ये सनातन धर्म में विशेषता है। पारसी धर्म में या अन्य धर्मों में श्राद्ध आदि नहीं होता तो कुछ भूत प्रेत पकड़ने वाले बोलते हैं कि हमको कब्रिस्तान में जितने भूत मिलते हैं उतना हिंदुओं के शमशान में भूत नहीं मिलते।
अरे ! वो तो चले गए सद्गति हो गई। वो तो बिचारे कब्र में सोए रहते हैं तो पकड़े जाते हैं। उन (हिंदुओं) की तो आगे की गति हो गई, बारहवां कर लिया, श्राद्ध कर लिया तो हिंदू भूत - प्रेत विशेष ज्यादा नहीं मिलते वो भूत - प्रेत पकड़ने वाले बोलते हैं।
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#श्राद्ध_महिमा
@Asharamjibapu__ हमारे सनातन संस्कृति में श्राद्ध का बहुत गहरा आध्यात्मिक और पारिवारिक महत्त्व माना गया अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, और स्मरण प्रकट करने का अवसर है।#shanshreeaasaramjibapuquote
@Asharamjibapu__ मनुष्य जीवन हमें हमारे पूर्व जन्म में किये हुए ग़लती को समझ सकता हैं ♥️ उसी का नाम ईश्वर हैं जिसे समझने के लिए ब्रम्ह ज्ञानी संत के द्वारा मिलता हैं
@Asharamjibapu__ सही कहा
बंधन देने वाले विचारों से ऊपर उठकर ऐसे संकल्प करें जो मन को शांति और आत्मिक स्वतंत्रता की ओर ले जाएँ। निरंतर साधना से संकल्प-विकल्प शांत होकर निःसंकल्प अवस्था की अनुभूति होती है।
Sant Shri Asharamji Bapu
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@Asharamjibapu__ दिव्य सत्संग वचनामृत 🙏,
बंधनकारी संकल्प मन को अशांत करते हैं, जबकि शुभ और मुक्तिदायक संकल्प भीतर शांति जगाते हैं। यही साधना जीवन को सही दिशा देती हैं।
Sant Shri Asharamji Bapu
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बंधनकारी संकल्प न करें अपितु मुक्त करनेवाले संकल्प करें । यह करते-करते संकल्प-विकल्पों को शांत करने की कला को जानकर निःसंकल्प अवस्था को प्राप्त करके जीवन्मुक्त हो जायें ।
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जो भी बुरी आदत है अपन जानते हैं। माता-पिता को चाहे पता ना चले, पड़ोसी को पता ना चले, अपने को तो पता होता है अपनी गंदी आदत। अपने क्यों पतन होता है, क्यों विफल होते हैं, अपने को तो पता होता है। पद्मासन पर बैठ गए। [सांस अंदर खींचने की आवाज] जो-जो अपनी गंदी आदत है मन में लाए कि आज से ये गंदी आदत गई। भगवान की शक्ति मेरे साथ है। पद्मासन पर बैठकर मैं संकल्प करता हूं। [सांस अंदर खींचने की आवाज] आज के बाद ये भूल नहीं करूंगा। समझो फिर भी करता है तो, दो दिन का संकल्प करो। दो दिन तक कि ये मैं गलती नहीं करूंगा। दो दिन हो जाए, उसके पहले फिर दो दिन बढ़ा दे, फिर दो दिन बढ़ा दे। तो बच्चे गलती का तो घर है मनुष्य शरीर, लेकिन साथ-साथ में महानता कि कुंजियां भी मनुष्य शरीर में है। तो बड़े से बड़े अपराधी व्यक्ति भी महान बन सकते हैं तो कोमल विद्यार्थी महान बन जाए तो क्या बड़ी बात है।
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@Asharamjibapu__ बहुत बढ़िया बूरी आदतें पहले कच्ची धागे जैसी लगती हैं। फिर समय के साथ मोटी जंजीर बन जाती हैं जिन्हें तोड़ना कठिन हो जाता हैं ऐसे में संत का संघ हमे अपने भीतर कि बुरी आदत से बचने में मदद करती हैं #AsharamjiBapu
