माता पिता की सेवा हो या राष्ट्र सेवा ,अपने पूर्वजों की गौरवगाधा हो या राष्ट्रीय गौरवगाधा या फिर बात हो व्यक्ति निमार्ण की ...यह सब संघ की शाखा में ही संभव हे
तुम उन्मादी भीड़ जुटाकर मोदी को मादर#%$%@ कहो, नीच कहो, मोदी की @#%$# फाड़ने की बात करो, मोदी विचलित नहीं होंगे। वे स्थितप्रज्ञ हैं।
गाली देने वालों को देश ने 15 साल के लिए सत्ता से फेंक दिया।
नियति ने मोदी को राष्ट्र-निर्माण के लिए चुना है। वे राष्ट्र धर्म निभा रहे हैं।
कांग्रेस के शासन काल में पेपर लीक की जिम्मेदारी शिक्षा बोर्ड की .....और भाजपा शासन में जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री की ।
वाह रे दोगलो , सब भारत में ही पैदा हुए हो ।
मुद्दा नीट पेपर लीक का था । धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो ।
कुछ ही समय में कोई बोला , उमर खालिद जिंदाबाद । कोई बोला , ब्राह्मण बाद मुर्दाबाद तो कोई बोला जय श्रीराम नहीं , जय संबिधान बोलेंगे ।
और अंत में गाया जाता है , नाम रहेगा अल्लाह का ।
फैसला कीजिए दोस्तों । ये आखिर कोन लोग हें
दान देने बाले चुप हें ।
मंदिर निर्माण में तन मन धन से सहयोग देने बाले चुप हें ।
राम को मानने बाले चुप हें ,
लेकिन राम मंदिर निर्माण की राह में पग पग पर कांटे बिछाने बाले धूर्त लोग आहत हें । उनके पेट में मरोड़ उठ रही है ।
• राजस्थान के व्यापारी दिलीप सिंह राठौड़ के पास पत्थर की खदान के ठेके हैं
• दिलीप सिंह राठौड़ का कहना है कि मैं राम मंदिर के लिए मुफ्त में पत्थर देने के लिए तैयार था
• राम मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों ने उनसे पत्थर लेने से मना कर दिया और फिर 500 रुपए स्क्वायर फिट के दाम पर पत्थर खरीदे गए
• L&T ने कहा था कि हम 1 रुपए में मंदिर निर्माण कर देंगे, तो फिर निर्माण में 2100 करोड़ रुपए कैसे लग गए?
• आज ट्रस्ट दान के आभूषण दिखा रहा है, लेकिन सवाल है- बाकी छोटे-छोटे आभूषण कहां हैं, सिंधी समाज की तरफ से दी गईं 200 किलो चांदी की ईंटें कहां है?
• निर्मोही अखाड़े ने मंदिर आंदोलन के समय कहा था कि VHP के लोग 1,500 करोड़ रुपए का चंदा खा गए, वो कहां है?
नरेंद्र मोदी, BJP-RSS ने सबसे बड़ा पाप तो यह किया कि ट्रस्ट को राजनीतिक अड्डा बना दिया और उसमें धर्माचार्यों को नहीं रखा।
शायद ट्रस्ट में धर्माचार्यों को इसलिए भी नहीं रखा गया, क्योंकि इन्हें लूट करनी थी।
: @ssrajputINC जी
📍 दिल्ली
फिर भी तुम लोगों लिखित रूप में राम को काल्पनिक बता दिया था ।
फिर भी तो तुम लोगों मंदिर निर्माण की राह में पग पग पर कांटे बिछाए थे ।
सब याद है मोहरमा , इन घड़ियाली आँसुओ से अब कुछ नहीं होने बाला ।
जिस देश में दिन की शुरुआत सुबह की ‘राम-राम’ से होती हो
जहाँ हर दूसरे आदमी के नाम में राम का नाम हो
उस देश में भगवान राम के मंदिर में डकैती होना बहुत बड़ी बात है
वाक़ई में संघियों से बड़ा महापापी कोई और नहीं हो सकता
राम मंदिर की डगर में पग पग पर कांटे बिछाने बाली कांग्रेस को आज राम मंदिर की बहुत चिंता हो रही है । ये कोरी राजनीत नहीं तो और क्या है ?
