हौसले के आगे झुका प्रशासन!
आखिरकार लंबा इंतजार और प्रशासन का कड़ा पहरा भी जनभावनाओं के सैलाब को नहीं रोक सका। भीम आर्मी चीफ और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने तमाम प्रशासनिक बाधाओं को पार करते हुए पीड़ित केतन लाल की माँ से मुलाकात की।
यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ जनता के अटूट संघर्ष की जीत है।
जब-जब न्याय की आवाज को दबाने की कोशिश की गई, तब-तब नीले परचम ने सड़क से लेकर संसद तक इंकलाब बुलंद किया है। लाठियां, बैरिकेड्स और पुलिसिया पहरा भी उस मां के आंसू पोंछने और उन्हें इंसाफ का भरोसा दिलाने के संकल्प को डिगा नहीं पाए।
यह संघर्ष गवाह है कि हक और हुकूक की लड़ाई कभी कमजोर नहीं पड़ती। केतन लाल को न्याय दिलाने का यह सफर अब और मजबूत होगा।
जब तक न्याय नहीं मिलेगा,यह आंदोलन थमेगा नहीं!
जैसे हर लड़का एक जैसा नहीं होता,
वैसे ही हर लड़की भी एक जैसी नहीं होती।
किसी एक इंसान की सोच या व्यवहार से पूरी दुनिया को मत आँकिए।
पहचान हमेशा व्यक्ति की होती है, पूरे लिंग की नहीं।🙏
पश्चिमी राजस्थान में आज भी जातिवाद हावी है।
सीकर निवासी डॉ अनिल कुमार मीणा को जालौर जिले के एक अस्पताल में कुछ जातंकवादी लोग बंधक बनाकर मारते पिटते है।
उनका जातिगत उत्पीड़न करते है।
घटना को लेकर आज 10 दिन बीत चुके है। जालौर पुलिस ने अभी तक कुछ भी कार्यवाही नहीं की है।
@PoliceRajasthan को मामले में तत्काल संज्ञान लेकर आरोपियों को गिरफ्तार करना चाहिए।
@BhajanlalBjp@RajCMO@DrKirodilalBJP@TikaRamJullyINC@VinodJakharIN@manojmeena@HansrajMeena
बहुजन समाज का मसीहा और देश के करोड़ों पीड़ितों की उम्मीद हैं चन्द्रशेखर आजाद ❤️
कल टिहरी जाते वक्त हरिद्वार में उन्हें रोका गया तो वो पैदल ही हाइवे पर निकल पड़े
यह सूचना मिलते ही कि @BhimArmyChief इसी रास्ते से होकर निकलने वाले हैं, एक बुजुर्ग महिला गर्मी में ही सड़क किनारे बैठकर चन्द्रशेखर आजाद का इंतजार करती है
उस महिला को चन्द्रशेखर आजाद से उम्मीद थी कि वो आकर मेरी परेशानी सुनेंगे और मदद करते करेंगे, हुआ भी कुछ ऐसा ही..... चन्द्रशेखर आजाद ने जैसे ही महिला को देखा, वो तुरंत उनके पास गये और उनकी परेशानी को सुना
यही तो एक नेता की परिभाषा है कि वो अपने लोगों की आवाज बने, उन्हें सुने, उनकी परेशानियों को हल करें। सालों साल महलों में सोने वाले लोग तो एक नेतृत्वकर्ता होने की परिभाषा पर ही खरे नहीं उतरते..!!
@sanjubharati196@SurajKrBauddh .
तू क्यों उड़ता तीर ले रहीं हैं..?
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मैं लड़कियों को कुछ उल्टा-सीधा बोलता नहीं हूं... लेकिन तुम जैसी की वजह से बोलना पड़ेगा फिर।
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निकल
Reporter:- ये जो इतना कुछ हो रहा है, इसका खर्चा कहां से आ रहा है?
Abhijeet Dipke:- हमें यहां 10 दिन हो गये, यह सब देखने के बाद यह सवाल नहीं पूछना चाहिए। मुद्दा ये है कि एमपी खरीदने के लिए पैसा कहां से आ रहा है?
अभिजीत दीपके लंबे समय से अमेरिका में हैं, उसके बावजूद देश की समस्याओं के प्रति उनकी जागरूकता व बेबाकी से तर्कपूर्ण जवाब देने के अंदाज से मैं बहुत प्रभावित हूं
आपको क्या लगता है, अभिजीत दीपके इस आंदोलन को कहां तक लेकर जा सकते हैं...??
