@PMOIndia@narendramodi@AmitShah आदरणीय मोदी जी, नितिन गडकरी जी को थोड़ा कंट्रोल कीजिए। देश की जनता सब देख रही है, कहीं ऐसा न हो कि अगले इलेक्शन में इनके बड़बोलेपन के चलते बीजेपी को परेशानी हो जाए।
टोयोटा की Vellfire SUV गाड़ी तकरीबन टैक्स पकड़कर 1.5 करोड़ रुपए में आती है.
अक्षय कुमार, अनिल कपूर, आमिर खान, रणबीर कपूर, अभिषेक बच्चन और सलमान खान समेत कई बॉलीवुड स्टार्स के पास है.
इन स्टार्स की सालाना कमाई इस प्रकार है.
अनिल कपूर 80 करोड़
रणबीर कपूर 150 करोड़
अक्षय कुमार 250 करोड़
सलमान खान 280 करोड़
आमिर खान 300 करोड़
इनका टोयोटा की Vellfire गाड़ी में घूमना समझ में आता है. लेकिन ये साधु संत क्यों टोयोटा की Vellfire और Fortuner में घूम रहे हैं.
ये लोग कौन सी कमाई करते हैं. चंदा पर पलनों वालों को क्या इतनी महंगी महंगी गाड़ियों में घूमना फिरना चाहिए, जहां करोड़ो आबादी दो वक्त के रोटी के लिए जदोजहद करती है.
टिन्नू यादव भी समझदार चोर है केवल नगदी की ही चोरी की है ..बाकी सोना चांदी ,काग भुसंदी ,स्वर्ण रामायण सब वहीं मौजूद हैं और सुरक्षित है और जो हरामजादे अफवाह फैला रहे हैं की ये चोरी है वो चोरी है और जो दान दाता भोसड़ी के इन अफवाहों मे आकर अपना दान वापस मांग रहे हैं ..वो अपना किया दान वापस ले जाएँ .. मेरे राम को ऐसे दान की जरूरत भी नही है ..जितनी साजिशे करणी है कर लो हरामियों पर ध्यान रखना जब राम का चाबुक चलेगा तो तन की खाल तलक खिंच जाएगी .. सत्ता तुम्हे इतनी प्यारी हो गई जो भगवान राम को भी बदनाम करने से ना चुके .. जाँच जारी है खाल सबकी उतारी जाएगी और अखिलेश ने तो ओखली मे सर दे दिया है ...जैसे मोमता बानो की लंका उजड़ गई ठीक वैसे ही ये यूपी से गायब हो लेगा ...जिस तरह से इस टोंटी ने टिन्नू यादव के साथ मिलकर मेरे राम और करोड़ो कारसेवकों की आस्था पर चोट की है ये अब जन्म जन्मातर तक कभी सत्ता ना पा सकेगा ...और जिस नेरेटिव के तहत टोंटी काम कर रहा है उसे मेरे राम और हम सभी सनातनी कभी सफल ना होने देंगे ... और जिसकी लुगाई ना बच्चा जो अपनी सरकारी नौकरी छोड़ कारसेवा मे लग गया जिसने अपना सर्वश्व राम पर वार दिया उस चम्पत राय को तुम चोर बता रहे हो खुलासा जल्द ही होगा ...बड़े बड़े नाम उजागर होंगे साजिशें विफल होंगी ..और जो कालनेमी राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह मे काले कपड़े पहन विरोध कर रहे थे वो आज रामभक्त बन गये और जिस बेटीचोद की नानी राम मंदिर को अल्ला का घर बता रही थी वो हरामी भी अब राम का गुड़गान कर रहा है ... अबे रामजादो और हरामजादों की लड़ाई मे जीत हम रामजादो की ही होगी ... रुको और इंतजार करो ये योगी है छोड़ेगा किसी को भी नही ... राम सब देख रहा है ... जय श्री राम
फोर्ड ने कुछ समय पहले हजारों Engineers को निकाल दिया था..... अब उन्हें यह महसूस हुआ कि AI इस समय अनुभवी इंजीनियरों की पूरी तरह जगह नहीं ले सकता.... अब फोर्ड ने सैकड़ों अनुभवी इंजीनियरों को दोबारा काम पर रखा है.
