फ्रेंड्स, BJP सरकार का भ्रष्टाचार देख लीजिए 👇🏼
उत्तराखंड के देहरादून में 16 करोड़ रुपए की लागत से बना पुल 16 दिन भी नहीं टिक सका।
शायद इसे ‘ब्लैकहोल टेक्नोलॉजी’ से बनाया गया होगा।
लेकिन इससे ये तो साफ है कि नरेंद्र मोदी और उनके नेताओं का पूरा फोकस सिर्फ घपलेबाजी पर है।
जनता मरे या जिए- इन लोगों को फर्क नहीं पड़ता।
बिहार के सिवान में निहत्थे आंदोलनकारियों पर AK47 जैसे घातक हथियार का प्रयोग किसके कहने पर किया गया?
जो छात्र इसकी घातक फ़ायरिंग में घायल हुए हैं, उनके लिए पूरा देश चिंतित है।
पूरी दुनिया में फैले भारतीयों और ख़ासतौर से बिहार के मूल निवासियों के बीच इससे बेहद आक्रोश फैल गया है।
छात्रों पर हुई बर्बरता और पुलिस की शक्ति के दुरुपयोग की जो खबरें सामने आ रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। छात्र शक्ति की आवाज़ को दबाने और उन्हें कुचलने का कोई भी प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
छात्र ही देश का भविष्य हैं। ऐसे में उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार करके सरकार आखिर क्या संदेश देना चाहती है?
धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते 21 बच्चों ने अपनी जान दे दी...
जब वे इस्तीफा देने के बाद संसद परिसर में आए तो BJP सांसदों ने उनका ऐसे स्वागत किया, जैसे वो पाकिस्तान से जंग लड़कर आए हों।
: लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता @GauravGogoiAsm जी
बिहार में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा हाल ही में आंदोलित छात्रों पर पुलिस द्वारा AK-47 का इस्तेमाल लोकतंत्र के माथे पर कलंक है।
रोजगार, निष्पक्ष भर्ती और अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे छात्रों के सामने यदि सरकारें संवाद की जगह बंदूक खड़ी कर दें, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
मैं प्रधानमंत्री श्री @narendramodi को कहना चाहता हूं कि छात्रों की आवाज़ को गोलियों और लाठियों से नहीं दबाया जा सकता |
मैं इस घटना की कड़ी निंदा करता हूँ |
@officecmbihar
• क्या जरूरत थी- छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने की, उनपर लाठियां बरसाने की?
• क्या जरूरत थी- नौजवान लड़कियों को जलील करते हुए उनके कपड़े फाड़ने की, उनको बेरहमी से पिटवाने की?
• क्या जरूरत थी- देश के युवाओं पर पैलेट गन, AK-47 चलवाने की, क्या वे आतंकवादी हैं?
आज ये सवाल सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं, बल्कि पूरा देश पूछ रहा है और इसका जवाब देने की जिम्मेदारी सरकार की है।
ये सरकार देश के नौजवानों से क्यों डरती है, उनकी आवाज दबाने का हक सरकार को किसने दिया?
: लोकसभा में कांग्रेस महासचिव एवं सांसद श्रीमती @priyankagandhi जी
मोदी सरकार ने वादा किया था कि हम छात्रों पर कोई एक्शन नहीं लेंगे,
लेकिन दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, यूपी में छात्रों पर FIR हो रही है। छात्रों के घरों में पुलिस दबिश दे रही है, उनके माता-पिता को परेशान किया जा रहा है।
ये दिखाता है कि BJP सरकार की कथनी-करनी में कितना फर्क है।
छात्र समझ रहे हैं कि गन फायर का आदेश अमित शाह द्वारा दिया गया, इसलिए उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।
पेपरलीक के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को टारगेट किया जा रहा है। सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेटर लिखे गए हैं, ताकि उनकी आलोचना वाले पत्रकारों, यू-ट्यूबर्स के वीडियो डिलीट कराए जा सकें।
धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और भारत की बर्बाद education system के प्रतीक हैं और हमेशा रहेंगे।
उसी system ने 26 बच्चों की जान ली, और लाखों युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया।
इस्तीफ़ा भी नैतिकता से नहीं - युवाओं के आक्रोश से डरकर देना पड़ा।
और आज उसी व्यक्ति को संसद में BJP माला पहना रही है। यह कोई सम्मान नहीं - लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न है।
देश का हर छात्र ये देख रहा है। और इसमें शामिल हर चेहरा याद रखेगा।