@RailwaySeva@RailMinIndia@RailwayNorthern@AshwiniVaishnaw
No one charging point in DBRT Rajadhani Exp, Train No. 12424, A1-47.
The fare is equal to flieght but the facilities are not even equal to general train, if you cannot provide facilities then return the money.
" जो अंधभक्त बोलते हैं रूखी सूखी खाएंगे मोदी को जिताएंगे यह वीडियो उन कट्टरवादी संधियों के लिए "
" यह है देश की असली स्थिति "
" यह उनकी रणनीति का नतीजा फूट डालो राज करो रणनीति "
जय हिंद जय भारत
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
@ArvindKejriwal सर मेरी मां अब दुनिया में नहीं रही वह हमेशा कहती थी बेटा अरविंद केजरीवाल जैसा देश में ईमानदार कोई नेता नहीं है @AamAadmiParty के साथ हमेशा रहना एक दिन जरुर कामयाबी मिलेगी
अब मेरी मां इस दुनिया में नहीं है अत्यंत पीड़ा है मां का @SanjayAzadSln@msisodia
बेटियों को समर्पित मेरी एक पोस्ट.........
बेटी जब शादी के मंडप से ससुराल जाती है तब पराई नहीं लगती मगर जब वह मायके आकर हाथ मुंह धोने के बाद सामने टंगे टाविल के बजाय अपने बैग से छोटे से रुमाल से मुंह पौंछती है, तब वह पराई लगती है।
जब वह रसोई के दरवाजे पर अपरिचित सी खड़ी हो जाती है, तब वह पराई लगती है।
जब वह पानी के गिलास के लिए इधर उधर आँखें घुमाती है, तब वह पराई लगती है।
जब वह पूछती है वाशिंग मशीन चलाऊँ क्या तब वह पराई लगती है।
जब टेबल पर खाना लगने के बाद भी बर्तन खोल कर नहीं देखती तब वह पराई लगती है।
जब पैसे गिनते समय अपनी नजरें चुराती है तब वह पराई लगती है।
जब बात बात पर अनावश्यक ठहाके लगाकर खुश होने का नाटक करती है तब वह पराई लगती है.....और लौटते समय "अब कब आएगी" के जवाब में "देखो कब आना होता है" यह जवाब देती है, तब हमेशा के लिए पराई हो गई ऐसे लगती है।
लेकिन गाड़ी में बैठने के बाद जब वह चुपके से अपनी आखें छुपा के सुखाने की कोशिश करती है तो वह "परायापन" एक झटके में बह जाता तब वो पराई सी लगती 😢 नहीं चाहिए हिस्सा भईया मेरा मायका सजाए रखना,
कुछ ना देना मुझको
बस प्यार बनाए रखना,
पापा के इस घर में
मेरी याद बसाए रखना।
बच्चों के मन में मेरामान बनाए रखना ,
बेटी हूँ सदा इस घर की
ये सम्मान सजाये रखना।
बेटी से माँ का सफ़र (बहुत खूबसूरत पंक्तिया,
सभी महिलाओ को समर्पित)
बेटी से माँ का सफ़र बेफिक्री से फिकर का सफ़र रोने से चुप कराने का सफ़र उत्सुकत्ता से संयम का सफ़र।
पहले जो आँचल में छुप जाया करती थी,
आज किसी को आँचल में छुपा लेती है।
पहले जो ऊँगली पे गरम लगने से घर को सर पे उठाया करती थी, आज हाथ जल जाने पर भी खाना बनाया करती है।
पहले जो छोटी छोटी बातों पे रो जाया करती थी, आज बो बड़ी बड़ी बातों को मन में छुपाया करती है।
पहले भाई, दोस्तों से लड़ लिया करती थी।
आज उनसे बात करने को भी तरस जाती है।
माँ-माँ कह कर पूरे घर में उछला करती थी।
आज माँ सुन के धीरे से मुस्कुराया करती है।
10 बजे उठने पर भी जल्दी उठ जाना होता था, आज 7 बजे उठने पर भी लेट हो जाया करती है।
खुद के शौक पूरे करते करते ही साल गुजर जाता था।
आज खुद के लिए एक कपडा लेने को तरस जाया करती है।
पूरे दिन फ्री होके भी बिजी बताया करती थी।
अब पूरे दिन काम करके भी काम चोर कहलाया करती है।
एक एग्जाम के लिए पूरे साल पढ़ा करती थी।
अब पढ़ाई रुक जाती है।
"यह हमारी आपकी बेटी है।"
बेटियों को समर्पित मेरी एक पोस्ट.........
