हमें बताया जा रहा था कि भारत की बेहाल अर्थव्यवस्था की वजह अमेरिका-ईरान की जंग है। हर महंगाई, हर गिरावट और हर परेशानी का दोष सरकार की नीतियों पर नहीं, पश्चिम एशिया के तनाव पर था।
अब जब जंग खत्म हो गई है, तो मोदी जी का बहाना भी खत्म हो जाना चाहिए।
क्रूड ऑयल के दाम कम होंगे। सप्लाई चेन सामान्य होंगी। मांग स्थिर होगी। स्वाभाविक रूप से, इसका फायदा देश के ग्राहकों को भी मिलना चाहिए।
मतलब यह कि पेट्रोल, डीज़ल, CNG, LPG और LNG के दामों में की गई बढ़ोतरी को वापस लेकर कटौती की जानी चाहिए।
क्या इस खुशखबरी का ऐलान मोदी जी फ्रांस से ही करेंगे? या फिर देश को उनके वापस लौटने का इंतज़ार करना पड़ेगा?
अमरीका की जिस कथित प्रतिष्ठित मैगज़ीन @TheAtlantic के पन्नों को पढ़कर एक मीडिया हाउस ज्ञान दे रहा था कि ईरान में रोटी EMI पर मिल रही है वहां ये भी छपा है कि मोदी सरकार ने चुनाव जीतने के लिए नफ़रत को हथियार बनाया और संविधान की बुनियाद को खोखला किया !जा रहा है।क्या उस मीडिया हाउस में हिम्मत है इस सुर्खी को चला सकें?
कांग्रेस सरकार के वक्त भारत के आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं किया गया!
जब अमरीका ने डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया था तो उसे दो टूक जवाब मिला था।
#GenZ देखो 2014 से पहले का भारत!
अमेरिकी विदेश मंत्री से फ़ोन पर बातचीत के बाद
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि तीन भारतीयों के मारे जाने को लेकर भारत के भारी विरोध को दोहराया। व्यापारिक जहाज़ों पर जानलेवा हमले न्यायोचित नहीं
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा हर जहाज़ को अमेरिकी सेना का आदेश मानना अनिवार्य। उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“जहाज़ किसी भी देश के झंडे वाला क्यों न हो अमेरिका कैसे हमले कर रहा है? क्या ये सैन्य जहाज़ थे? अमेरिकी हमले ग़ैरक़ानूनी हैं। ट्रंप की दादागिरी है। इनमें भारतीयों की जान गई है। हमारे देश के प्रधानमंत्री ने एक शब्द तक नहीं बोला है” : @asadowaisi
विदेश मंत्री जयशंकर मार्को रूबियो से बात करके ये जताने की कोशिश कर रहे थे कि उन्होंने अमेरिकी सेना द्वारा भारतीयों के मारे जाने पर विरोध किया है।
लेकिन मामला तो उल्टा दिख रहा है। रूबियो ने जयशंकर को हड़का दिया है कि चुपचाप अमेरिकी फ़रमानों का पालन करो और वहाँ से तेल लाने की कोशिश मत करो।
क्या विदेश मंत्री अब अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रकाशित इस ख़बर का खंडन करेंगे, इसके ख़िलाफ़ विरोध जताएंगे....
अमेरिका जब कहता है तेल ख़रीदो - तो हम ख़रीदते हैं
जब कहता है बंद करो - को हम बंद कर देते हैं
और ये हमारे विदेश मंत्री कह रहे हैं।
इससे शर्मनाक और क्या होगा ?
क्या हम अब एक संप्रभु राष्ट्र हैं या नहीं ?
नेपाली नागरिक अपने देश का राजदूत बनने के लिए खुद को नामांकित कर सकते हैं। आवेदक के लिए ग्रेजुएट होना और आपराधिक रिकॉर्ड साफ़ होना ज़रूरी है।
@YeshiSeli की रिपोर्ट
ऐसा तो भारत में भी होना चाहिए 😅
2013 में जब भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के साथ अमेरिका में अपमानजनक व्यवहार हुआ था, तब कमलनाथ ने कहा था—
"भारत कोई Banana Republic नहीं है। अमेरिका को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।"
—
आज भारतीय मछुआरे अमेरिकी कार्रवाई में मारे गए हैं।
अब सवाल उन लोगों से है जो हर बात पर राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट बांटते हैं।
क्या ट्रंप प्रशासन से माफी मांगने की हिम्मत है?
या राष्ट्रवाद भी अब पार्टी देखकर तय होगा?
#ModiMuktBharat