सच्चे समाज सुधारक
अश्लील फिल्मों से समाज में बढ़ती अश्लीलता, छोटे कपड़ों का चलन आम हो गया है।
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वहीं संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायी उनके बताए सतमार्ग पर चलकर फिल्में, सिरियल, अश्लील गाने आदि पूर्ण रूप से त्याग चुके हैं।
जो कि समाज सुधार की अद्भुत पहल है।
#ये_है_गीता_का_ज्ञान
#ये_है_गीता_का_ज्ञान
कुछ धर्म गुरुओं का कहना है किसी भी भक्ति साधना से पाप नहीं कट सकते।
जबकि संत रामपाल जी महाराज ने गीता जी में प्रमाणित किया है कि पूर्ण परमेश्वर की भक्ति करने से और उसको भोग लगाकर बचे हुए अन्न को खाने से साधक पाप मुक्त हो जाता है।🙏
अश्लील फ़िल्मों से समाज में बढ़ती अश्लीलता, छोटे कपड़ों का चलन आम हो गया है।
वहीं संत रामपाल जी महाराज जी के अनुयायी उनके बताए सतमार्ग पर चलकर फिल्में, सिरियल, अश्लील गाने आदि पूर्ण रूप से त्याग चुके हैं।#अच्छे_हों_संस्कार_संसार_के बच्चों के
#अच्छे_हों_संस्कार_संसार_के बच्चों के तत्वज्ञान से बुराइयों का अंत।
संत रामपाल जी महाराज ने अपने तत्त्वज्ञान से समाज में व्याप्त अनेकों बुराई जैसे नशा, दहेज का लेन देन, रिश्वतखोरी आदि को खत्म किया है।
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गीता अध्याय 1 श्लोक 12 से 15
में कहा है कि तीनों प्रभुओं (त्रिगुणमाया) के पुजारी राक्षस स्वभाव को धारण किए हुए, मनुष्यों में नीच, शास्त्र विरूद्ध साधना रूपी दुष्कर्म करने वाले, मूर्ख मुझे (ब्रह्म को) नहीं भजते ।
#ये_है_गीता_का_ज्ञान
#अच्छे_हों_संस्कार_संसार_के बच्चो के
दहेज एक ऐसी सामाजिक कुरूति बन चुकी है जिसकी वजह से न जाने कितनी बहन बेटियो को आत्महत्या तक करने पर मजबूर कर दिया जाता है संत रामपाल जी महाराज के तत्वज्ञान से प्रभावित होकर व परमात्मा से डरकर उनके अनुयाई न दहेज लेते है और न ही दहेज देते है।
#अच्छे_हों_संस्कार_संसार_के बच्चों के देश में व्याप्त भ्रष्टाचार की समाप्ति Social Reformer Sant Rampal देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी अपने अनुयायियों को ऐसा निर्मल ज्ञान दे रहे है जिससे उनके अनुयायी न रिश्वत लेते है और न देते है।
#अच्छे_हों_संस्कार_संसार_के बच्चों के
देश में व्याप्त भ्रष्टचार को समाप्त करने के लिए संत रामपाल जी महाराज जी अपने अनुयायियों को ऐसा निर्मल ज्ञान दे रहे है जिससे उनके अनुयायी न रिश्वत लेते है और न देते है।
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गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि मेरी भक्ति चार प्रकार के लोग करते हैं अर्थार्थी, अर्थ, जिज्ञासु और ज्ञानी गीता ज्ञान डाता अपनी भक्ति से होने वाली गति को भी अनुत्तम कह रहा है।
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कबीर, ये तन विष की बेलड़ी, गुरु अमृत की खान।
शीश दिए जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान।।
यह मानव शरीर विषय-विकारों रुपी विष का घर है। गुरु तत्वज्ञान रुपी अमृत की खान है। ऐसा गुरु शीश दान करने से मिल जाए तो सस्ता जानें। शीश दान अर्थात गुरु दीक्षा किसी भी मूल्य में मिल जाए।
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गीता सार गीता अध्याय 18, श्लोक 66
गीता ज्ञान दाता काल कहता है, " मेरी सभी धार्मिक पूजाओं को मुझमें त्याग कर, तू केवल उस एक पूर्ण परमात्मा की शरण में जा। मैं तुझे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा; तू शोक मत कर।
🙇🙇
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गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता बोलने वाले प्रभु ने अपने से अन्य किस परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है?
जानने के लिए हिन्दू साहेबान! नहीं समझे गीता, वेद, पुराण पुस्तक को Sant Rampal Ji Maharaj App से डाउनलोड करके पढ़ें।
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