12 साल के दावे, 12 साल के उद्घाटन, 12 साल के विज्ञापन।
फिर भी लाखों ग्रामीण परिवारों की सबसे बड़ी चिंता आज भी पानी है।
जब नल सूखे हों और वादे बह रहे हों, तब सवाल उठना ज़रूरी है।
#BarahSaalVinaashKaal
12 साल पूरे होने पर सरकार उपलब्धियां गिना रही है, लेकिन जनता अपने अनुभवों के आधार पर सवाल पूछ रही है। लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे जरूरी है। #BarahSaalVinaashKaal :::
12 साल बाद सबसे बड़ा सवाल—
क्या देश मजबूत हुआ या सिर्फ़ प्रचार मजबूत हुआ?
जनता को वादे मिले, लेकिन रोज़गार, राहत और आर्थिक सुरक्षा अब भी अधूरी है।
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नोटबंदी को "मास्टरस्ट्रोक" कहा गया था।
लेकिन करोड़ों लोगों के लिए यह आर्थिक झटका साबित हुई।
लंबी कतारें, बंद होते कारोबार और प्रभावित रोज़गार आज भी उस फैसले की याद दिलाते हैं।
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Every meal on our plates is made possible by the hard work of farmers.
But while food production grows, many farming households continue to face financial insecurity and uncertainty about the future.
It’s time for accountability and action.
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12 साल के दावे, 12 साल के उद्घाटन, 12 साल के विज्ञापन।
फिर भी लाखों ग्रामीण परिवारों की सबसे बड़ी चिंता आज भी पानी है।
जब नल सूखे हों और वादे बह रहे हों, तब सवाल उठना ज़रूरी है।
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