सावन के पावन महीने और सावन सोमवार की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
इस शुभ अवसर पर आइए, जबलपुर स्थित कचनार शिव मंदिर के दिव्य दर्शन करें। सफेद संगमरमर से निर्मित 76 फुट ऊँची भगवान शिव की भव्य प्रतिमा इस मंदिर की विशेष पहचान है।
श्रद्धा, शांति और आध्यात्म से भरपूर इस पावन धाम में महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करें और सावन के शुभ अवसर को और भी यादगार बनाइए।
हर-हर महादेव।
इस सावन, मध्य प्रदेश की इस दिव्य धरोहर के दर्शन करें और अपने आध्यात्मिक सफर को यादगार बनाइए।
📍 कचनार शिव मंदिर, जबलपुर, मध्य प्रदेश
VC: (Instagram Id - mera.jabalpur_)
An Indian asked an American “How come you have such a phenomenal Indian talent pool in your country?
He answered “Because you Indians give jobs to so many ‘reserved’ Indians while we give it to the ‘deserved’ Indians.”
Karnataka: Daughter of the KPSC Chairman got selected after declaring family’s annual income as ₹40K while her father, the Chairman himself, earns ₹2.17 L a month!
Justice Nagaprasanna tears apart the defence’s arguments!
One of the finest judges Karnataka has ever had! 🔥
दो नेताओं की बात इस समय अहम
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री राजनाथ सिंह ने कभी कहा था कि यह एनडीए की सरकार है यहां इस्तीफे नहीं होते।
...
नीट कांड में सबसे पहले पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा था। फिर ये जेन जी से होते हुए पूरे देश की मांग बन गई
ये मेरे जिले भदोही की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से विधायक विपुल दुबे हैं। इन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी के टिकट पर बाहुबली विजय मिश्रा का हराया था। ये रेलवे ग्रुप डी पेपर लीक के मामले में आरोपी हैं। लगभग दो साल पहले एमपी-एमएलए कोर्ट ने आरोप भी तय कर दिया था। 2006 में एसटीएफ ने गिरफ्तार भी किया था। निषाद पार्टी यूपी में बीजेपी की सहयोगी पार्टी है।
यूपी में ही योगी सरकार की एक और सहयोगी पार्टी सुभासपा के विधायक बेदीराम भी रेलवे ग्रुप डी पेपर लीक में आरोपी हैं। ये भी जेल में रह चुके हैं। आरोप भी तय है। मैं फिर भी कहूंगा, इनमें इनका दोष नहीं है, जनता खूद अपना कटवाने के लिए तैयार रहती है, और जब कट जाता है तो दर्द होने लगता है।
सोचिए, जब बीजेपी इन्हें नहीं हटा पायी तो क्या खाक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेगी। क्या फास्ट ट्रैक कोर्ट इस मामले का जल्द से जल्द फैसला कर पाएगी?
कैप्शन- भगवा बैकग्रांड वाले विपुल दुबे हैं, दूसरी तस्वीर बेदीराम की है।
प्रदीप जोशी जिनको परीक्षा भर्ती घोटालों, पेपर लीक का एक लंबा अनुभव हैं, वर्ष 2023 में भाजपा द्वारा NTA National Testing Agency का चेयरमैन बनाया जाता हैं, वर्ष 2024 में नीट पेपर लीक हो जाता हैं। केंद्र सरकार जांच समिति बनाती हैं और जांच समिति का अध्यक्ष प्रदीप जोशी को बनाया जाता हैं और वर्ष 2026 में एक बार फिर नीट पेपर लीक हो जाता हैं। मानसिक तनाव में 25 बच्चे आत्महत्या कर लेते हैं।
आज भी प्रदीप जोशी NTA के अध्यक्ष हैं, इन्हें अभी तक हटाया नहीं गया हैं। आखिर क्यों ??
– छात्रों की गूँज, जबलपुर
@RahulGandhi@priyankagandhi@OfficeOfDVS@Jairam_Ramesh@kcvenugopalmp@Barmer_Harish@jitupatwari@UmangSinghar@INCIndia@INCMP@kharge@YashGhanghoriya@saurabhnati@IYC@IYCMadhya
#Congress #Jabalpur #MP #NEET #CBSE #Chhatron_Ki_Goonj
तानाशाही की पराकाष्ठा! युवाओं के हक की लड़ाई अब लाठी और गिरफ्तारी से नहीं दबेगी।
कल दिल्ली की सड़कों पर परीक्षा घोटालों और पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को बेरहमी से पीटा गया। आज जब हमारे नेता कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी, श्री राहुल गांधी जी, श्रीमती प्रियंका गांधी जी और अन्य वरिष्ठ नेता इस दमनकारी नीति के खिलाफ प्रधानमंत्री आवास के सामने धरने पर बैठे, तो सरकार ने संवाद करने के बजाय उन्हें भी जबरन हटाकर हिरासत में ले लिया।
यह सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक माफियाओं पर कार्रवाई करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने के बजाय, विपक्ष और देश के युवाओं की आवाज को कुचलने में लगी है।
राहुल गांधी जी और प्रियंका गांधी जी की यह गिरफ्तारी देश के करोड़ों युवाओं की आवाज को दबाने की एक नाकाम कोशिश है। हम इस तानाशाही के सामने झुकने वाले नहीं हैं। संसद से लेकर सड़क तक, युवाओं के न्याय की यह लड़ाई और तेज होगी।
युवाओं को न्याय देना होगा! केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाना होगा!
