चंपत के चाचा और मिश्रा शुक्ला पांडे के मामा कह रहे हैं-टिन्नू यादव को फांसी की सज़ा होनी चाहिए बाकी सब मिश्रा शुक्ला पांडे को 6-6 महीने की सज़ा होनी चाहिए।
ये बाबा ऐसे ही नहीं बोल रहा है।
मनुस्मृति में सज़ा का यही प्रावधान है।
समतामूलक तो सिर्फ संविधान है।
"हमने विधायक लुटते हुए देखे, सांसद लुटते हुए देखे, चुनाव लुटते हुए देखे, बच्चों का भविष्य लुटते हुए देखा। जल, जंगल जमीन सब लूट लिया...। हमें लगा कि भाजपा वाले अब और क्या लूटेंगे?
लेकिन इन्होंने हमें गलत साबित करते हुए प्रभु राम को भी लूट लिया।"
- अनिल यादव, कांग्रेस प्रवक्ता
हर जज रंजन गोगोई या चंद्रचूड़ नहीं होता.
कुछ जज लोया की तरह ईमानदार भी होते हैँ.
पहली तस्वीर मे दिख रहे इस जज का नाम
Nicholas G Garaufis है , जिसने अडानी की दुनिया अमेरिका मे हिला दी है.
US जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा गौतम अडानी के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज किये जाने के आदेश को रद्द करते हुए 13 जुलाई तक इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
निकोलस ने साफ किया कि मुझे ये कारण जानना है कि किसके दबाव मे अडानी के केस को कमजोर किया गया है??
भारत मे होते निकोलस तो उनके मॉर्निंग वॉक का टाइम पता किया जा सकता था.
राज्यसभा ऑफर की जा सकती थीं.
पर करोड़ों रूपये ट्रम्प के लिए फूंक कर, ट्रेड डील के लिए पूरे देश के लिए बातें सुनकर भी साहब अपने दोस्त को बचा नहीं पा रहे.
ईमानदार जज को अमेरिका नहीं खरीद सकेगा
जल्दी ही अमेरिका दौरा होगा, देख लेना.
🔥 BHU में जातिवाद का खुलासा!
प्रोफेसर शोभना नार्लीकर (BHU) ने खुलकर बता दिया -
BHU में जाति पूछकर नंबर दिए जाते हैं... जाति देखकर PhD में एडमिशन दिए जाते हैं... नौकरी भी जाति के आधार पर दी जाती है!
ये कोई आम आरोप नहीं, BHU जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर का बयान है।
शोभना जी के अनुसार -
ये है असली चेहरा "हिंदू विश्वविद्यालय" का!
जहाँ मेरिट नहीं, मनुवादी जातिवाद चलता है।
ब्राह्मण संस्कृति में पिछड़े, दलित, ओबीसी को कुचलने की साजिश रची जाती है। PhD, जॉब, नंबर - सब जाति के चश्मे से देखा जाता है।
कितने और सबूत चाहिए बहुजन समाज को?
जब संस्थान खुद जहर उगल रहे हैं तो संविधान बचाओ, मनुवाद हटाओ का नारा और तेज करना होगा।
धन्यवाद प्रोफेसर शोभना नार्लीकर जी सच्चाई बोलने के लिए।
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अब यह स्वीकार किया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत के 6 जवान शहीद हुए।
लेकिन एक सवाल आज भी जवाब मांगता है।
28 जुलाई 2025 को संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा था - "अगर पूछना है तो यह पूछिए कि क्या इस ऑपरेशन में हमारे जवानों को कोई क्षति हुई? उत्तर है - नहीं।"
इस बयान पर सत्ता पक्ष ने ज़ोरदार तालियाँ बजाईं, मेज़ें थपथपाईं और इसे अपनी उपलब्धि की तरह पेश किया।
अगर अब सच यह है कि 6 जवान शहीद हुए, तो उस दिन संसद में देश को क्या बताया गया था? क्या संसद को अधूरी जानकारी दी गई? या फिर राजनीतिक विजय का माहौल बनाने के लिए तथ्यों को छिपाया गया?
जब राम मंदिर का उद्घाटन था, तब हर जगह प्रधानमंत्री का चेहरा था।
अब दान घोटाले के आरोपों पर न प्रधानमंत्री बोल रहे हैं, न योगी आदित्यनाथ।
राम के नाम पर राजनीति करने वाले, अब राम भक्तों के सवालों से क्यों भाग रहे हैं?
