नफ़रतें बेचने वालों की भी मजबूरी है-
माल तो चाहिए दूकान चलाने के लिए।
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किन ज़मीनों पे उतारोगे अब इम्दाद का क़ह्र
कौनसा शह्र उजाड़ोगे बसाने के लिए।
~शकील जमाली
@Shakeeljamali58
हथेली पर न अपनी जान रक्खो
हमारी जान अपना ध्यान रक्खो
हमारे दुश्मनों के साथ घूमो
मगर इंसान की पहचान रक्खो
उसी चेहरे से ताबानी मिलेगी
उसी चेहरे पे अपना ध्यान रक्खो
ग़ज़ल की शायरी करने लगोगे
हमें दो-चार दिन मेहमान रक्खो
~शकील जमाली
@Shakeeljamali58
जान लेता है और जान लेकर मिरा शुक्रिया तक नहीं बोलता-
उसका भगवान क्या,मेरे हक़ में तो मेरा ख़ुदा तक नहीं बोलता.
हुस्न ही हुस्न है सर से पा तक वो शोला बदन हुस्न ही हुस्न है-
मेरी क्या हैसियत,उसके आगे कोई आइना तक नहीं बोलता.
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✍️ Shakeel Jamali
@Shakeeljamali58
नेकनामी है बस इक इल्ज़ाम तक
डूब जाएगा ये सूरज शाम तक
ज़िंदगी ने ताक़ पे रखवा दिया
आशिक़ी जैसा ज़रूरी काम तक
मुझको बे-आराम करने के लिए
उस ने अपना तज दिया आराम तक
याद रखना है हर इक दुश्मन का नाम
और नहीं मुट्ठी में दो बादाम तक
~Shakeel Jamali
@Shakeeljamali58
नेकनामी है बस इक इल्ज़ाम तक
डूब जाएगा ये सूरज शाम तक
ज़िंदगी ने ताक़ पे रखवा दिया
आशिक़ी जैसा ज़रूरी काम तक
याद रखना है हर इक दुश्मन का नाम
और नहीं मुट्ठी में दो बादाम तक
Shakeel Jamali
स्वागत:#नई_आमद📘
शदीद गर्मी में कैसे निकले वो फूल चेहरा
सो अपने रस्ते में धूप दीवार हो रही है
("धूप दीवार":पुस्तक से)
#शकील_जमाली@Shakeeljamali58
"आर्ट विरासत" की जानिब से संदर्भिक
संग्रह का रस्म-ए-इजरा दिल्ली में होगा
(दिनांक 04 अक्टूबर, 2025 को
शाम 3 बजे से-शाम 7 बजे)↕️