मध्यप्रदेश में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सामने आए स्टिंग ऑपरेशन ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना योग्यता, आवश्यकता और जनहित के बजाय सौदेबाजी और प्रभाव के आधार पर तय होगी, तो इसका सीधा नुकसान प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और आम जनता को उठाना पड़ेगा।
राज्य सरकार को इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच करानी चाहिए और यदि आरोपों में सच्चाई है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। लोकतंत्र और सुशासन की बुनियाद पारदर्शिता और जवाबदेही है, न कि ट्रांसफर उद्योग।
राम मंदिर ट्रस्ट के 15 सदस्यों में 9 स्थाई और 6 पदेन सदस्य है, सभी स्थाई सदस्य #ब्राम्हण हैं एक भी क्षत्रिय, OBC या दलित नहीं है, आखिर क्यों....?
राममंदिर ट्रस्ट के 9 स्थाई सदस्य :—
1. के परासरण — ब्राह्मण
2. जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीजी महाराज —ब्राह्मण, बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ शंकराचार्य
3. जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज — ब्राह्मण, कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के 33वें पीठाधीश्वर हैं.
4. युगपुरुष परमानंद जी महाराज — ब्राह्मण, अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख |
5. स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज — ब्राह्मण, महाराष्ट्र के अहमद नगर में 1950 में जन्म हुआ |
6. विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा — ब्राह्मण, अयोध्या राजपरिवार के वंशज हैं |
7. महंत दिनेंद्र दास — ब्राह्मण, अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के प्रमुख हैं ...
8. अनिल मिश्र — ब्राह्मण, मूलरूप से अंबेडकरनगर निवासी अनिल अयोध्या के प्रसिद्ध होम्योपैथी डॉक्टर हैं. वो होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार हैं |
9. श्री कामेश्वर चौपाल — दलित, अयोध्या आंदोलन से जुड़े रहे हैं. कारसेवक ....
9 स्थाई सदस्य में 8 ब्राम्हण व 1 दलित (कामेश्वर चौपाल) थे, जिनका 68 वर्ष कि आयु में 07/02/25 को स्वर्गवास हो गया.. अब सिर्फ 8 स्थाई सदस्य बचे हैं और सभी 100% ब्राम्हण है |
#question — क्षत्रिय, OBC और दलित सिर्फ राममंदिर में चढ़ावा चढ़ाने के हकदार हैं, राममंदिर ट्रस्ट में सहभागिता के हकदार नहीं हैं ..?
ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र, स्थाई सदस्यों के अधिकार क्षेत्र कि जानकारी :—
ट्रस्ट के डीड में ही साफ कर दिया गया है कि इसके गठन के बाद सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी यानी यह सरकारी दखल से पूरी तरह मुक्त होगा।
#notes - अर्थात, राममंदिर ट्रस्ट में सरकार कि कोई भी दखल नहीं है, सर्वेसर्वा स्थायी सदस्य ही सब कुछ है |
साथ ही, ट्रस्ट को राम मंदिर निर्माण और उसके रखरखाव के लिए धन जुटाने और उसके प्रबंधन की पूरी छूट होगी। इसमें भी सरकार का कोई दखल नहीं होगा...
• पदेन सदस्य (Ex-officio member) कि जानकारी:—
पदेन दो सदस्यों का चयन ट्रस्ट करेगा, ट्रस्ट के दो सदस्यों के चयन का अधिकार ट्रस्ट के स्थाई सदस्यों को दिया गया है । जो मतदान के बाद बहुमत के आधार पर इनका चयन करेंगे।
लेकिन ध्यान योग्य बात यह है कि 🤔 इन दोनों सदस्यों के चुनाव में सरकार की ओर से मनोनीत आइएएस अधिकारी व अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में पदेन सदस्य भाग नहीं ले सकेंगे। सिर्फ स्थाई सदस्य ही लेंगे ...
