@PracticalSpy Anawshyak court case ka bhar nhi kam hoga ab jinko lagta hai general pareshaan karte hai to inhe door hi kar de saare vivad hi khatam phir kisi ko kisi se dar nahi hoga.
भेदभाव खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका
सामान्य वर्ग और आरक्���ित वर्ग के लिए अलग-अलग शैक्षिक संस्थान खोल दो
न तो भेदभाव होगा और न ही टकराव 👍
सहमत हैं तो रिपोस्ट और शेयर करें
@VoiceOfBrahmins सामा���्यतः शादी ब्याह के निर्णय में परिवार में माता पिता दादा दादी परिवार जन सब मिलकर तय करते हैं
अपना जीवन कैसे जीना है ये हर परिवार की उनकी खुद की निजता होतीहै
किसी भी दूस���े ब्यक्ति को हस्तक्षेप करना का अधिकार ना धर्म देताहै ना संविधान।
असंवैधानिक करतूत करनेवालों पर कार्रवाई हो
@jpsin1 Samanta ke adhikar ka ullanghan hai isse to jaativad aur badhega samajik sauhard samnjsya ki bhavna samapt hogi jaayivad ki jade gahri hongi abhi ham sab helping nature ke saath the
टिकट दोगे जाति देखकर,
मंत्रालय दोगे जाति देखकर,
आरक्षण दोगे जाति देखकर,
नौकरी दोगे जाति देखकर,
टेंडर दोगे जाति देखकर,
मुकदमा लिखोगे जाति देखकर,
राष्ट्रपति बनाओगे जाति देखकर और यदि सवर्ण अपने ���क या बचाव के लिए आवाज़ उठाये तो जाति��ादी है !!
#NoUGCRollBack_NoVote...See More
ये कहानी सिर्फ विष्णु तिवारी की नहीं है ,
कितने विष्णु “राम” बनकर वनवास भोग रहे होंगे ..
क्या यह एक उदाहरण काफ़ी नहीं है
क्या UGC में भी ऐसा ना होगा
विष्णु तिवारी को झूठे SC/ST Act के आरोप से निर्दोष होकर भी जवानी के 20 साल जेल में बिताने पड़े।
और पूरा जीवन बर्बाद हो गया। विष्णु तिवारी का यह केस UGC के लिए उदाहरण है कि कैसे कानून का दुरुपयोग होता हैं
जागो ��ोने बालो,नहीं तुम्हारी आने बाली पुश्तें जेल में भी ना सो पाएंगी !
@garvirawat Hamare shastron me bhi karm ko pradhanta di gyi hai man liya padhai likhai business aur majdoori se sampannta aati hai magar puja paath aur vrat tyouhar ka virodh kyon ? Puja paath vrat tyouhar manate huye bhi sampann huya ja sakta hai 🙏🏻
सरकारी व्यवस्था की पोल खुलने पर शिक्षक का निलंबन कर देना, समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि सवाल उठाने वाली आवाज़ को दबाना है।
जी हाँ, शासन की तरफ से पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन सवाल यह है कि व��� धमतरी के उस स्कूल में पहुँची क्यों नहीं? 21 बच्चों के पास सिर्फ 8 फटी किताबें होना यह साबित करता है कि कहीं न कहीं लापरवाही हुई है।
अब सवाल ये हैं:
1. जांच किसकी होगी? किताबें गईं कहाँ? भंडारण से लेकर वितरण तक, जवाबदेह कौन है?
2. न्याय किसके साथ है? उस शिक्षक का जिसने बच्चों का हक दिल���ाने की कोशिश की, या उस व्यवस्था का जो अपनी कमी छुपाना चाहती है?
3. समाधान क्या है? निलंबन थमाना नहीं, बल्कि हर बच्चे के हाथ में किताब थमाना असली हल है।
मांग :
· शिक्षक ढालू राम साहू जी का तुरंत निलंबन वापसी।
· बच्चों तक तत्काल पूर्ण पुस्तकों की आपूर्ति।
· लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
सच्चाई दबाने से समाधान नहीं होता। बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है।
सरकारी व्यवस्था की पोल खुलने पर शिक्षक का निलंबन कर देना, समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि सवाल उठाने वाली आवाज़ को दबाना है।
जी हा���, शासन की तरफ से पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन सवाल यह है कि वे धमतरी के उस स्कूल में पहुँची क्यों नहीं? 21 बच्चों के पास सिर्फ 8 फटी किताबें होना यह साबित करता ���ै कि कहीं न कहीं लापरवाही हुई है।
अब सवाल ये हैं:
1. जांच किसकी होगी? किताबें गईं कहाँ? भंडारण से लेकर वितरण तक, जवाबदेह कौन है?
2. न्याय किसके साथ है? उस शिक्षक का जिसने बच्चों का हक दिलवाने की कोशिश की, या उस व्यवस्था का जो अपनी कमी छुपाना चाहती है?
3. समाधान क्या है? निलंबन थमाना नहीं, बल्कि हर बच्चे के हाथ में किताब थमाना असली हल है।
मांग :
· शिक्षक ढालू राम साहू जी का तुरंत निलंबन वापसी।
· बच्चों तक तत्काल पूर्ण पुस्तकों की आपूर्ति।
· लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
सच्चाई दबाने से समाधान नहीं होता। बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है।
@ShashiSimply@Deepeshpatel87 Samsya ka ye kaisa samadhan kiya gya ki nilamban thama diya books ki vyavastha karni chahiye thi aur shashan ki taraph se to prayapt books uplabdh karayi jati hai kisi ne laparwahi ki hai
निलंबन नहीं, समाधान चाहिए
एक शिक्षक ने अपने स्कूल के 21 बच्चों के पास फटी-पुरानी सिर्फ 8 किताबें देखीं। उन���े भविष्य की चिंता में उन्होंने इस सच्चाई को वाट्सऐप स्टेटस के जरिए उजागर किया।
जवाब में शिक्षक ढालू राम साहू जी को निलंबित कर दिया गया।
· समस्या पैदा करने वाले नहीं, बल्कि समस्या उजागर करने वाले को सज़ा?
· क्या शिक्षा का अधिकार (RTE Act) सिर्फ कागजों तक सीमित है? भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21A 6-14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है.
· क्या शिक्षकों की आवाज़ दबाना, बच्चो�� की शिक्षा से ज़्यादा ज़रूरी है?
हमें जवाब चाहिए:
1. शिक्षक ढालू राम साहू जी का निलंबन तुरंत वापस लिया जाए।
2. धमतरी जिले के उस स्कूल और ऐसे ही हर स्कूल के हर बच्चे को तुरंत पूरी किताबें मुहैया कराई जाएं।
3. एक पारदर्शी जांच हो कि आखिर बच्चों तक बुनियादी संसाधन क्यों नहीं पहुंच पा रहे।
#शिक्षक_के_साथ_न्याय_चाहिए
#हर_बच्चे_को_किताब_चाहिए
@ChhattisgarhCMO @cgeducation @dharmtari_gov
@DrMohanYadav51 स्कूल अतिथि शिक्षक पात्रता एवं चयन परीक्षा दोनों ही पास करली अब उन्हें और कौन सी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी जिससे वह अपनी योग्यता साबित कर सकें और उन्हें नियमिती कारण की मिल सके