Ford कुछ समय से Quality Check के लिए AI और ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल कर रही थी।
लेकिन एक समस्या थी.....
मशीनें स्कैन कर सकती थीं।
वे माप ले सकती थीं।
वे Defect की पहचान भी कर सकती थीं।
लेकिन वे हमेशा उन बातों को नहीं समझ पाती थीं, जिन्हें अनुभवी इंजीनियर एक नज़र में पहचान लेते थे।
जैसे इंजन से आने वाली कोई अजीब आवाज़।
डिज़ाइन की कोई बहुत छोटी कमी।
या कोई ऐसा पार्ट, जो टेस्ट में पास हो गया हो, लेकिन अनुभवी इंजीनियर को सही न लगे।
ऐसी समस्याएँ अक्सर वही लोग पहचान पाते हैं, जिन्होंने वर्षों तक इस काम का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया हो।
इसी वजह से फोर्ड ने सैकड़ों अनुभवी इंजीनियरों और तकनीशियनों को फिर से नियुक्त किया।
सिर्फ जांच करने के लिए नहीं,
बल्कि नए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए,
समस्याओं को पहले ही पहचानने के लिए,
AI सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए,
और वह अनुभव व निर्णय क्षमता वापस लाने के लिए, जिसकी बराबरी AI अभी भी पूरी तरह नहीं कर पाया है।
यह हमें याद दिलाता है कि अनुभव सिर्फ जानकारी नहीं होता।
यह सहज समझ (Instinct), पैटर्न पहचानने की क्षमता, याददाश्त, और सालों के व्यावहारिक अनुभव का परिणाम होता है।
AI बहुत शक्तिशाली है, लेकिन कई बार 30 साल तक इंजनों के साथ काम करने वाला इंसान आज भी ऐसी बातें समझ जाता है, जिन्हें मशीन अभी नहीं समझ पाती।
किसने दिल्ली एयरपोर्ट और हैदराबाद एयरपोर्ट को जीएमआर ग्रुप को बेचा यह भी बता दो
किसने हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन को बेचकर उसे एचडीएफसी बैंक बनाया वह भी बता दो
किसने Industrial Credit and Investment Corporation of India को बेचकर आइसीआइसीआइ बैंक बना दिया वह भी बता दो
किसने यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया को बेचकर पहले यूटीआई बैंक और बाद में एक्सिस बैंक बनाया वह भी बता दो
किसने LIC में 30% डीसइन्वेस्टमेंट की मंजूरी दिया था वह भी बता दो
किसने पांच सरकारी होटल को बेचा था वह भी बता दो भाई
किसने भारत का पहला टोल रोड बनाया और भारत में टोल टैक्स की शुरुआत की उसका भी नाम बता दो
किसने हमारे सैनिकों के द्वारा पकड़े गए 93000 पाकिस्तान सैनिकों को बिना अपने 54 सैनिक और अधिकारी छुड़ाएं दे दिया उसका भी नाम बता दो
किसने भोपाल में 10000 लोगों के हत्यारे 50000 लोगों को अंधा करने वाले यूनियन कार्बाइड के मालिक एंडरसन को सरकारी विमान से दिल्ली भेज कर उसी दिन अमेरिका भगा दिया उसका भी नाम बता दे भाई
दलाली में इतने अंधे मत बन जाओ भाई
माना कि तुम बहुत बड़े दलाल हो
24 घंटे बिजली चाहिए, लेकिन सोलर, डैम और न्यूक्लियर सब बंद।
रेयर-अर्थ सप्लाई चेन चाहिए, लेकिन खनन का नाम सुनते ही धरना शुरू।
इनकी सोच है—
“आम खाने हैं, मगर पेड़ लगाने नहीं।”
ये जमात ऐसी है।🤣
आज कोटा में NEET री-एग्जाम के बीच मानवता की एक खूबसूरत मिसाल