जो भी बुरी आदत है अपन जानते हैं। माता-पिता को चाहे पता ना चले, पड़ोसी को पता ना चले, अपने को तो पता होता है अपनी गंदी आदत। अपने क्यों पतन होता है, क्यों विफल होते हैं, अपने को तो पता होता है। पद्मासन पर बैठ गए। [सांस अंदर खींचने की आवाज] जो-जो अपनी गंदी आदत है मन में लाए कि आज से ये गंदी आदत गई। भगवान की शक्ति मेरे साथ है। पद्मासन पर बैठकर मैं संकल्प करता हूं। [सांस अंदर खींचने की आवाज] आज के बाद ये भूल नहीं करूंगा। समझो फिर भी करता है तो, दो दिन का संकल्प करो। दो दिन तक कि ये मैं गलती नहीं करूंगा। दो दिन हो जाए, उसके पहले फिर दो दिन बढ़ा दे, फिर दो दिन बढ़ा दे। तो बच्चे गलती का तो घर है मनुष्य शरीर, लेकिन साथ-साथ में महानता कि कुंजियां भी मनुष्य शरीर में है। तो बड़े से बड़े अपराधी व्यक्ति भी महान बन सकते हैं तो कोमल विद्यार्थी महान बन जाए तो क्या बड़ी बात है।
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सुख भोग की इच्छा है, तो वो पराधीन बना देती है। साधन निर्माण में पराधीनता नहीं है। जप में, ध्यान में, संकल्प छोड़ने में भी पराधीनता नहीं है।
संकल्प पूर्ति में पराधीनता है, असाधन में पराधीनता है। साधन में स्वतंत्रता है और साधन साध्य से मिलाता है। ईश्वर साध्य है ।
साधन साध्य से मिलाता है और असाधन, असाध्य की तरफ घसीट के ले जाता है ।
#AsharamjiBapuQuotes
सुख भोग की इच्छा है, तो वो पराधीन बना देती है। साधन निर्माण में पराधीनता नहीं है। जप में, ध्यान में, संकल्प छोड़ने में भी पराधीनता नहीं है।
संकल्प पूर्ति में पराधीनता है, असाधन में पराधीनता है। साधन में स्वतंत्रता है और साधन साध्य से मिलाता है। ईश्वर साध्य है ।
साधन साध्य से मिलाता है और असाधन, असाध्य की तरफ घसीट के ले जाता है ।
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@Asharamjibapu__ जब मन परम सत्य से जुड़ जाता हैं, भय, चिंता, ओर आसक्ति धीरे धीरे समाप्त होने लगती है । यही आंतरिक शांति और सच्ची स्वतंत्रता का मार्ग है
Sant Shri Asharamji Bapu
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ज्ञान का भंडार "ऋषि प्रसाद" पढ़ने और पढ़ाने का सुंदर अवसर है ऋषि प्रसाद ज्ञान प्रतियोगिता । ये ऐसा निःशुल्क Online Quiz है जिसमें कोई भी भाग ले सकता है। कोई मोटी किताब नहीं, कोई टेंशन नहीं और न ही फेल होने का डर! देर न करें - आज ही डाउनलोड करें #RPGP मोबाइल ऐप और Register Now !
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यह शास्त्रों व Sant Shri Asharamji Bapu के सत्संग से संकलित आध्यात्मिक पत्रिका 'ऋषि प्रसाद' के अप्रैल, मई व जून अंकों पर आधारित है:
☀️12 जुलाई 2026
☀️रात्रि 8 से 11 के बीच
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"सा विद्या या विमुक्तये..."
विद्या वही है जो विमुक्त कर दे, बंधनों से मुक्त कर दे, दुःखों से मुक्त कर दे, चिंताओं, वासनाओं और पाप-ताप से मुक्त कर दे!
भगवान नारायण जिस सुख में आप्तकाम-पूर्णकाम हैं, संकल्प मात्र से सबका मंगल कर देते हैं, ऐसी ईश्वरीय विद्या को ब्रह्मविद्या कहते हैं।
उस ब्रह्मविद्या के आगे दुनिया की सारी विद्याएँ बहुत-बहुत साधारण हो जाती हैं।
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