:प्रियांक खड़गे
RSS वाले पिछले 50 साल से यह झूठ फैला रहे हैं कि इंदिरा गांधी ने आपातकाल इसलिए लगा दिया था क्योंकि उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी।
यह देखिए तब के RSS प्रमुख बालासाहब देवरस का इंदिरा गाँधी को लिखा पत्र जिसमें वह ख़ुद इंदिरा गाँधी को बधाई दे रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट की पाँच जजों की पीठ ने श्रीमती इंदिरा गांधी के निर्वाचन को वैध ठहराया है।
अब समय आ गया है कि 50 साल के झूठ से पर्दा हटाया जाय।
स्वामी प्रसाद मौर्य का भगवान राम पर विवादित बयान देने पर, साधु संतों के स्वामी प्रसाद मौर्य का जीभ काट कर लाने वाले को 5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, "भगवान राम मंदिर में चोरी हो गयी. जब भगवान राम अपनी मंदिर की रक्षा नही कर पाए तो आप लोगों की रक्षा क्या करेंगे"
स्वामी प्रसाद मौर्य की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है. स्वामी प्रसाद मौर्य काफी लंबे समय से राजनीति में हाशिय पर चल रहे हैं. 1996 में जनता दल छोड़ने के बाद, मौर्य ने BSP का दामन थामा था.
आदरणीय बहन मायावती जी ने स्वामी प्रसाद मौर्य को अपने मंत्रिमंडल में हर बार मुख्यमंत्री बनाया. एक बार मौर्य विधानसभा चुनाव हार गए थे, इसके बावजूद बहनजी ने मौर्य को मंत्री बनाया.
स्वामी प्रसाद मौर्य ने जिस थाली में खाया उसी में छेद कर दिया. 2016 में बीजेपी में गए और 2022 में समाजवादी पार्टी में. फिलहाल अपनी निजी दुकान, यानी पार्टी बनाकर जुगाड़ चला रहे हैं.
मंडल आंदोलन के एक सबसे अहम अध्याय वीपी सिंह जी को उनके जन्मदिन के दिन यहाँ से याद करें. आज़ाद भारत की विभाजन रेखा है मंडल. मंडल के पहले और मंडल के बाद के भारत में बुनियादी फ़र्क़ है.
Dr Ratan Lal पूछते हैं: इंदिरा का विरोध किसने किया?
→ बैंकर्स और पूंजीपति
→ शाही परिवार (राजभत्ता)
→ विदेशी ताकतें।
मोदी के तहत किसे फायदा होता है?
→ बैंकर्स और पूंजीपति
→ अरबपति
→ विदेशी ताकतें।
मोदी का "संविधान हत्या दिवस" इतिहास का सबसे बड़ा मजाक है।
सुनिए 25 जून 1975 को आपातकाल घोषित करने वाला इंदिरा गांधी का संदेश।
कैबिनेट मंत्री की हत्या, चीफ जस्टिस पर प्राणघातक हमला, सेना से तख्तापलट की विपक्ष की अपील, विधायकों से जबरन इस्तीफ़े लिखवाकर सरकार गिराना और पूरे देश को हिंसा में झोंकना।
इन हालात में प्रयोग हुआ था संविधान का आपातकाल का क्लॉज़।
राजीव रंजन :- जो जगह मायावती ने छोड दी निर्माण कार्य की उसको अखिलेश यादव ने पूरा किया...
📍लखनऊ मे अगर किसी का काम दिखाई देगा तो अखिलेश यादव का काम दिखाई देगा।
आप एयरपोर्ट से लेकर चिनहट तक चले जाए योगी आदित्यनाथ की 9.5 साल की सरकार का कोई एक काम दाहिने बाए दिखाई नही देगा।
भरत तिवारी एनकाउंटर पर बोले भाई वीरेंद्र : "दलितों के एनकाउंटर को नक्सलवाद से जोड़कर देखा जाता है, मुसलमानों के मामलों में आतंकवाद से संबंध बताया जाता है, जबकि सवर्ण समुदाय से जुड़े मामलों में उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग उठती है।"
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चंद्रशेखर आजाद जी का कद कितना बढ़ चुका है कि देश का नंबर वन नेता के नाम से भी जाने जाते हैं सांसद जी हमेशा सड़क से लेकर संसद तक की लड़ाई लड़ते हैं और आज भी यह संघर्ष जारी है। कोई भी जाती धर्म हो अन्याय अत्याचार पर हमेशा तत्पर खड़े रहते हैं न्याय दिलाने का काम करते हैं।
इमरजेंसी पर ज़्यादा डिफेंसिव होने की ज़रूरत नहीं है। उसका दूसरा पक्ष भी है।
इंदिरा जी से किसे दिक्कत थी? बैंकों को, राजे-रजवाड़ों को और जमींदारों को।
इमरजेंसी गलत हो सकती है, इंदिरा गांधी नहीं @ratanlal72
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में पत्रकार श्याम लाल यादव ने खुलासा किया है
UPSC में EWS श्रेणी से चयनित 104 अभ्यर्थियों में से 67 ऐसे हैं जिन्होंने उन कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई की, जिनकी वार्षिक फीस ढाई लाख रुपये से अधिक है। 14 IIT से ग्रेजुएट हैं , 28 के माता पिता का बिजनेस है 10 मल्टीनेशन कंपनीज में जॉब करते हैं अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ये वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आता है?