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अगर ऐसा होता तो तस्वीर कुछ और होती। हम गलत दिशा में सुधार के कदम बढ़ा रहे है। स्त्रियों को मजबूत बनाने से ज्यादा हमे पुरुषों को मृदुल और संवेदनशील बनाने की जरूरत रही है।
~@Saumy_Shree
मानवीय तौर पर देखा जाएं तो पितृसत्ता ने महिलाओं से ज्यादा पुरुषों का ही नुकसान किया है। मुझे हमेशा से लगता आया है कि हमे स्त्री विमर्श से ज्यादा, पुरुष विमर्श की जरूरत थी।
इलाहाबाद विवि में 400% फीस वृद्धि के खिलाफ चल रहे 19 दिनों से उपवास के समर्थन में छात्रों ने टॉर्च जला पदयात्रा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
यह हाल शाम के 7:00 बजे का विश्वविद्यालय के मुख्य मार्ग का है, आम छात्रों में फीस वृद्धि को लेकर काफी रोष है।
@priyankagandhi@bstvlive
#फीस बढ़ोतरी के खिलाफ
#इलाहाबाद_विश्वविद्यालय में छात्रों का #आंदोलन । पुलिस ने वाटर कैनन के जरिये पानी छोड़कर #छात्रों को तितर -बितर करने की कोशिश।आंदोलन कर रहे कुछ छात्र घायल हुए ।
पता है हम पदक क्यों नहीं जीतते? क्योंकि हम खिलाड़ियों की इज्जत पदक जीतने से पहले करते ही नहीं।
ये यूपी की कबड्डी खेलने वाली बेटियां हैं। इनके लिए खाने का इंतजाम टॉयलेट में किया गया है।
सभ्य समाज में कहीं इसे बर्दाश्त किया जाएगा क्या?
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में कल एक छात्र ने खुद के ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की। आज एक छात्र बिल्डिंग पर चढ़ गया।
यह बेहद घातक है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ सरकार भी सो रही है। क्या किसी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा?
@dpradhanbjp जी, फीस वापसी का फैसला वापस लीजिए।
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ने कौन आता है?
बुंदेलखंड-पूर्वांचल-अवध, बिहार के गांवों के बच्चे.
कम फीस, खासतौर पर दूरदराज के गांवों से आने वाली लड़कियों के लिए पढ़ाई के दरवाजे खोलती है. अगर सस्ती फीस न हो तो अधिकतर शायद ही कभी किसी यूनिवर्सिटी का मुंह देख पाएं.
क्या हमारे बच्चों की बलि लेकर ही कम होगा इस सरकार के अत्याचार का आतंक?
अपना खजाना भरने के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 400% की फीस वृद्धि का जो तुगलकी फ़रमान पारित किया गया है,उसके विरोध में छात्र आज आत्मदाह करने को विवश हो उठे।
पर अहंकार में चूर इस सत्ता को कोई फ़र्क़ नहीं।
कल प्रयाग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का चार गुनी फीस वृद्धि के खिलाफ़ संघर्ष देख कर आया हूं।देश के हजारों गांव – कस्बों से चल कर आए इन संघर्षशील छात्रों की मांग एकदम जायज़ है,सरकार और वीसी महोदय से अनुरोध है कि फीस वृद्धि वापस लें। छात्रों को न्याय मिले। जय हो।
पहले वे आये कम्युनिस्टों के लिए
और मैं कुछ नहीं बोला
क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था।
फिर वे आये ट्रेड यूनियन वालों के लिए
और मैं कुछ नहीं बोला
क्योंकि मैं ट्रेड यूनियन में नहीं था।
फिर वे आये यहूदियों के लिए
और मैं कुछ नहीं बोला
क्योंकि मैं यहूदी नहीं था।