आज NEET री-एग्जाम के दौरान भीमगंज थाना क्षेत्र के आसपास बने परीक्षा केंद्रों पर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को छोड़ने आए थे। परीक्षा, रिपोर्टिंग और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया के कारण कई अभिभावकों को 4-5 घंटे तक बाहर इंतजार करना पड़ रहा था।
ऐसे समय में गिरिराज खंडेलवाल जी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शिखा खंडेलवाल ने अपने घर के दरवाजे अभिभावकों के लिए खोल दिए। बैठने की व्यवस्था की, बारिश से बचने के लिए आश्रय दिया और अपने घर के वॉशरूम तक सभी के लिए उपलब्ध करवा दिए। महिलाओं, बुजुर्गों और दूर-दराज़ से आए अभिभावकों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं था।
लेकिन इस कहानी के असली नायक केवल गिरिराज जी और शिखा जी ही नहीं हैं। धीरे-धीरे पूरा मोहल्ला इस सेवा कार्य में शामिल हो गया। किसी ने चाय की व्यवस्था की, किसी ने कचौरी मंगवाई, किसी ने लस्सी का इंतजाम किया। जो भी बन पड़ा, लोगों ने मिलकर किया ताकि बाहर इंतजार कर रहे अभिभावकों को थोड़ी राहत मिल सके।
आज जब हम अक्सर समाज में संवेदनशीलता की कमी की बातें करते हैं, तब कोटा के इस छोटे से मोहल्ले ने दिखा दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। बिना किसी प्रचार, बिना किसी स्वार्थ और बिना किसी अपेक्षा के अनजान लोगों के लिए अपने घर, अपना समय और अपने संसाधन खोल देना वास्तव में मानवता का सबसे सुंदर रूप है।
इतना ही नहीं, परीक्षा के नियमों के कारण कुछ विद्यार्थियों को अपने आभूषण बाहर उतारने पड़े। एक छात्रा ने अपने कुंडल भी इनके पास सुरक्षित रखे और निश्चिंत होकर परीक्षा देने चली गई। यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि विश्वास का भी प्रतीक है।
मैं संयोगवश वहाँ एक विद्यार्थी को छोड़ने गया था। गिरिराज जी मेरे कॉलेज के सीनियर भी हैं। वहाँ का माहौल देखकर लगा कि कोटा की पहचान केवल कोचिंग संस्थानों, परीक्षाओं और परिणामों से नहीं है। कोटा की असली पहचान ऐसे लोग हैं, जो जरूरत पड़ने पर अजनबियों को भी अपना बना लेते हैं।
🙏 ऐसे ही लोगों की वजह से समाज में भरोसा और इंसानियत कायम है।
(कोटा के निलेश गुप्ता जी की फेसबुक पोस्ट)
नीच कांग्रेस और उसका युवराज राहुल गांधी सिर्फ छात्रों के साथ देने का नौटंकी करता है
कल नीट एग्जाम के दिन और उसी समय जानबूझकर कांग्रेस ने बेंगलुरु में अपनी एक बड़ी रैली रखी थी
रैली की वजह से भीषण जाम लगा जिससे कई छात्रों के नीट के पेपर छूट गए
सिर्फ एक सेंटर का इन रोती हुई तीन लड़कियों का वीडियो वायरल हो रहा है जिन्हें लेट होने की वजह से अंदर प्रवेश नहीं मिला
और इन छात्राओं का कहना है कि वह रैली की वजह से जाम में फंस गई थी तीनों छात्राओं ने दो साल ड्रॉप लेकर के तैयारी किया था
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली एयरपोर्ट पर पूरे 45 मिनट रुक रहे सिर्फ इसलिए कि कहीं उनके काफिले की वजह से ट्रैफिक रोकने से बच्चों को परेशानी ना हो
इसीलिए जब ढाई बज गया तब जाकर के नरेंद्र मोदी जी एयरपोर्ट से अपने आवास के लिए रवाना हुए थे
राहुल गांधी इन लड़कियों के आंसुओं का जवाब तुम कब दोगे ??