(स्थाई सदस्य कौन है आपको पता ही है, वह किनका चयन करेंगे यह भी आप समझ ही सकते हैं )😭
इसका 15वां सदस्य भी पदेन होगा, जो ट्रस्ट द्वारा राम मंदिर कांप्लेक्स के विकास और प्रशासनिक देखरेख के लिए बनने वाली कमेटी का अध्यक्ष होगा। इसका चयन भी ट्रस्ट के सदस्य ही करेंगे।
खैर, अब आप लोग समझ ही गये होंगे कि राममंदिर ट्रस्ट कि कार्यप्रणाली किसके हाथों में है, और किसे श्रेय या किसे दोष देना है | इसमें सरकार कि कोई भूमिका नहीं है ।
सरकार से मांग है कि राममंदिर ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट का निर्माण करें, उस ट्रस्ट में क्षत्रिय, ब्राम्हण, अहीर, कुर्मी, जाट, दलित, कुम्हार, लोधी व अन्य वर्ग को भी शामिल करें..
इससे सभी वर्गों में राम मंदिर ट्रस्ट के प्रति विश्वास भी बना रहेगा और ट्रस्ट के कार्यों में ईमानदारी और सहभागिता भी रहेगा,
और चढ़ावा चोरी जैसा कृत्य भी नहीं होगा 😐
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने हाल ही में राम मंदिर के लिए एक पूर्णकालिक और अनुभवी CEO की नियुक्ति की मांग की है। यह मांग मंदिर में दान निधि से जुड़े विवाद और अनियमितताओं के आरोपों के चलते की गयी है।
पहली बात तो ये कि जब मिश्रा से दानपात्र चोटरी के बारे में पूछा गया था तब मिश्रा ने कहा था कि मैं तो निर्माण समिति का अध्यक्ष हूँ, इस विषय पर कुछ नहीं बोल सकता। तो फिर अब ये मिश्रा कौन है सीईओ की नियुक्ति का सलाह देने वाले ।
दूसरी बात, ये मंदिर है या कंपनी जो यहाँ सीईओ नियुक्त किया जायेगा। इस मंदिर में पारदर्शिता और चोरी रोकने का एक ही तरीका है। ट्रस्ट भंग करके इस मंदिर को सरकार को सौंप दिया जाये।
येड़ा बनकर पेड़ा खाने की मिश्रा की पुरानी आदत है। रामभक्तो पर गोली मिश्रा ने ही चलवाई थी लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी मुलायम सिंह यादव पर डाल देते हैं।
टिन्नू यादव तो झूठ ही बदनाम है, असली चो’र तो ब्राम्हण शिरोमणि “अनिल मिश्रा” है.....
चढ़ावा कांड में टिन्नू यादव का बड़ा दावा “Cash की जिम्मेदारी ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा की, मेरी नहीं”
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू ने ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर पूरे मामले की जिम्मेदारी डालते हुए कहा है कि “Cash की जिम्मेदारी ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा की थी, मेरी नहीं। SIT को अनिल मिश्रा की जांच करनी चाहिए।”
अनिल मिश्रा खुलासे के बाद से ही अयोध्या से लापता हैं। किसी से इनका संपर्क नहीं है। करीबी बता रहे हैं आंख खराब हो गई है केरल गए हैं दिखाने।
टिन्नू के दावे के बाद मास्टरमाइंड के तौर पर इल्जाम मिश्रा पर घूम गया है।
पिछले कई दशकों से हमें श्री भारत सिंह जी का निरंतर साथ और अमूल्य सहयोग मिलता रहा। वे एक अत्यंत कुशल प्रबंधक थे। एक निष्ठावान राजनीतिक सहयोगी के रूप में उन्होंने सदैव पूर्ण समर्पण, लगन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन किया। चुरहट क्षेत्र के विकास और जन-कल्याण की चिंता उनके मन में हमेशा बनी रहती थी।
क्षेत्र के गरीबों, वंचितों और ज़रूरतमंदों की सहायता के लिए वे सदैव तत्पर और संवेदनशील रहते थे। यदि जनहित के किसी कार्य में मुझसे कोई चूक या कमी रह जाती थी, तो वे बिना भूले सहजता से मुझे याद दिला देते थे। उनका हमारे बीच से इस प्रकार असमय चले जाना एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं है।
कल उनकी तेरहवीं के अवसर पर उनसे जुड़ीं वे तमाम स्मृतियां एक-एक कर मेरी आंखों के सामने जीवंत हो उठीं। परमात्मा पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उन्हें शांति प्रदान करें। ईश्वर उनके परिजनों को यह गहन दुःख सहन करने की सामर्थ्य दे।
भावभीनी श्रद्धांजलि। ओम शांति।
अमरीका ने चार दिन में हिंदुस्तान के तीन जहाज़ों पर हमला किया, बिना चेतावनी दिए, और हमारे कई नागरिकों को मार दिया। फिर भी मोदी सरकार चुप्पी साधे हुए हैं!
Look at the condition of the Shatabdi Express, one of the country's premier trains. This government does not maintain it properly. By intimidating the media, they can portray everything in the country as being fine. Come down to the ground reality and see for yourself.