बीजेपी दलितों को मंदिर में नहीं जाने देती है, और अगर कोई चला जाए तो वे मंदिर को धुलवाते हैं – ये हमारा धर्म नहीं है।
हमारा धर्म वो है जो सबको इज़्ज़त देता है, हर व्यक्ति का आदर करता है।
कांग्रेस और बीजेपी में यही फर्क है – हमारे दिलों में सबके लिए मोहब्बत और इज़्ज़त है, जबकि उनके दिलों में सिर्फ नफ़रत।
हम इस देश को नफ़रत का बाज़ार नहीं बनने देंगे - मोहब्बत की दुकान खोल कर न्याय का हिंदुस्तान बनाएंगे।
कहां चली गई 56 इंच की छाती?
अमेरिका का राष्ट्रपति टैरिफ थोपता है, मोदी जी चूं तक नहीं करते।
आर्थिक तूफान आने वाला है, करोड़ों लोगों को नुक़सान होगा – वे छुप कर बैठे हैं।
बांग्लादेश का प्रधानमंत्री भारत के खिलाफ उल्टा बोलता है, उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता।
जब इंदिरा गांधी जी से पूछा गया था - Do you lean left or right?
तब उन्होंने कहा था, “मैं न दाएं झुकती हूं, न बाएं – मैं हिंदुस्तान की प्रधानमंत्री हूं, सीधे खड़ी रहती हूं।”
लेकिन आज के प्रधानमंत्री सीधे मत्था टेक देते हैं।
कल, AICC के अहमदाबाद अधिवेशन 'न्यायपथ' में कांग्रेस ने देश के बहुजनों को हिस्सेदारी देकर, सामाजिक न्याय को मज़बूत करने के लिए 3 ऐतिहासिक संकल्प लिए हैं।
1. हम राष्ट्रीय कानून लाकर आरक्षण की 50% सीमा को खत्म करेंगे।
2. केंद्रीय कानून बनाकर SC/ST Sub Plan को कानूनी आकार देंगे और इन वर्गों की जनसंख्या के आधार पर बजट में हिस्सेदारी देंगे।
3. संविधान के अनुच्छेद 15(5) में निर्धारित SC, ST और OBC के निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के अधिकार को लागू करवाएंगे।
देश के बहुजनों के लिए हमारा संदेश साफ है - आपके भविष्य से जुड़े इन मुद्दों पर हमारा साथ निभाएं, हाथ को मज़बूत बनाएं...क्योंकि, हाथ बदलेगा हालात!
2024 के लोकसभा चुनाव में हमने देश के युवाओं से ‘पहली नौकरी पक्की’ देने का वादा करते हुए ‘1 लाख रुपए वार्षिक अप्रेंटिसशिप’ की गारंटी दी थी।
युवाओं के बेहतर भविष्य और बेरोजगारी से राहत दिलाने के लिए यह एक क्रांतिकारी योजना थी।
शायद मोदी सरकार को भी इसका अंदाज़ा था, इसलिए उसने हमारे घोषणा पत्र से नकल करते हुए ‘Employment Linked Incentive’ स्कीम की घोषणा की।
लेकिन दुर्भाग्य देखिए, इस स्कीम से एक भी युवा को लाभ नहीं मिला, क्योंकि ₹10,000 करोड़ की राशि आवंटित करने के बावजूद बिना उपयोग के वापस कर दी गई।
इससे एक बार फिर साफ होता है कि मोदी सरकार के लिए युवाओं का भविष्य कोई मायने नहीं रखता।
जब देश में बेरोजगारी चरम पर है और युवा हताश हैं, तब भी सरकार की यह लापरवाही सिर्फ चौंकाने वाली ही नहीं, शर्मनाक भी है।
BJP-RSS के नेता एक तरफ फुले जी को दिखावटी नमन करते हैं, और दूसरी तरफ उनके जीवन पर बनी फिल्म को सेंसर कर रहे!
महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले जी ने जातिवाद के खिलाफ लड़ाई में पूरा जीवन समर्पित कर दिया, मगर सरकार उस संघर्ष और उसके ऐतिहासिक तथ्यों को पर्दे पर नहीं आने देना चाहती।
BJP-RSS हर कदम पर दलित-बहुजन इतिहास मिटाना चाहती है, ताकि जातीय भेदभाव और अन्याय की असली सच्चाई सामने न आ सके।
After the 2024 election, PM Modi announced the "Employment Linked Incentive" scheme with much fanfare, promising to provide employment to our youth.