।
*लो भाई 3 पूर्व भारतीय प्रधानमंत्रियों पर प्रश्नोत्तर।*
*Q1: थुसु रहमान बाई नाम से महिला कौन है ?*
Ans: पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की माँ।
*Q2: जवाहरलाल नेहरू के पिता कौन हैं ?*
Ans: श्री मुबारक अली
*Q3: मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू के बीच क्या संबंध है ?*
Ans: मुबारक अली की मृत्यु के बाद मोतीलाल नेहरू, थुसु रहमान बाई के दूसरे पति हैं। मोतीलाल मुबारक अली के कर्मचारी के रूप में काम कर रहा था और वह उसके लिए दूसरी पत्नी है। तो मोतीलाल नेहरू जवाहरलाल नेहरू के सौतेले पिता हैं।
*Q4: क्या जवाहरलाल नेहरू कश्मीरी पंडित जन्म से हैं ?*
Ans: नहीं, पिता और माता दोनों ही मुसलमान हैं।
*Q5: क्या जवाहरलाल नेहरू अपने सौतेले पिता की वजह से अपना हिन्दू नाम रखे हुए थे ?*
Ans: हाँ, क्योंकि ये नाम एक पर्दा था। लेकिन मोतीलाल भी खुद कश्मीर पंडित नहीं हैं।
*Q6: मोतीलाल के पिता कौन हैं और पंडित उनके नाम के साथ कैसे जुड़ गए ?*
Ans: मोतीलाल के पिता जमुना नहर (नेहर) के ग़यासुद्दीन गाज़ी हैं जो 1857 के विद्रोह के बाद दिल्ली भाग गए और फिर कश्मीर चले गए।
वहाँ उन्होंने अपना नाम गंगाधर नेहरू में बदलने का फैसला किया ('नहर/नेहर' 'नेहरू' बन गए) और "पंडित" को इस नाम के सामने इसलिए रखा कि वे लोगों को अपनी जाति पूछने का कोई मौका न दे। अपने सिर पर टोपी (टोपी) के साथ पंडित गंगाधर नेहरू इलाहाबाद चले गए।
उनके बेटे मोतीलाल ने लॉ की डिग्री पूरी की और लॉ फर्म के लिए काम करना शुरू किया।
*Q7: पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के माता-पिता कौन हैं ?*
Ans: जवाहरलाल नेहरू के सौतेले पिता से जन्मे मंसूर अली (मुस्लिम) और कमला कौल नेहरू (एक कश्मीरी पंडित)।
*Q8: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के माता-पिता कौन हैं ?*
*A: जहांगीर फ़िरोज़ खान (फ़ारसी मुस्लिम) और इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू उर्फ मामूना बेगम खान।*
इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू उर्फ मामूना बेगम खान- w/o जहांगीर फिरोज खान (फारसी मुस्लिम), जिन्होंने बाद में मोहनदास करमचंद गांधी की सलाह पर अपना नाम बदलकर गांधी रख लिया।
*उनके दो बेटे राजीव खान (पिता फिरोज जहांगीर खान) और संजीव खान (नाम बाद में बदलकर राजीव गांधी व संजय गांधी हो गए) संजय के पिता भी फिरोज़ नही बताये जाते।*
*Q9: क्या जवाहरलाल नेहरू (भारत के पूर्व प्रधानमंत्री), मुहम्मद अली जिन्ना (पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री) और शेख अब्दुल्ला (कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री) एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं ?*
Ans: हाँ
*ऊपर बताए गए तीन लोगों की माताओं में एक ही पति मोतीलाल नेहरू थे।*
*जिन्ना की मां मोतीलाल की चौथी पत्नी हैं।*
*अब्दुल्ला मोतीलाल की 5 वीं पत्नी जो उनके घर की मेड थी के माध्यम से है।*
