1. जैसाकि यह विदित है कि श्री आकाश आनन्द को कल बी.एस.पी. में वापिस लेकर व पार्टी का पुनः राष्ट्रीय संयोजक बनाकर इनको पार्टी के कार्यो में लगा दिया है।
2. लेकिन आज अधिकांशः मीडिया में इस बात को काफी बढ़ा-चढ़ाकर लिखा है कि श्री आकाश आनन्द को चार बार पार्टी से निकालकर अब पुनः पार्टी में वापिस ले लिया है और इनको फिर से पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बना दिया है।
3. जबकि इस सम्बन्ध में इनको मैं यह भी अवगत कराना चाहती हूँ कि श्री आकाश आनन्द की शादी होने से पहले ही वे पार्टी में काफी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, जिसकी वजह से इनको पार्टी से कभी भी नहीं निकाला गया है।
4. लेकिन इनका रिश्ता श्री अशोक सिद्धार्थ के साथ होने के बाद से फिर इन्होंने अपने ख़ुद के स्वार्थ मे श्री आकाश आनन्द की इमेज को काफी कुछ ख��राब करने का प्रयास किया है।
* जिसके कारण फिर श्री आकाश आनन्द में सुधार लाने के ख़ास उद्देश्य से इनको पार्टी से कई बार निकालना भी पड़ा है और ग़लती का एहसास होने के बाद फिर इनको वापिस भी लेना पड़ा है।
5. लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि श्री अशोक सिद्धार्थ के संन्यास लेने के बाद से अब ऐसी कोई भी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिये कि पार्टी को फिर से इनको अलग करना पडे़।
6. अर्थात् जिस प्रकार से इन्होंने शादी से पहले पार्टी को कभी भी कोई शिकायत का मौक़ा नहीं दिया है, जिसके कारण इनको कभी भी पार्टी से निकालना नहीं पड़ा है और अब श्री अशोक सिद्धार्थ के संन्यास लेने के बाद तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है कि इनको अब आगे कभी भी पार्टी से निकालने की ज़रूरत पडे़गी और अब वे राजनीति में आगे ही बढ़ेंगे, ऐसी सभी को पूरी-पूरी उम्मीद भी है।
7. इसलिए मीडिया को यह सब सच्चाई को उजागर करते हुये तब इनके बारे में पार्टी से कई बार निकालने का उल्लेख करन��� चाहिये तो यह बेहतर होगा।
आदरणीय बहन कु. मायावती जी, सादर चरणस्पर्श।
आपने मुझे क्षमा किया और बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्र���य संयोजक की ज़िम्मेदारी दोबारा सौंपी। इस भरोसे के लिए मैं तहे दिल से आपका आभारी हूँ, और इसे मैं हल्के में कभी नहीं ले सकता हूँ।
पिछले कुछ समय ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। सबसे बड़ी सीख यह है कि यह मूवमेंट किसी एक व्यक्ति से कहीं बड़ा है। परमपूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी और मान्यवर श्री कांशीराम जी ने जो रास्ता दिखाया, और जिस पर आपने ��पना पूरा जीवन लगा दिया, उस पर चलना मेरा सौभाग्य है।
इसलिए आपके दिशा-निर्देशन में पार्टी और मूवमेंट का हित ही मेरे लिए सर्वोपरि रहेगा। मैं अपने सभी व्यक्तिगत हितों को त्यागकर, अनुशासन और पूरी निष्ठा के साथ, संगठन को मज़बूत करने के लिए दिन-रात काम करूँगा।
आपने मुझ पर भरोसा किया है। अब उसे अपने काम से सही साबित करना मेरी ज़िम्मेदारी है।
जय भीम, जय भारत।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब ख़ासकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण ज़बरदस्त तैयारी भी की जा रही है।
2. यहाँ यह भी कहना हैं कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ’बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनज़र रखते हुये व ख़ासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिये ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेकों सख़्त फैसले भी लिये गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-ब���न व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-ज़ाहिर है।
3. वैसे तो श्री आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहें हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ ज़रूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः श्री आकाश आनन्द के ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है।
* जिसके बाद से श्री आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका ख़ास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ’एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।
4. इसको लेकर पार्टी के अधिकांशः लोगों का यही कहना है कि श्री आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई ज़िम्मेवारियों के साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौक़ा दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में श्री ईशान आनन्द ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुये यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में मा. बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से ज़रूर निभायेंगे।
5. ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पा���्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री आकाश आनन्द को पुनः बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर इनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौक़ा दे रही है। उम्मीद है कि श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति सेे संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालाँकि यह काफी कुछ श्री आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा।
6. इन्ही कुछ ज़रूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही श्री आकाश आनन्द के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द को तथा इनके पिता श्री आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूँ। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के सभी ���ोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूँ।
@NkNandanLive तुम्हारे जैसे बैकलोलो की हैसिय��� उतनी नहीं जितना कासिम साहब दिनभर रजनीगंधा खाकर और खिलाकर थूक देते हैं। अगर तुम केवल खाली पाउच उठाकर इकट्ठा कर लो एक द���न का तो शायद तुम्हारे महीने भर का खर्चा निकल जाए। और रही बात तेल तो तुम्हारा पूरा खानदान नहीं डलवा पाएगा
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़ैसले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत स���झा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम।
जय बसपा।
1.जैसाकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी ख़ासकर समाजवादी पार्टी (सपा) की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, क़रीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल ग़रीब, मध्यम वर्ग व कमज़ोर तबक़ों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी प���र्टी का उम्मीदवार बनाती है, अर्थात बी.एस.पी. की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ’पीडीए’ (PDA) की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज़्यादा नज़र आती है।
2.इसका एक और ख़ास व ताज़ा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिये द्विवार्षिक चुनाव में श्री रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाय��� है जो सपा मुखिया के नज़दीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार श्री धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं। लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः ’फेस सेविंग’ व चुनाव हारने के लिये होगा।
3.तो इस प्रकार का है सपा, उसका ’पीडीए’ (PDA) व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ’पीडीए’ का चाहिये, लेकिन सांसद व वि��ायक आदि ज़्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूँजीपतियों को बनाती है। अतः जनता इनके ’पीडीए’ के बहकावे में ना आये तो यह सही।
4.वास्तव में यह कोई नई बात नहीं है बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसीलिये ख़ासकर अपरकास्ट समाज के ग़रीबों तथा ’बहुजन समाज’ अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब ख़ासकर यूपी ��िधानसभा आमचुनाव से पहले ही ज़रूर पूरी तरह से सचेत/सतर्क हो जाना चाहिये कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बी.एस.पी. में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है।
PDA से भाजपा समर्थित राज्यसभा सांसद धनराज परिमल नाथवानी और प्रो. राम गोपाल यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की उपस्थिति में प्रातः 11 बजे अपना नामांकन पत्र दाखिल क��ेंगे।