It's been nearly a year since announcing the scheme, the government hasn't even defined it, and has returned the ₹10,000 crores allotted to it. This shows how serious the PM is about unemployment.
Jobs can't be created by focusing only on large corporates, promoting cronies over fair-play businesses, prioritising assembly over production, and disregarding India's indigenous skills.
The way to create crores of jobs is through large-scale investment in MSMEs, fair markets where competition can thrive, support for local production networks and youth equipped with the right skills.
The PM won't agree with these ideas. But I must ask him directly:
- Prime Minister ji, you announced ELI with great showmanship - but where has this ₹10,000 crore scheme disappeared? Have you abandoned our unemployed youth along with your promises?
- While you create new slogans every day, our youth are still waiting for real opportunities. What is your concrete plan to generate the crores of jobs India desperately needs, or is this just another jumla?
- When will you shift your focus from enriching Adani and your billionaire friends to ensuring that young people from marginalised communities have equal access to employment?
.@narendramodi जी,
1. आपने "मंगलसूत्र चुरा कर ले जाने" वाली बात की थी। वो अब सच हो गई। आपके ही राज में महिलाओं को अपने सोने के गहनों को गिरवी रखने पर मजबूर कर दिया है।
2019 से 2024 के बीच 4 करोड़ महिलाओं ने अपने सोने को गिरवी रख 4.7 लाख़ करोड़ का लोन लिया है। 2024 में महिलाओं द्वारा कुल लोन का 38% हिस्सा - गोल्ड लोन का है। फरवरी 2025 में RBI के आंकड़ों से पता चला कि गोल्ड लोन में एक साल में 71.3% की भारी वृद्धि हुई।
पहले आपने नोटबंदी लागू कर महिलाओं का स्त्री-धन ग़ायब किया, अब महँगाई और गिरती घरेलू बचत के चलते वे अपनी सबसे क़ीमती चीज़ - अपने गहने गिरवी रखने पर मजबूर हैं।
2. अर्थव्यवस्था की हालत आपने इतनी बदतर कर दी है कि दोपहिया वाहन लेने वाले हमारे मध्यम वर्ग परिवार अब उसका लोन नहीं चुका पा रहें हैं। बढ़ते लोन डिफॉल्ट को देखते हुए दोपहिया वाहन फाइनेंसर 2019 के बाद पहली बार लोन देने में कटौती कर रहे हैं।
75% लोग दोपहिया वाहन लोन लेकर ख़रीदते हैं, ताकि वो धीमे-धीमे उसे चुकता कर सके, पर आर्थिक तंगी इतनी ज़्यादा है कि पिछले वर्ष के मुक़ाबले सितंबर 2024 तक क़रीब 2 लाख करोड़ के क़र्ज़ अभी बक़ाया है, जिसमें साल में ₹40,000 करोड़ की बढ़ोतरी हो गई है। फ़रवरी 2025 में दोपहिया वाहनों की बिक्री में 6% की गिरावट आई है।
मंदी, तंगी और जेब-बंदी - ये आपकी चलाई गई अर्थव्यवस्था का सार है।
रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ती भगदड़ की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। इनमें कई मासूम लोग अपनी जान गंवा देते हैं या घायल हो जाते हैं।
हमें मिलकर सोचना होगा कि ऐसी त्रासदियों को कैसे रोका जाए।
यदि आपके पास भीड़ मैनेजमेंट को बेहतर बनाने, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने या इससे संबंधित किसी भी तरह के सुझाव हैं, तो नीचे दिए लिंक पर शेयर करें। हम सुनेंगे आवाज़ भारत की!
https://t.co/lK5sGwuU2L
सूचना का अधिकार = सूचना ना देने का अधिकार?
RTI पर इससे पहले कभी इतना हमला नहीं हुआ जो अब हो रहा है - अगर मोदी सरकार की चली तो सूचना का अधिकार सूचना देने के बजाय सूचना ना देने का अधिकार बन सकता है। संभव है कि अब आपको सरकार से मांगी जानकारी भी न मिले। आगे पढ़िए
👉RTI पर हमला कैसे हो रहा है?
