EWS और UPSC स्कैम।
UPSC 2025 में 104 कैंडिडेट EWS कोटा से चुने गए!
उनमे से 67 ऐसे कोचिंग से पढ़े जिसकी फीस लाखों में थी।
14 कैंडिडेट IIT से ग्रेजुएट थे।
28 के माता-पिता का बिजनेस है।
10 MNCs में नौकरी करते थे।
ग़ज़ब खेल चल रहा है।
फरवरी 2026 में एक “टीचर” का वाक्य—“पैर की जूती सिर पर रखोगे?”—सिर्फ बदतमीज़ी नहीं, मनुवादी घमंड का घोषणापत्र है। ये वही सोच है जो समाज को शरीर बनाकर कुछ को “मस्तक” और बाकी को “पैर” घोषित करती है।
लेकिन भारत का संविधान कहता है—We, the People of india —यहाँ कोई ऊँचा-नीचा नहीं। इसलिए आज लड़ाई नौकरी की नहीं, संविधान, शिक्षा और सामाजिक न्याय की है।
जाति जनगणना हमारा मुद्दा है—क्योंकि हम हिस्सेदारी, प्रतिनिधित्व और बराबरी का हिसाब माँगते हैं। जय भीम, जय संविधान।
"भाजपा के बड़े नेता और प्रवक्ताओं ने बताया कि इस UGC का विरोध कैसे करना है"
आज तक के बड़े पत्रकार बता रहे है कि BJP ने खुद #UGCRegulations के खिलाफ माहौल तैयार करवाया।
BJP फिर से SC ST OBC के साथ गद्दारी की!
एक जाति की पार्टी भाजपा इस देश के हजारों जातियों के हक के खिलाफ क्यों खड़ी होती रहती है?
DU के छात्रों से बातचीत हो रही।
जब बात जाति की आई तो देखिए एक संभ्रांत का ज़हर कैसे बाहर आ रहा!
खुल कर कह रही “ आरक्षण लोगे तो बोलेंगे SC हो , जनजाति वाले हो”
सोचिए विश्विद्यालय में बहुजन छात्रों का जीना कितना मुश्किल कर रखा होगा!
और जब चुनाव आयेंगे यही कहेंगे “सब हिंदू हैं”!
बीते 10 दिनों में एक तरफ प्रधानमंत्री को जाति के नाम पर खुलेआम अपमानित किया गया, फिर भी न FIR—न टीवी डिबेट, न कोई कार्रवाई। दूसरी तरफ अगर बहुजन समाज सड़क पर उतरे तो वही पुलिस, वही मीडिया तुरंत “कानून-व्यवस्था” का डंडा उठा लेता है।
असली मुद्दा साफ है: कैंपसों में SC-ST-OBC के खिलाफ भेदभाव और अत्याचार बढ़ रहे हैं, पर बहस को नोटिफिकेशन और झूठे डर से भटका दिया गया। समाधान भी साफ है—जाति जनगणना, पारदर्शी नियम, और न्याय की गारंटी।
UGC के विरोध में जो भाजपा समर्थक आए, उनकी संख्या 100 भी नहीं थी, लेकिन मीडिया उन्हें पूरा देश बताकर दिखा दी।
यूजीसी को लागू कराने के लिए आज पटना में हजारों ओबीसी/एससी/एसटी के छात्र आए, मगर मीडिया उन्हें 100 की संख्या में बता रही है।
सबसे पहली बात कि मीडिया इसे दिखा ही नहीं रही है, कुछ लोकल चैनल ही हैं जो हजारों की संख्या को 100 बताकर पेश कर रहे हैं।
पहचान लो बहुजनो, हमारे साथ धोखा कौन कर रहा है।
#UGC_लागू_करो
#UGC_बहाल_करो
#We_support_UGC
मैं जनरल से आता हूँ लेकिन मुझे UGC का डर नहीं है। जब मैं जातिवाद में विश्वास नहीं करता तो मैं क्यों डरु भाई। मुझे तो UGC का समर्थन करना चाहिए। जिसको जातिवाद करना है, जिसके अंदर ये किड़ा घुसा हुआ है, जिसे अंदर से खुरेंच कर देखिए तो अंदर जातिवाद भरा हुआ है सिर्फ उसको डर लग रहा है।
इतना बड़ा आंदोलन आज यूजीसी लागू कराने के लिए पटना में हुआ।
पर एक भी गोदी मीडिया ने नहीं दिखाया, न डिबेट किया।
यह गोदी मीडिया चंद लोगों की है, चंद लोग इसमें 100% कब्जा किए हुए हैं। घोर जातिवादी लोग बैठे हैं।
#UGC_लागू_करो#UGC_बहाल_करो#We_support_UGC_Act
शर्म करो मीडिया वालों🤮
जब UGC का विरोध हो रहा था तो सब न्यूज चैनलों ने इसका प्रसारण भर भर कर किया.
आज बहुजन समाज के बच्चे UGC के समर्थन में सड़क पर उतर गये हैं, लेकिन इसको दिखाने वाला कोई नहीं है.
अभी चंद दिनों पहले UGC के नए प्रावधान के विरोध में प्रधानमंत्री मोदी को गालियाँ दी गईं, उनके पोस्टरों पर चप्पल-जूते मारे गए और “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” जैसे घृणित नारे लगाए गए। लेकिन न तो कहीं की पुलिस-प्रशासन ने कोई कार्रवाई की, न ही किसी को डिटेन किया गया।
दूसरी ओर, जब दलित-पिछड़े #UGC_लागू_करो का नारा लगाते हुए सड़क पर उतरे, तो देखिए कैसे पुलिस उन्हें बसों में भरकर ले जा रही है। इससे आप ख़ुद समझ सकते हैं कि बीजेपी सरकार दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों की कितनी हितैषी है।