*इसलिए दोनों के पिता एक ही थे। जबकि जवाहर लाल के पिता मोतीलाल जवाहर लाल के सौतेले पिता हैं।*
*Q10: आपको ये सभी उत्तर कहां से मिले, जबकि मुझे इतिहास की पुस्तकों में ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है, जिसका मैंने अध्ययन किया है ?*
Ans: एम. ओ. मथाई (जवाहरलाल नेहरू के निजी सहायक) की जीवनी से।
👉 *एम.ओ. मथाई!!*
सभी को फॉरवर्ड करें :--
*बहुत कम लोगों को पता है कि यह परिवार भारत के लोगों को धोखा दे रहा है।"*
*सबको असलियत से रूबरू करायें*
[: लो खोद के लाया हूं काग्रेस का कच्चा चिठ्ठा :-
क्या आपको पता है मोदी जी कड़े निर्णय कहीं भी क्यों नहीं ले पाते हैं ❓
ऐसे में वह जो भी कर पा रहे हैं वह भी बड़ा चमत्कार है आश्चर्यजनक है
😳
नीचे लिखा अगर आप पढ़ेंगे तो आपको पता लग जाएगा
👇
*देश मे मुस्लिम और क्रिश्चियन का कार्ड खेलने वाली कांग्रेस ने देश मे क्या-क्या गुल खिलाये हैं...!*😡
*जानना हरेक भारतवासी का हक़ है...*
आपको यह सन्देश 3 लोगो को भेजना है।
3 × 3 = 9
9 × 3 = 27
*बस आपको तो एक कड़ी जोड़नी है,*
*देखते ही देखते पूरा देश जुड़ जायेगा.*
।
साभार :- @peldijiye
।
#औ_का
24 लाख बच्चों को एडमिट कार्ड मिल चुका जिसने जिस शहर में अपना सेंटर चुना था वह शहर अलॉट हो गया
सिर्फ एक बच्चा नागपुर का एक छात्र उसने शिकायत किया कि उसे नागपुर के बजाय अबू धाबी सेंटर मिला
विपक्ष के सभी नेता सेकुलर सूअर राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव घाघरा और लहंगा उठा कर नाचने लगे
लेकिन जब NTA ने जवाब दिया की छात्र ने खुद अपनी आईडी से लॉगिन करके अपने सेंटर को बदला था
असल में इस बार NTA सुविधा दिया था कि कोई भी अपना सिटी बदल सकता है क्योंकि बहुत से बच्चे एग्जाम के बाद अपने-अपने घर चले गए जैसे कुछ बच्चे अगर कोटा में पढ़ते थे तो वह बिहार चले गए या यूपी चले गए
फिर जब NTA ने बताया कि खुद छात्र ने ही नागपुर के बजाय अबू धाबी गलती से बदल दिया था NTA ने टाइमिंग के साथ सबूत दे दिए की 48 घंटे पहले दो बार आईडी से दो बार लॉग इन हुई तब बच्चे ने स्वीकार किया कि हां मुझसे गलती से केंद्र बदलते समय अबू धाबी हो गया होगा
अब सारे सेकुलर सूअर चुप हो गए
हालांकि फिर भी मानवता दिखाते हुए NTA ने तुरंत बच्चे का सेंटर बदलकर नागपुर कर दिया
आरजी कर हत्या बलात्कार केस में एक बहुत बड़ा विस्फोटक खुलासा हुआ है
और इस खुलासे ने पूरे दुनिया को यह बता दिया कि आखिर क्यों ममता बनर्जी इस मामले को पूरी तरह से लीपा पोती करने में लगी रही
ममता बनर्जी का दूसरा भतीजा आवेश बनर्जी के मोबाइल का टावर लोकेशन ठीक उस वक्त जब मेडिकल छात्रा के साथ दरिंदगी हो रही थी उसी जगह मिला है
उन सभी सीसीटीवी फुटेज को डिलीट किया गया है जहां-जहां सीसीटीवी में आवेश बनर्जी कैद हो गया था
विरासत में पिता की संपत्ति मिल सकती है, उनके कद की आड़ मिल सकती है,
उनकी पहुँच का फायदा मिल सकता है,
