🚨Very concerning information coming in.
Both the CBI and ED are being pressured by the regime to raid close associates of the two Election Commissioners. Both of them are resisting pressure to hold a joint press conference with Gyanesh Kumar and unequivocally refute and trash the Indian Express report.
The same had happened to Ashok Lavasa. His family members were sent IT notices before he was pressured to resign.
This is completely unacceptable. The government has totally forgotten that this is post-Jantar Mantar India and the public cannot be fooled through such illegal and fraudulent tactics.
मोदी सरकार ने चुपचाप UPI पर फ़ीस लगाने का रास्ता खोल दिया है।
अब ₹2,000 से ऊपर के merchant UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। इन ट्रांजैक्शंस की संख्या भले ही सिर्फ़ 5% हो, लेकिन UPI के कुल transaction value का करीब 65% इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फ़ीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फ़ीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी payment कंपनियां लंबे समय से भारत की zero-MDR नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है।
US Trade Deal की तरह ही, Compromised PM मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने surrender कर रहे हैं।
बड़ी खबर-
मेरी अभी दिव्या से बात हुई।
She was in tears!!!
If emergency has been declared in Lucknow?
योगी आदित्यनाथ से सवाल करने पर प्रताड़ना?
योगी आदित्यनाथ से प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में सवाल करने वाली महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव से पूछताछ की जा रही है?
बीजेपी के वॉलंटियर्स को उसे घेरने के आदेश किसने दिए?
LIU को उसके पूछताछ के निर्देश किसने दिए हैं?
लखनऊ पुलिस क्या सत्ता की जयजयकार में सारी सीमाएं तोड़ दी जाएंगी?
सवालों से डरे हुए शासक का ये स्तर?
@myogiadityanath@narendramodi@PMOIndia
सवालों से भागते योगी आदित्यनाथ
BJP वालों को सवालों से बहुत डर लगता है। कभी मोदी भागने लगते हैं, कभी योगी भागने लगते हैं।
काम ही ऐसे किए हैं, डरना तो बनता है।
नाम बदलनेवाले अब ‘प्रेस वार्ता’ का नाम बदलकर ‘प्रेस एकालाप’ कर दें क्योंकि जब सिर्फ़ बयान दिया जाना है और प्रेस को सवाल पूछने का अधिकार ही नहीं है तो बिना वार्तालाप ‘वार्ता’ शब्द का क्या अर्थ रह जाता है? माननीय सबका समय क्यों ख़राब कर रहे हैं, प्रेस रिलीज़ भेजकर ही काम चलाएं और दोनों का समय बचाएं।
सत्य ये है कि उप्र में सवालों की भरमार है लेकिन इनके पास जवाब ही नहीं हैं। मुँह मोड़ कर जाना, मैदान छोड़कर भागना भी कहलाता है।
ये शासन में पक्षपात करते हैं और प्रेस वार्ता में एकतरफ़ा बयानबाज़ी। अब क्या ये भी कहेंगे कि ‘प्रश्न सुनने के मूड में नहीं है।’
#प्रेस_एकालाप
बड़ी ख़बर-
योगी आदित्यनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में ‘लोकतांत्रिक’ बवाल हो गया।
एक महिला पत्रकार ने योगी आदित्यनाथ से सवाल पूछ लिया।
योगी आदित्यनाथ अवाक रह गए।
अगले प्रधानमंत्री बनने की धुन में उनकी बिना कोई सवाल लिए प्रेस कॉंफ्रेंस करने की आदत हो गई थी।
महिला पत्रकार के सवाल से हतप्रभ योगी आदित्यनाथ तुरंत चलते बने।
इस बीच महिला पत्रकार चीखती रही,
"मुख्यमंत्री जी, प्रेस वार्ता के लिए बुलाया है तो सवाल तो लेते जाइए।
ये प्रेस वार्ता है। मुख्यमंत्री जी!
प्रेस का जवाब नहीं दे पा रहे हैं आप। फिर बुलाया किसलिए था?"
सूचना के 'विशाल' तंत्र के होश फाख्ता हो गए।
लखनऊ ने एक नई सुबह देखी।
बिना कोई सवाल लिए, बिना किसी जवाबदेही के,
सिर्फ पुलिस की लाठी के दम पर राज करने वाले तंत्र का ऐतिहासिक पर्दाफाश हुआ।
कलम बधाई की पात्र है।
बड़ी खबर-
योगी आदित्यनाथ से प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में सवाल करने वाली महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव से पूछताछ की जा रही है?
LIU को ये निर्देश किसने दिए हैं?
लखनऊ पुलिस क्या सत्ता की जयजयकार में सारी सीमाएं तोड़ दी जाएंगी?
If emergency has been declared in Lucknow?
@myogiadityanath@narendramodi@PMOIndia
मीडिया के सवालों से भागते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ!
हर भाजपाई का यही हाल है.. ये सब गोदी मीडिया और PR के दम पर नेता बने हुए हैं!
खैर, जनता जाग रही है, बहुत जल्द भाजपा फिर 1980 वाले समय में पहुंच जायेगी!