बेटी जब शादी के मंडप से ससुराल जाती है तब पराई नहीं लगती मगर जब वह मायके आकर हाथ मुंह धोने के बाद सामने टंगे टाविल के बजाय अपने बैग से छोटे से रुमाल से मुंह पौंछती है, तब वह पराई लगती है।
जब वह रसोई के दरवाजे पर अपरिचित सी खड़ी हो जाती है, तब वह पराई लगती है।
जब वह पानी के गिलास के लिए इधर उधर आँखें घुमाती है, तब वह पराई लगती है।
जब वह पूछती है वाशिंग मशीन चलाऊँ क्या तब वह पराई लगती है।
जब टेबल पर खाना लगने के बाद भी बर्तन खोल कर नहीं देखती तब वह पराई लगती है।
जब पैसे गिनते समय अपनी नजरें चुराती है तब वह पराई लगती है।
जब बात बात पर अनावश्यक ठहाके लगाकर खुश होने का नाटक करती है तब वह पराई लगती है.....और लौटते समय "अब कब आएगी" के जवाब में "देखो कब आना होता है" यह जवाब देती है, तब हमेशा के लिए पराई हो गई ऐसे लगती है।
लेकिन गाड़ी में बैठने के बाद जब वह चुपके से अपनी आखें छुपा के सुखाने की कोशिश करती है तो वह "परायापन" एक झटके में बह जाता तब वो पराई सी लगती 😢 नहीं चाहिए हिस्सा भईया मेरा मायका सजाए रखना,
कुछ ना देना मुझको
बस प्यार बनाए रखना,
पापा के इस घर में
मेरी याद बसाए रखना।
बच्चों के मन में मेरामान बनाए रखना ,
बेटी हूँ सदा इस घर की
ये सम्मान सजाये रखना।
बेटी से माँ का सफ़र (बहुत खूबसूरत पंक्तिया,
सभी महिलाओ को समर्पित)
बेटी से माँ का सफ़र बेफिक्री से फिकर का सफ़र रोने से चुप कराने का सफ़र उत्सुकत्ता से संयम का सफ़र।
पहले जो आँचल में छुप जाया करती थी,
आज किसी को आँचल में छुपा लेती है।
पहले जो ऊँगली पे गरम लगने से घर को सर पे उठाया करती थी, आज हाथ जल जाने पर भी खाना बनाया करती है।
पहले जो छोटी छोटी बातों पे रो जाया करती थी, आज बो बड़ी बड़ी बातों को मन में छुपाया करती है।
पहले भाई, दोस्तों से लड़ लिया करती थी।
आज उनसे बात करने को भी तरस जाती है।
माँ-माँ कह कर पूरे घर में उछला करती थी।
आज माँ सुन के धीरे से मुस्कुराया करती है।
10 बजे उठने पर भी जल्दी उठ जाना होता था, आज 7 बजे उठने पर भी लेट हो जाया करती है।
खुद के शौक पूरे करते करते ही साल गुजर जाता था।
आज खुद के लिए एक कपडा लेने को तरस जाया करती है।
पूरे दिन फ्री होके भी बिजी बताया करती थी।
अब पूरे दिन काम करके भी काम चोर कहलाया करती है।
एक एग्जाम के लिए पूरे साल पढ़ा करती थी।
अब पढ़ाई रुक जाती है।
"यह हमारी आपकी बेटी है।"
@Uppolice@CMOfficeUP @ChiefSecy_UP @homeupgov@UPGovt Lucknow gomtinager sho Rajesh tripathi ji ka F.I.R lekhne se Mana karna sath hi mahilawo,shikayt kartawo, janpratidhiyo se abhadrata se baat Kara ,sarkar ki chhavi ko grahan lagane ka Kam kar rahe hai please visit the video .