लेकिन पिता का कद नहीं मिल सकता।
बस उद्भव ठाकरे ये बात नहीं जानते थे। वो खुद को बाला साहेब ठाकरे पार्ट-2 समझने लगे थे और यहीं से अपना रास्ता भूल गए।
उद्भव भूल गए कि हर दौर अलग होता है। बाला साहेब ठाकरे का भी एक दौर था, जब वो बीजेपी को "कमलाबाई" कहकर मजाक उड़ाते थे और बीजेपी नजरअंदाज कर देती थी।
जैसे अटल-आडवाणी का दौर था,
वैसे अब मोदी-शाह का दौर है।
80 के दशक में जन्मी बीजेपी और 1966 में बनी शिवसेना ने एक-दूसरे की जरूरत समझी और 1995 में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई। आगे भी बीजेपी ने शिवसेना को साथ रखने के लिए बड़ा दिल दिखाया।
लेकिन जब बड़ा दिल दिखाने की बारी उद्भव ठाकरे की आई तो उन्होंने नैतिकता को ताक पर रखकर राजनीतिक विचारधारा से समझौता किया और दगाबाजी का दामन थाम लिया।
महाराष्ट्र और देश में बढ़ते बीजेपी के कद को उनकी शिवसेना स्वीकार नहीं कर पाई और अपनी ही अकड़ में बनी रही।
आज शिवसेना की जो मिट्टी पलीत हुई है, उसके पीछे अगर कोई है तो वो खुद उद्भव ठाकरे हैं। उनकी राजनीतिक नासमझी, अदूरदर्शिता, हठधर्मिता और मूर्खता है।
आज जो संजय राउत नैतिकता की दुहाई देते हुए अपने ही बागी सांसदों को भद्दी गाली दे रहे हैं, पहले वो ये बतायें कि 35 साल पुराने गठबंधन को तोड़ते समय उन्हें कितनी शर्म आई थी।
आई भी थी कि नहीं....???
राजस्थान में यूथ कांग्रेस के चुनाव हुए…
एक वोट देने का सौ रुपये चार्ज था…रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर…
लगभग 30 लाख से ज़्यादा लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया…
लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये जमा हो गए…
कांग्रेस फंड में पैसा पहुँच गया…
पैसा पहुँचते ही चुनाव परिणाम घोषित करना ही भूल गए…
ये लोकतंत्र और संविधान की बातें करते हैं…😂😂
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार बेंगलुरु के पास हाई-टेक टाउन बसाने के लिए
बिदादी में 7,481 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण कर रही है।
अपनी रोटी और जमीन बचाने के लिए 3,500 से अधिक किसान पिछले 470+ दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं।
यह कोई बंजर जमीन नहीं है!
यह उपजाऊ बेल्ट है जहां रेशम, केला, सब्जियां, सुपारी और डेयरी का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है,
जो रोजाना बेंगलुरु शहर की जरूरतों को पूरा करता है।
इस जमीन के छिनने से हजारों ग्रामीण महिलाएं और भूमिहीन खेतिहर मजदूर पूरी तरह बेरोजगार हो जाएंगे।
राहुल गांधी जी उत्तर भारत में किसानों के हक की वकालत करते हैं और कॉर्पोरेट हितों के खिलाफ बोलते हैं।
दूसरी तरफ कर्नाटक में उनकी अपनी सरकार किसानों से उनका अभिमान छीन रही है।
राहुल गांधी जी को तुरंत हस्तक्षेप कर इस किसान विरोधी भूमि अधिग्रहण को रोकने का निर्देश देना चाहिए।
देश देख रहा है कि कथनी और करनी में कितना अंतर है!
