@ugc_india एक ऐसा कानून जिसका आधार ही भेदभावपूर्ण और जिसमें सिर्फ एक जात विशेष का होना ही दोषी होने का प्रमाण हो वह किस तरह का सामाजिक न्याय स्थापित करेगा क्या हमारे विश्वविद्यालय और संस्थान इस तरह के विद्वेषपूर्ण माहौल में अपनी गुणवत्ता को बचा पाएंगे।
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