अब तक हम मानते थे कि सिर्फ परीक्षा प्रणाली में ही भ्रष्टाचार है सीटें बिकती हैं, नकल होती है, और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ होता है। लेकिन अब जब चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं, तो चिंता गहरी हो जाती है। क्या सच में वोट चुराए जा रहे हैं? जिम्मेदार संस्थाएं पारदर्शिता क्यों नहीं ला रहीं? अगर मतदाता का विश्वास टूट गया, तो लोकतंत्र का क्या रह जाएगा? क्या यह मताधिकार का हनन और जनता के भरोसे के साथ धोखा नहीं है?