एक फ्रांसीसी मोटरसाइकिल व्लॉगर "Frenchy" अपनी बाइक से भारत की यात्रा कर रहा था। उसके गले पर एक गांठ थी। उसने जिज्ञासावश स्थानीय लोगों से पूछा कि इसे हटाने में कितना खर्च आएगा और प्रक्रिया कैसी होगी। उसे बताया गया कि पूरा इलाज लगभग 500 डॉलर में हो जाएगा।
कम लागत और बेहद कम इंतज़ार का समय देखकर वह हैरान रह गया और उसने सर्जरी करवाने का फैसला कर लिया। सिर्फ एक हफ्ते के भीतर गांठ हटा दी गई। उसने इस पूरे अनुभव को कैमरे में रिकॉर्ड भी किया।
बाद में उसने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में एक दुर्घटना के बाद इसी तरह की सर्जरी के लिए उसे लगभग 12,000 डॉलर खर्च करने पड़े थे।
अगर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भारत के बारे में फैलाई जाने वाली नकारात्मक धारणाएं और छवि खराब करने वाले अभियान न हों, तो भारत केवल मेडिकल टूरिज्म से ही हर साल सैकड़ों करोड़ डॉलर की कमाई कर सकता है।
यही वजह है कि भारत को अपनी सकारात्मक छवि को दुनिया के सामने मजबूती से रखना होगा और गलत धारणाओं तथा दुष्प्रचार को रोकना होगा!
एक दिन गैस सिलेंडर डिलीवर करने वाला सिलेंडर छोड़कर जा रहा था?
तभी घर के एक बुजुर्ग ने उसे रोक लिया और बोले जरा सिलेंडर इधर घुमाना
डिलीवरी वाला हैरान हो गया उसे लगा शायद वजन चेक करेंगे।
लेकिन बुजुर्ग की नजर सिलेंडर के हैंडल के अंदर लिखे एक कोड पर थी।
वहां कुछ ऐसा लिखा था -
C-26
घर के बाकी लोग भी उत्सुक हो गए।
उन्होंने पूछा -
"ये क्या होता है?"
तब बुजुर्ग ने समझाया कि गैस सिलेंडर पर एक कोड लिखा होता है।
जिसे ज्यादातर लोग कभी देखते ही नहीं।
इस कोड में A, B, C और D चार क्वार्टर को दर्शाते हैं।
A = जनवरी से मार्च
B = अप्रैल से जून
C = जुलाई से सितंबर
D = अक्टूबर से दिसंबर
और उसके बाद लिखा नंबर साल को दर्शाता है।
जैसे C-26 का मतलब है कि सिलेंडर की अगली टेस्टिंग सितम्बर 2026 तक होनी चाहिए।
कई लोग इसे Expiry Date समझते हैं।
लेकिन तकनीकी रूप से यह सिलेंडर की अगली Statutory Testing Date होती है।
यानी उस तारीख तक सिलेंडर की जांच होनी चाहिए।
ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सिलेंडर सुरक्षित है।
अगर किसी सिलेंडर पर बहुत पुरानी तारीख लिखी हो।
तो इसका मतलब हो सकता है कि उसकी जांच समय पर नहीं हुई।
इसीलिए गैस सिलेंडर लेते समय सिर्फ वजन ही नहीं।
यह कोड भी देख लेना चाहिए।
कुछ सिलेंडरों पर एक और नंबर लिखा होता है।
जैसे 15.8
कई लोग सोचते हैं कि यह गैस का वजन है।
जबकि असल में यह Tare Weight होता है।
यानी खाली सिलेंडर, वाल्व और धातु का कुल वजन।
गैस का वजन इसमें शामिल नहीं होता।
मान लीजिए खाली सिलेंडर का Tare Weight 15.8 kg है।
और घरेलू LPG गैस 14.2 kg है।
तो भरे हुए सिलेंडर का कुल वजन लगभग -
15.8 + 14.2 = 30 kg
होना चाहिए।
तब घर वालों को एहसास हुआ कि वे सालों से गैस सिलेंडर ले रहे थे।
लेकिन कभी उस पर लिखे इन नंबरों का मतलब नहीं समझा।
कई बार सुरक्षा से जुड़ी सबसे जरूरी जानकारी हमारे सामने ही लिखी होती है बस हम उसे पढ़ते नहीं हैं?