The Bihar government has historically delayed regular recruitments for physiotherapists due to prolonged bureaucratic limbo.
It’s high time, vacant seat must be filled as soon as possible.
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अहमदाबाद में प्लेग फैला।
मजदूर शहर छोड़कर भागने लगे। फैक्ट्रियां बन्द होने का खतरा था। सेठो ने दांव खेला- मजदूरी दोगुनी कर दी।
जो केवल पेट और तन भर का कमाते थे, उन्हें उम्मीद दिखी। रुक गए, जान पर खेलकर। चिमनियों से धुंआ नही रुका। प्लेग के बावजूद अहमदाबाद की मिलें चलती रही।
और जब प्लेग खत्म हो गया,
मजदूरी वापस घटा दी गई।
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मजदूरों ने विरोध किया। गांधी से सहायता मांगी। गांधी ने मलिकों बात की। वे नही माने, तो मजदूरों के साथ बैठकर उन्होंने हड़ताल का आव्हान किया।
मिलें रुक गयी।
अब सेठों ने फिर दांव खेला।
जो मजदूर, हड़ताल में शामिल थे, उन्हें नौकरी से निकालने लगे। मजदूर डर गए। हड़ताल से खिसक कर वापस काम पर लौटने लगे। अब गांधी ने वो किया..
जो अनोखा था।
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अनशन पर बैठ गए। सेठों के खिलाफ नही, अपने ही उन समर्थकों के खिलाफ, जो मिलो में जाकर वापस काम करने लगे थे। अब मजदूरों को शर्म आयी।
एक एक कर सारे लौट आये।
गांधी ने अनशन तोड़ा।
अहमदाबाद की मिलो की वो हड़ताल, ऐतिहासिक थी। चंपारण में किसानों की लड़ाई लड़ने के बाद, गांधी का यह दूसरा समर था- मजदूरों के लिए।
अपने ही देशवासी सेठों से लड़ गए। धनपतियों को झुकना पड़ा। मजदूरी की नई दरें तय हुई।
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नेहा का यह उदास मुखमण्डल देखकर बुरा लगा।
जिनके संघर्ष के शामिल होने गयी, उन्ही में से किसी ने मुंह पर स्याही फेंक दी। कारण पूछने पर वामपन्थी, देशद्रोही, उमर खालिद समर्थक होने के इल्जाम धर दिये।
लेकिन आंदोलन, एक्टिविज्म, न्याय की लड़ाई में ऐसा अक्सर होता है। कि जिसके लिए आप लड़ते हैं, वही कम्प्रोमाइज्ड हो जाता है।
कारण भय, भ्रम, या लोभ- कुछ भी हो, मगर यह लड़ने वाले के बिलीफ सिस्टम को तोड़ता है।
उदास करता है।
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कभी गांधी ने इसका स्वाद चखा, आज नेहा ने चखा है। लेकिन इस युवा लड़की ने जब संघर्ष, औऱ नेतृत्व की राह, राह चुनी है, तो उसे ऐसे बिट्रियल का से निराश नही होना चाहिए।
कर्मण्येवाधिकारस्ते, मा फलेषु कदाचनम!! 1918 में अहमदाबाद के गांधी की तरह, अपने भीतर की रोशनी पर, अपने उद्देश्य की पवित्रता पर यकीन रखकर वह आगे बढ़ती रहे। यही संदेश है।
और शुभकामनाएं हैं।
02/08/2026 को Better society द्वारा आयोजित मेधा सम्मान समारोह 2026 का संयुक्त रूप फीता काटकर शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि श्री राजू कुमार ,ADMO बेगूसराय, मो०अतहर हुसैन,BEO चेरियाबरियारपुर एवं विभिन्न विद्यालयों से आये प्रधानाध्यापक एवं अन्य..💝🤝🥰
ये हमारा सिस्टम है और सामने ना झुकने वाला और जाग चुका भारत का नौजवान . जिसने इस वीडियो को रीट्वीट ना किया उस से दोस्ती ख़त्म . भारत में ये हर किसी को दिखनी चाहिए . इसने कोई गलती की है तो गिरफ्तार करते लाठीचार्ज कौन से नियम क़ानून तहत कर रहे हो वो भी तब जब वो खड़ा है ?
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World Blood Donar Day
हर साल 14 जून को दुनिया भर में विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है,ये सिर्फ एक तारीख नहीं है,बल्कि उन लाखों लोगों को सलाम करने का दिन है जो बिना किसी स्वार्थ के अपना खून दान करके किसी और की जिंदगी बचाते हैं।
#worldblooddonarday