शक्ति, भक्ति और आराधना के पावन पर्व शारदीय नवरात्रि की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
माँ दुर्गा की कृपा से हम सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं आरोग्य का संचार हो।
जय माता दी!🙏
साथियो,
आज सोशल मीडिया पर जिस तरह से कॉमरेड C.H. Venkatachalam (CHV) जी एवं UFBU को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियाँ और सवाल किए जा रहे हैं, उस पर एक बात गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
हड़ताल केवल एक दिन की छुट्टी नहीं होती। यह अपने अधिकारों, लंबित मांगों और संगठन द्वारा लिए गए सामूहिक निर्णय के लिए संघर्ष का माध्यम होती है।
आज उन साथियों द्वारा सोशल मीडिया पर हड़ताल और नेतृत्व पर सवाल उठाना थोड़ा विचारणीय है, जिन्होंने कल के संघर्ष को शायद केवल एक Holiday की तरह देखा। संघर्ष के समय संगठन के साथ खड़े होने और संघर्ष के परिणामों पर सवाल उठाने—इन दोनों के बीच का अंतर हमें समझना होगा।
CHV जी या UFBU पर टिप्पणी करने से पहले यह भी आत्ममंथन करें कि संघर्ष के दौरान हम स्वयं संगठन के साथ कितनी मजबूती से खड़े थे।
मतभेद हो सकते हैं, सवाल भी हो सकते हैं—लेकिन संगठनात्मक निर्णयों और संघर्ष को कमजोर करने के बजाय तथ्यों, अनुशासन और एकता के साथ अपनी बात रखना ही ट्रेड यूनियन संस्कृति की पहचान है।
संघर्ष के समय एकता,
सफलता के समय जिम्मेदारी,
और हर परिस्थिति में संगठन के प्रति निष्ठा
यही हमारी ट्रेड यूनियन परंपरा है।
UFBU ज़िंदाबाद ✊
AIBEA ज़िंदाबाद ✊
बैंक कर्मचारी एकता ज़िंदाबाद ✊
@ChVenkatachalam@AIBEAofficial
@dalit_indian65@GenZBankerClub कृपया टिप्पणी की भाषा की मर्यादा में रह कर रखिए एक बैंकर को सोशल मीडिया पर इस तरह की टिप्पणी शोभा नहीं देती।क्या अपने घर में भी ऐसी ही भाषा का प्रयोग करते हैं?
@kguddusss@GenZBankerClub संगठन की ताकत सिर्फ सवाल उठाने में नहीं, बल्कि मुश्किल समय में साथ खड़े रहने में होती है।
जो साथी संगठन के फैसले से असहमत हैं, वे सवाल जरूर करें—लेकिन संघर्ष और एकता को कमजोर करने के बजाय समाधान की बात करें।
कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अपनी बात इस वीडियो में कह दी है। अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए।
साथियो,
आज सोशल मीडिया पर जिस तरह से कॉमरेड C.H. Venkatachalam (CHV) जी एवं UFBU को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियाँ और सवाल किए जा रहे हैं, उस पर एक बात गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।
हड़ताल केवल एक दिन की छुट्टी नहीं होती। यह अपने अधिकारों, लंबित मांगों और संगठन द्वारा लिए गए सामूहिक निर्णय के लिए संघर्ष का माध्यम होती है।
आज उन साथियों द्वारा सोशल मीडिया पर हड़ताल और नेतृत्व पर सवाल उठाना थोड़ा विचारणीय है, जिन्होंने कल के संघर्ष को शायद केवल एक Holiday की तरह देखा। संघर्ष के समय संगठन के साथ खड़े होने और संघर्ष के परिणामों पर सवाल उठाने—इन दोनों के बीच का अंतर हमें समझना होगा।
CHV जी या UFBU पर टिप्पणी करने से पहले यह भी आत्ममंथन करें कि संघर्ष के दौरान हम स्वयं संगठन के साथ कितनी मजबूती से खड़े थे।
मतभेद हो सकते हैं, सवाल भी हो सकते हैं—लेकिन संगठनात्मक निर्णयों और संघर्ष को कमजोर करने के बजाय तथ्यों, अनुशासन और एकता के साथ अपनी बात रखना ही ट्रेड यूनियन संस्कृति की पहचान है।
संघर्ष के समय एकता,
सफलता के समय जिम्मेदारी,
और हर परिस्थिति में संगठन के प्रति निष्ठा—
यही हमारी ट्रेड यूनियन परंपरा है।
UFBU ज़िंदाबाद ✊
AIBEA ज़िंदाबाद ✊
बैंक कर्मचारी एकता ज़िंदाबाद ✊
रविवार की ड्यूटी का मुद्दा और संगठन के फैसले—दोनों को एक ही तराजू में तौलना ठीक नहीं है।
रविवार को साथी संगठन के निर्देश/परिस्थिति के अनुसार ड्यूटी पर गए थे, यह मानकर कि मुद्दे का समाधान निकलेगा।
बाद में वार्ता के जरिए कोई निर्णय हुआ है तो उसे “लॉलीपॉप” कहना आसान है, लेकिन उसके पीछे की पूरी प्रक्रिया और परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।
मतभेद हो सकते हैं, सवाल भी पूछे जाने चाहिए—लेकिन साथियों को गाली देकर या पूरे संगठन और उसके पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर बात कमजोर ही होती है।
अगर असहमति है तो तथ्य और सवाल सामने रखिए, व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं।
संगठन के फैसले पर बहस हो सकती है, लेकिन बैंक कर्मचारियों की एकता और संघर्ष की गरिमा बनाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।