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP Act), 2023 के तहत RTI की धारा 8(1)(j) में संशोधन से RTI निरर्थक और निष्प्रभावी हो गया है
👉मोदी ने RTI को कमजोर करने के लिए क्या किया है?
सरकार ने RTI Act की धारा 8(1)(j) में संशोधन किया है, जो व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित है। बदले हुए नियम के अनुसार RTI के तहत कोई भी व्यक्तिगत जानकारी नहीं दी जा सकती
यह गोपनीयता की आड़ में सूचना ना देने के अलावा और कुछ नहीं है
👉DPDP एक्ट पर अब हंगामा क्यों?
मोदी सरकार ने 2023 में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट (DPDP एक्ट) पारित किया था, जब विपक्ष के अधिकांश सांसदों को निलंबित कर दिया गया था
सरकार ने अब तक नियमों को नोटिफाई नहीं किया था और बदलावों को सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा था, जिसकी समय सीमा आज समाप्त हो रही है
अगर सरकार सब की चिंताओं को नज़रअंदाज़ करके नियमों को अधिसूचित करती है तो RTI एक शक्तिहीन अधिकार बन जाएगा, जिसका लोगों को कोई फायदा नहीं होगा
👉 RTI क्यों महत्वपूर्ण है?
सूचना का अधिकार अधिनियम क्रांतिकारी था, इसने नागरिकों को सूचना मांगने का अधिकार देकर सशक्त बनाया
RTI ने शासन को पारदर्शी और सरकारों को अधिक जवाबदेह भी बनाया - ठीक वैसे ही जैसे किसी भी लोकतंत्र में होना चाहिए
RTI ने बार-बार बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार या नीतियों में खामियों को उजागर किया है
RTI ने नियमों और मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर किया है
RTI ने शक्तिहीन नागरिकों को शक्तिशाली बनाया है
👉क्या RTI वास्तव में व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करता है?
बिल्कुल नहीं। अपने मूल रूप में, RTI अधिनियम 2005 की धारा 8(1) (j) में स्पष्ट रूप से व्यक्तिगत जानकारी को रोकने का प्रावधान था
नियम था कि जो भी जानकारी किसी सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से संबंधित नहीं है या जो निजता का उल्लंघन करे, वो जानकारी सार्वजनिक ना हो
👉तो RTI के तहत अब किस तरह की जानकारी देने से मना किया जा सकता है?
अरबपति विलफुल डिफॉल्टर्स के नाम और डिफॉल्ट राशि?
भारत से भाग गए विलफुल डिफॉल्टर/अरबपति भगौड़े?
बैंकों ने किन बड़े-बड़े पूंजीपतियों के और कितने के लोन माफ किए हैं?
मनरेगा के तहत कितने लोगों को कितने दिन का काम दिया है?
PDS के तहत राशन दुकानों से किसको और कितना अनाज वितरित किया गया?
मतदाता सूची में किसके नाम जोड़े या हटाए गए?
जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों और न्यायाधीशों की आय और संपत्ति?
सरकारी योजनाओं के लाभार्थी?
👉क्या पारदर्शिता और निजता में परस्पर विरोध है?
नहीं। हमारे जैसे लोकतंत्र में पारदर्शिता और निजता में परस्पर विरोध नहीं हैं, बल्कि दोनों ही मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी हैं
👉नागरिक या प्रजा?
DPDP अधिनियम, 2023 के तहत RTI अधिनियम, 2005 को कमजोर करना पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर सीधा हमला है, जो सूचना के मौलिक अधिकार को खतरे में डालता है।
हम भारत के नागरिक हैं, जिन्हें हर चीज़ जानने का अधिकार है, न कि किसी राजा की प्रजा जिनको सिर्फ़ जयकारा लगाना है।
हमने बेलगावी में 'संविधान बचाओ पदयात्रा' के विषय में निर्णय लिया था, जिसके तहत यह यात्रा 26 जनवरी 2025 से 26 जनवरी 2026 तक चलने वाली है।
ऐसे में आज हरियाणा स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में इस पदयात्रा के तहत हमें क्या करना है और संगठन को कैसे मजबूत करना है- उस बारे में भी जरूरी बातचीत हुई।
इस बैठक में सभी ने अपने सुझाव दिए और हम इन्हीं सुझावों के साथ हरियाणा में संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे।
: हरियाणा कांग्रेस प्रभारी श्री @HariprasadBK2