मणिपुर से आ रही मह��लाओं के खिलाफ यौन हिंसा की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। महिलाओं के साथ घटी इस भयावह हिंसा की घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। समाज में हिंसा का सबसे ज्यादा दंश महिलाओं और बच्चों को झेलना पड़ता है।
हम सभी को मणिपुर में शांति के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए हिंसा की एकस्वर में निंदा करनी पड़ेगी।
केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री जी आखिर मणिपुर की हिंसक घटनाओं पर आंख मूंद कर क्यों बैठे हैं? क्या इस तरह की तस्वीरें और हिंसक घटनाएं उन्हें विचलित नहीं करतीं?
यह देख कर बहुत दुःख हुआ कि कल जब PM मोदी अमेरिका के न्यू��ॉर्क शहर पहुंचे तो उनकी अगवानी के लिए न तो बाइडेन सरकार का, और न ही वहां की आर्मी का कोई बड़ा अधिकारी आया. जबकि राष्ट्रपति ओबामा और डोनाल्ड ट्रम्प के भारत आगमन पर मोदी जी स्वयं एयरपोर्ट पर उन्हें लेने के लिए पहुंचे थे.
आपको शायद याद हो कि ��ब पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह जी अमेरिका की राजकीय यात्रा पर थे, तब उनके पहुंचने पर अमेरिका द्वारा उन्हें ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ दिया गया था.
और यह तो सर्वविदित है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू जी इकलौते भारतीय प्रधानमंत्री हैं जिन्हें दो बार एयरपोर्ट पर लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति पहुंचे थे. पहली बार 1949 में राष्ट्रपति ट्रूमन पंडित नेहरू की एयरपोर्ट पर अगवानी करने आए और फिर 1961 में तत्कालीन राष्ट्रपति केनेडी आए और वहां से पंडित नेहरू और प्रेसिडेंट केनेडी ने एक साथ उनके आधिकारिक हवाई जहाज़ 'एयर फ़ोर्स-1’ में वॉशिंगटन तक की यात्रा की.
शायद यह बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि पंडित नेहरू इकलौते ऐसे वैश्विक नेता हैं जो 1956 में तत्कालीन राष्ट्रपति आयज़ेनहॉवर के फार्महाउस में उनके ‘व्यक्तिगत अतिथि’ के रूप में रुके थे.
अमेरिका और चीन की सर्वविदित कट��ता के बावजूद, अभी हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री ऐंटनी ब्लिंकेन खुद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहुंचे थे.
आपको पंडित नेहरू की ये स्पीच ज़रूर सुननी चाहिए जो उन्होंने अमेरिका पहुंचने पर दी थी. तब समझ में आएगा कि एक विश्वस्तरीय राजनेता का आचरण क्या होता है.