कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥
तेरा कर्म करने में अधिकार है इनके फलो में नही। तू कर्मफल के प्रति आसक्त मत होओ?
अभी घुसपैठिये बिना किसी अपमान/हिंसा के भारत छोड़कर बांग्लादेश लौट रहे हैं। सन् 47 में पाकिस्तान छोड़कर भारत लौटने वाले हिंदुओं के साथ मुस्लमानों नें पाकिस्तान से भारत तक क्या किया था यह इतिहास है। यही अंतर है हिंदुओं और मुस्लिमों में। इसपर भी हमें ही असहिष्णु कहा जाता है।
एक गॉंधी, एक नेहरू, एक जिन्ना, एक कॉंग्रेस, एक मुस्लिम लीग ही भारत के लिए, हिंदुओं के लिए घातक सिद्ध हुए हैं। यदि उपरोक्त सभी एक में मिल जाएं तो वे सेक्युलर्स/कम्युनिस्ट्स कहलाएंगे। और सभी सेक्युलर्स/कम्युनिस्ट्स को यदि निचोड़ दिया जाए तो वह बनेगा पप्पू।
हिंदुओं! हम पर अपने साहसी पूर्वजों का ऋण है। यदि वे लोभी और डरपोक रहे होते तो आज हम हिंदू नहीं रहे होते। ईसाई/मुस्लिम हो गए होते। इसलिए हमारा धर्म है कि हम सभी हिंदू हिंदुत्व के लिए कार्य कर पितृ ऋण से मुक्त हो जाएं। भारत का कल्याण करें।
कोई भी मुस्लिम शरणार्थी किसी मुस्लिम देश में शरणार्थी के रूप में, घुसपैठिये के रूप में प्रवेश क्यों नहीं करते? नन-मुस्लिम देशों में ही ऐसा क्यों करते हैं? क्योंकि उन्हें नन-मुस्लिम देशों को भी मुस्लिम देश बनाना है।
जो कोई भी व्यक्ति/संगठन RSS को आतंकी संगठन बोलते हैं वे सभी व्यक्ति/संगठन स्वयं आतंकी हैं। और जो अधिकारी अथवा विभाग उनके इस कथन का विरोध नहीं करते। उन्हें दंडित नहीं करते वे सब भी आतंकी ही हैं।
सेक्युलर्स पिछले कई वर्षों से भौंकते आ रहे हैं कि- मोदीजी बिना निमंत्रण के पाकिस्तान चले गए बिरयानी खाने।
... और दिन- रात अडानी-अम्बानी को गालियाँ देने वाले वही सेक्युलर्स मल-मूत्र, जूठन चाटने पहुँच गए अंबानी के यहाँ?
अरे वाह रे स्वाभिमानी कुत्तों!
थू: है तुम लोगों पर! आक् थू:!
भारत एवं लाखों हिंदुओं के हत्यारे हो गए- महात्मा! पिता!
लाखों हिंदुओं को ईसाई बनाने वाली डायन हो गई- मदर टेरेसा!
... और अब उसी मार्ग पर हैं- राजमाता! आउउ खॉं! सभी सेक्युलर्स! आदि।
ऐसे में कैसे बचेंगे हिंदू?
जागो! हिन्दुओ!! जागो!!!
उदार नहीं?
जेसे को तैसा करने वाले बनो?
हिंदू जिसे बैल बुद्धि मान रहे हैं न, मूल रूप से वह भेड़िया बुद्धि है। महाधूर्त बुद्धि है। महाघातक है हिंदुओं के लिए। खलनायक है वह। और खलनायक कभी बैल बुद्धि नहीं होते? यदि वह सफल हो गया तो हिंदुओं को इसका बोध भी नहीं हो पाएगा। हिंदू भौंचक्के रह जाएंगे।