और बैसे भी जिन्होंने राम मंदिर में दान की तो छोड़ो , दर्शन भी नहीं किये.... उन्हें ये बकबास नहीं करनी चाहिए ।
चंपत राय और अनिल मिश्रा की इस्तीफे मंजूर करके राम मंदिर ट्रस्ट ने पूरी तरह यह स्वीकार कर लिया है कि पिछले एक महीने से देश को हिला देने वाली 'चंदा चोरी' की रिपोर्टें वाकई सत्य हैं।
यह स्वागत योग्य खबर है कि प्रभु राम के पावन मंदिर से वे लोग हटाए जा रहे हैं जो वर्षों तक इसे लूटते रहे।
लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
हास्यास्पद बात यह है कि यह घोषणा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष द्वारा की गई - वही व्यक्ति जिस पर इसके वित्त की निगरानी, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी संपत्तियों की रक्षा करने का दायित्व होता है। वह अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता, और न ही ट्रस्ट का कोई अन्य सदस्य इस दायित्व से किनारा कर सकता है, जिनकी देखरेख में इतना बड़ा रैकेट वर्षों तक फलता-फूलता रहा।
मूर्खता यहीं समाप्त नहीं होती। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त कर दिया गया है, जबकि खुद उन पर इस घोटाले को दबाने में भूमिका के आरोप हैं। उन्हें बड़े दायित्व से पुरस्कृत करने के बजाय ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए था।
देश टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे नहीं चाहता। उसे ट्रस्ट को पूरी तरह भंग करके उसका पुनर्गठन चाहिए। देश ट्रस्ट के हर सदस्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट-निगरानी में एक स्वतंत्र जांच चाहता है।
जवाबदेही सिर्फ ट्रस्ट पर समाप्त नहीं होनी चाहिए। नरेंद्र मोदी तक भी ज़िम्मेदारी तय की जानी चाहिए, जिन्होंने ट्रस्ट का गठन किया और उसके कई सदस्यों की नियुक्ति की; योगी आदित्यनाथ सरकार तक, जिसने वर्षों तक इस लूट और डकैती को प्रभावी जांच के बिना चलते रहने दिया; और उस आरएसएस-वीएचपी माफिया की भी जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है, जिसने दशकों से करोड़ों भारतीयों की कीमत पर खुद को मालामाल करने के लिए भगवान राम के नाम का दोहन किया है।
और कांग्रेस क्या है ? सांप ! अरे नहीं , सांप नहीं अजगर है । जो अबतक कश्मीर से लेकर केरल तक हिन्दुओं को डसती रही ।
हमने कश्मीर देखा है । हमने सुप्रीम कोर्ट में दिया कांग्रेस का वो हलफ़नामा भी देखा है जिसमें कहा गया , राम काल्पनिक हें ।
तुम हिंदू आस्था को डसने बाले सांप हो ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भेड़ की खाल ओढ़े हुए भेड़िया है।
दत्तात्रेय होसबाले का यह बयान राम मंदिर के करोड़ों के चढ़ावे और दान की लूट का सच सामने लाने के लिए नहीं है। बल्कि यह सच्चाई पर पर्दा डालकर संघ की छवि को बचाने का कुत्सित प्रयास है।
इस वीडियो का वास्तविक मकसद उत्तर प्रदेश सरकार की उस एसआईटी को वैध ठहराने की कोशिश है, जिसका गठन एफआईआर दर्ज होने से पहले ही कर दिया गया था। एसआईटी ने इस संवेदनशील मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए बगैर इस गोपनीयता से काम किया है कि लगता है कि बहुत कुछ छिपाया गया हो, और मालूम होता है कि इसमें बड़े मगरमच्छों को बचाकर कुछ छोटी मछलियों की बलि कर दिया जाना तय है।
राम मंदिर के चंदे की इस लूट ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। आज संघ के इस दिखावे ने उस जले पर नमक छिड़कने का काम भी कर दिया है।
सच यह है कि यदि संघ वास्तव में श्रद्धालुओं के दान और मंदिर के कोष की रक्षा के प्रति ईमानदार होता, तो जिस मंदिर की व्यवस्था और संचालन स्वयं उसके लोग ही देखते हैं, वहां इतना बड़ी लूट कभी नहीं होती।
यही संघ का असली चेहरा है - मुंह में राम, बगल में छुरी। राम का नाम उसके लिए महज़ दिखावा है, उसका असली काम इसी तरह की लूट खसोट ही है।
महोदय , बिषय गंभीर है । कस्वा मारहरा में चर्चाएं आम है । अगर शिकायकर्ता के पास सबूत हें तो कठोर कार्यवाही होनी चाहिए ।
अगर निष्पक्ष जांच होती है तो एक नहीं अनेक लाभार्थी गलत पाए जायेगें । सब काम मिलभगत से हों रहे हें ।
@PMOIndia@myogiadityanath
हसन सुहरावर्दी और हुसैन सुहरावर्दी दो अलग अलग व्यक्ति थे। जिस सड़क का नाम बदला गया है, वह हसन सुहरावर्दी के नाम पर थी जो कि एक जाने माने शिक्षक एवं विद्वान थे जिन्हें रविंद्रनाथ टैगोर ने शांतिनिकेतन में शोध करने के लिए आमंत्रित किया था।