दिनांक 28 जून को पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने हमें आश्वासन दिया था कि 30 जून को हमारी पीड़ित परिवार से मुलाकात कराई जाएगी।
यदि 30 जून को पुलिस प्रशासन अपने वादे से पीछे हटता है और हमें पीड़ित परिवार से मिलने से रोका जाता है, तो उसके बाद उत्तराखंड में न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक, शांतिपूर्ण जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी सरकार ने कल्पना भी नहीं की होगी।
यह आंदोलन एक शांतिपूर्ण न्याय यात्रा के रूप में होगा, जो सहारनपुर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेगी।
#केतन_लाल_को_न्याय_दो
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बसपा के नेता टिहरी में पीड़ित परिवार से मिलने गये, नहीं रोका गया। कांग्रेस के विधायक विजेंद्र जाती गये, उन्हें भी नहीं रोका गया। परंतु जब चन्द्रशेखर आजाद ने वहां जाने का प्रयास किया तो पूरा फोर्स सड़कों पर उतार दिया गया
बड़ा सवाल है आखिर क्यों? सिर्फ चन्द्रशेखर आजाद से भाजपा सरकार को इतनी समस्या क्यों है?
मैं बताता हूं इसका कारण.... दरअसल जो भी अन्य दलों के लोग ऐसे मामलों में पीड़ित परिवार से मिलने जाते हैं तो उसमें उनके राजनीतिक स्वार्थ होते हैं, वो यहां जाकर नपे-तुले अंदाज में अपनी बात बोलकर दिखावा करते हैं और फोटोशूट कराकर आ जाते हैं। इन दलों के पास अथाह संपत्ति तो उसमें से एक-दो लाख दे देंगे परिवार को तो इन दलों का कुछ नहीं जाएगा
जबकि चन्द्रशेखर आजाद राजनेता के साथ-साथ एक सामाजिक संगठन के संस्थापक भी हैं। चन्द्रशेखर आजाद ने हमेशा राजनीतिक स्वार्थ की परवाह किये बगैर इन समस्याओं की जड़ पर हमला किया है। वो परिवार को खड़े होने का हौसला देने के साथ-साथ जातिवादी ताकतों को खुली चुनौती देते हैं कि अब दलित समाज शोषण नहीं सहेगा
चन्द्रशेखर आजाद की यही बात न तो उस जातिवादी समाज को पसंद है और न सरकार को....इसी कारण चन्द्रशेखर आजाद को उन जातंकवादियों द्वारा धमकियां मिलती हैं जबकि अन्य किसी दल के नेताओं से उन्हें दिक्कत नहीं क्योंकि वो जानते हैं वो तो बस दिखावा करने आ रहे हैं
देश के बहुजन समाज के लिए यह बात समझना बहुत जरूरी है ताकि कोई उन्हें गुमराह न कर सके।।
राजस्थान में अगर सरकारी अस्पताल में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आखिर सुरक्षित कौन है?
@JalorePolice ने 9 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है।
सीकर निवासी डॉ. अनिल कुमार मीणा जालौर जिले में जनता की सेवा कर रहे थे। गंभीर मरीज को तत्काल रेफर किया गया, एम्बुलेंस की व्यवस्था भी करवाई गई, लेकिन तथाकथित उच्च जाति के जातिवादी लोगो ने स्वयं मरीज को समय पर उच्च केंद्र ले जाने से इनकार कर दिया।
बाद में मरीज की मृत्यु के पश्चात कथित रूप से डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के साथ अस्पताल परिसर में बेरहमी से मारपीट की गई।
आरोप है कि डॉक्टर को सरकारी आवास से घसीटकर अस्पताल लाया गया, सिर पर हमला किया गया, मोबाइल इस्तेमाल नहीं करने दिया गया, जान से मारने की धमकियाँ दी गईं, जबरन झूठा पत्र लिखवाया गया, बंधक बनाकर रखा गया और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया।
यदि ये आरोप सही हैं, तो यह केवल एक डॉक्टर पर हमला नहीं, बल्कि कानून के राज, स्वास्थ्य व्यवस्था और अनुसूचित जनजाति समुदाय के सम्मान पर हमला है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि घटना को 9 दिन बीत जाने के बाद भी यदि आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो पीड़ित का कानून पर विश्वास कैसे कायम रहेगा?
राजस्थान सरकार और जालौर पुलिस से मांग है कि
• सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए। • SC/ST Act सहित लागू धाराओं में निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की जाए।
• डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
• किसी भी प्रकार के राजनीतिक या सामाजिक दबाव से मुक्त होकर निष्पक्ष जांच की जाए।
डॉक्टरों की सुरक्षा केवल डॉक्टरों का नहीं, हर मरीज के भविष्य का प्रश्न है।
@BhajanlalBjp@RajPoliceHelp@RajCMO@HansrajMeena@manojmeena@Radhemahwa
#JusticeForDrAnilMeena