मिल रहे बेइंतहा प्यार-मोहब्बत की है।
रायबरेली की जनता और सभी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और नेताओं का हार्दिक धन्यवाद!
रायबरेली ने सुनिश्चित कर दिया है कि हम अपनी ‘पीडीए सरकार’ बनाने जा रहे हैं।
जो पीड़ित, वो पीडीए!
ये एक बेहद दुखद समाचार है कि उप्र के मुजफ्फरनगर जिले के पुरकाजी थाना क्षेत्र के हरैटी गांव में ग्राम प्रधान विवेक राठी के इकलौते बेटे रोहन राठी की लाठी-डंडों से पीटकर बेरहमी से हत्या की गई है।
इस दुखद समाचार से पूरे पश्चिमी उप्र में गुस्सा और नाराज़गी फैल गई है। इस मामले से टीम बनाकर जाँच करने का दिखावा न किया जाए। हत्यारों का पर्दाफाश हो।
दुख की इस घड़ी में हम संपूर्ण संवेदना के साथ शोक संतप्त परिवार के संग हैं।
न्याय हो!
अब ये भूतकाल बननेवाले हैं, इसीलिए ये आजकल सिर्फ़ भूतकाल में ही बातें कर रहे हैं। दरअसल हार का भूत इनके सिर चढ़कर नाच रहा है।
इनकी भैंस पानी में चली गई है।
जिसका शासन ही अपराध पर टिका हो, उसकी पुलिस भी हर तरह से भ्रष्ट हो जाती है। अमरोहा में एक युवती के साथ हुआ सामूहिक बलात्कार पुलिस पर लगा ऐसा दाग़ है जिसे किसी का प्रश्रय भी नहीं बचा पाएगा।
ऐतिहासिक कार्रवाई हो!
लोग अपना दर्द लेकर आते हैं, उम्मीद लेकर जाते हैं… इससे ज़िम्मेदारी का एहसास और गहराता है, और इंसाफ़ के लिए संकल्प और बढ़ जाता है।
पीड़ा बढ़ रही है, इसीलिए ‘पीडीए’ बढ़ रहा है क्योंकि :‘जो पीड़ित, वो पीडीए’