“The pessimist sees difficulty in every opportunity. ...
“Don't let yesterday take up too much of today.” — ...
“You learn more from failure than from success.
भारत की राजनीति ऐसी होगी हमने कल्पना नहीं की थी…
ये दिल्ली पुलिस का जवान भी किसी का भाई होगा किसी का बेटा होगा
यह सिर्फ़ वर्दी लहूलुहान नहीं है बल्कि देश का लोकतंत्र घायल हुआ है !!
अपनी राजनीति के जवानों को बलि की वेदी पर मत चढ़ाओ!!
भारत ने तेरे जैसे लोगों को शरण, भारत के मामले में दखल देने के लिए नहीं दिए हैं l
पाकिस्तान से आ कर होशियारी झाड़ रहा है बेवकूफ़ कहीं का - शक्तिमान, भक्तिमान बन कर संघी चाटुकारिता कर रहा है l
@grok@RahulGandhi@kharge
देखिए, चुनावी हिंदू की असलियत!
कभी सावन में तो कभी पितृपक्ष में Non-Veg,
चुनावी मौसम में धर्म का ढोंग करने वालों का दोहरा चरित्र अब जनता से छिपा नहीं है।
#ShameOnRahulGandhi
राहुल गांधी पूछते हैं, मोदी हारते क्यों नहीं?
उनके ख़िलाफ़ Anti-Incumbency क्यों नहीं है?
इस सवाल का जवाब SIR में नहीं, इस भाषण में है।
राहुल गांधी को भी सक्रिय राजनीति में लगभग 25 साल हो चुके हैं।
#नरेंद्रमोदी को भी प्रशासन और शासन में लगभग 25 साल हो चुके हैं।
लेकिन इन 25 वर्षों की राजनीति में फर्क साफ़ दिखाई देता है।
एक तरफ़ सेवा है, दूसरी तरफ़ मेवा है।
जनता सिर्फ़ इंस्टाग्राम की रील नहीं, नीयत और काम का हिसाब करती है।
और शायद यही वजह है कि एक नेता 25 साल बाद भी जनता के बीच अपनी पकड़ बनाए हुए है, जबकि दूसरा आज भी ये समझने में लगा है कि आखिर मोदी हारते क्यों नहीं।
मैं सभी राष्ट्रवादियों से हाथ जोड़कर निवेदन करूँगी की आप सभी 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर जाकर तिलचट्टों को काबू करो क्योकि यह कीड़े अब शासन प्रशासन के काबू से बाहर हो रहे है।
तो अब सभी राष्ट्रवादियों को एक होकर इन तिलचट्टो को उनकी औक़ात दिखाने की जरूरत है।🧐
चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च के बाद BJP की प्रेस कांफ्रेंस हुई. लोकसभा सदस्य संबित पात्रा ने कहा, "हमारी मदद ज्ञानेश जी नहीं कर रहे हैं. हमारी मदद गणेश जी कर रहे हैं."
देखें, इसी क्रम में संबित पात्रा ने भारत की जनता के बारे में क्या कहा.
दलित युवक दीपक गौतम प्लाट पर मकान बना रहा था, उससे 20 लाख की रंगदारी मांगी गई, नहीं देने पर गोलियों की बौछार कर दी गई, 🔥
वीडियो देखिए लग रहा है, जैसे युद्ध हो रहा है, नान स्टॉप फायरिंग की जा रही है, दलितों के लिए उत्तरप्रदेश कब्रगाह बनता जा रहा है,
घटना मथुरा के बाजना की है, आरोपी लगभग 50 की संख्या में आए और पिस्टल राइफल से गोलियां दागी, लोगों ने ईंटों के पीछे छुपकर जान बचाई।
जंतर-मंतर पर महिला कांस्टेबलों के साथ दारू के नशे में बदतमीजी और मारपीट!
जो महिला पुलिस सबकी सुरक्षा के लिए खड़ी हैं, उनके साथ ये सुलूक❓
विरोध नहीं, खुली गुंडागर्दी है!
जंतर मंतर पर वामपंथियों और फर्जी पत्रकारों से तंग आया वकील, पुलिस वालों के अपमान पर भड़का
कॉकरोचों को भी दिया चैलेंज, कहा- मेरे सामने गाली दे कर दिखाओ
@Anurragmishra की रिपोर्ट
प्रेमानंद महाराज जी अंदर टूट गए.☹️
अगर प्रेमानंद महाराज जी को कुछ हुआ तो इसका जिम्मेदार वाे सभी ट्रॉलर होगें
जो बिना तथ्यों के साथ बिना किसी सटीक खबर के प्रेमानंद महाराज जी को ट्रॉल कर रहे हैं.
इसमें सबसे पहला नाम 1/2
साधु महाराज ने हिंदुओं को चेताया 🔥🔥
योगी जी की वजह से मुस्लिम चुप है
यदि सत्ता गई तो उनकी तलवारें निकालेंगी
ना राम मंदिर बचेगा
ना कृष्ण मंदिर मंदिर
ना काशी का मंदिर बचेगा
क्या योगी जी के चुनाव हारने से इतनी मुसीबत आएंगी?
महोदय अपनी राजनीति के लिए up और बिहार के लोगों का अपमान न करें। हमारे राज्य में कभी भी ऐसी घटना नहीं घटी। up और बिहार वालों से ज्यादा सभ्य आपको कहीं नहीं मिलेंगे।
इन्हें लोकतंत्र की चिंता नहीं है, हार की खीज है और जनादेश का अपमान करना है।
सोचिए 19 दल, 3 किलोमीटर का मार्च, और माँग क्या? कि देश को बैलेट पेपर के ज़माने में वापस ले चलो।
न मशीन चलेगी, न मतदाता सूची की सफ़ाई
खड़गे जी की तीन 'नॉन-नेगोशिएबल' माँगें, जरा आप सुनिए...
"ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को रद्द करना और बैलट पेपर पर चुनाव कराना।"
मतलब वही दौर, जब 80-90 के दशक में बिहार और यूपी में मतपेटियाँ लूटी जाती थीं, दूसरों के नाम पर वोट पड़ते थे। उसी दौर को वापस लाना है?
फ़र्ज़ी वोट रोकने के लिए चुनाव व्यवस्था में लगातार सुधार हुए हैं। EVM ने बूथ लूट पर लगाम लगाई, और फ़ोटो वोटर आईडी व सूची की जाँच ने फ़र्ज़ी मतदाताओं पर रोका। S.I.R. भी सुधार की इसी कड़ी का हिस्सा है।
मृत, डुप्लिकेट और जगह छोड़ चुके नाम सूची से हटें। जब सूची ही साफ़ नहीं होगी, तो साफ़ चुनाव कैसे होगा? और SIR रद्द करने की माँग का मतलब क्या है, कि गड़बड़ सूची पर ही चुनाव होते रहें?
तेलंगाना, हिमाचल और झारखंड में सरकारें बनीं। जीतें तो जनादेश, हारें तो मशीन और सूची में खोट?
यह दोहरा रवैया नहीं तो क्या है?
सुधार का रास्ता आगे जाता है, पीछे नहीं।
जनादेश का सम्मान कीजिए, सुधार का विरोध नहीं।
विधायका जी वाराणसी में है
बिहार वालों इनको फिर से विधायक बनाना है, भले ही आप पानी में रहो, भले ही महंगाई से कमर टूट जाए लेकिन वोट इनको ही देना है।
आपके वोट देने से ये फिर से विधायक बनेगी फिर से मौज करेगी।
मैं तो कहता हूं इनको वोट....Read News