கடந்த 10 மணி நேரத்தில் 10 லட்சத்திற்கும் அதிகமான தலைவர்கள் ��திவு செய்து, நமது அரசியல் இயக்கம் சாதனைப் படைத்துள்ளது. இந்த மகத்தான வரவேற்பு, நாம் ஒன்றாகக் கொண்டிருக்கும் இலட்சியத்தின் மீதும், சமூக மாற்றத்திற்கான நமது பயணத்தின் மீதும் மக்கள் வைத்துள்ள நம்பிக்கையை வெளிப்படுத்துகிறது.
இந்த இயக்கத்தின் மீது நம்பிக்கை வைத்து இணைந்த ஒவ்வொரு நபருக்கும் எனது ��னமார்ந்த நன்றியைத் தெரிவித்துக் கொள்கிறேன்.
https://t.co/bpwUirXkR4
Our political movement has achieved a milestone, with over 10 lakh leaders registering within just 10 hours. This extraordinary response is a powerful reflection of the growing belief in our shared vision and collective mission.
I extend my heartfelt gratitude to every individual who has placed their trust in this movement.
https://t.co/ZCljDx3Zgu
साध्वी ऋतंभरा जी के चरण ठाकुर-ब्राह्मण छूते हैं,
लेकिन संत होकर भी वे अपनी OBC मौर्य जाति के लिए खुलकर खड़ी हैं।
सवर्ण बच्चों को जेल भेजने वाले कानून के साथ भी खड़ी हैं।
काश हमारे सवर्ण नेता भी इतना ही साहस दिखा पाते
और अपने समाज के लिए खड़े होते।
या तो संतो को पूरी तरह से सभी राजनीतिक विषयों पर खुलकर अपना पक्ष रखना चाहिए या फिर हर विषय पर चुप ही रहना चाहिए। अगर आप संत हैं तो आप खुद को सेलेक्टिव नहीं रख सकते।
आप यह क्यों नहीं पूछते कि पिछले 15 वर्षों से हिंदू एकता के नाम पर आप जिस सरकार और जिस पार्टी का समर्थन कर रहे हैं उस सरकार ने हिंदू एकता को मजबूत करने के लिए कौन से कदम उठाए?
देश में घुसपैठियों की समस्या��ं हैं, UCC अब तक लागू नहीं हो पाया, जन���ंख्या नियंत्रण कानून अब तक नहीं बना, सरकारी सुविधाओं के अधिकतर लाभार्थी मुस्लिम हैं, OBC reservation मुस्लिमों को मिल रहा, वो जब चाह रहे दिल्ली जाम कर दे रहे, हमारे जुलूसों पर पत्थरबाजी हो रही, तरुण जैसे युवकों को मार दिया जा रहा तो हिंदू एकता कहां है? हिंदुओं को मजबूत करने के कौन से कदम उठाए गए?
दिलीप मंडल जिसने इस धर्म को, हिंदू देवी देवताओं को पानी पी-पीकर गालियां दी उसे सरकार ने अपना सलाहकार बना रखा ��ै — संत समाज इसपर कुछ क्यों नहीं बोलता? चंद्रशेखर जैसे लोग जो हिंदुओं में फूट डालने का काम कर रहे हैं, जो एक वर्ग को सवर्णों के खिलाफ भड़का रहा है उसे भाजपा ने ही बढ़ाया, तब यह संत समाज कहां था?
आज जब सवर्णों ने अपने अधिकारों की बात की तो तुरंत यह संत समाज उठ कर आ गया और हमें बताने लगा कि हिंदू एकता खतर�� में आ जाएगी।
हिंदू एकता तब खतरे में क्यों नहीं आती जब सरकार योग्यता के पहले हमारी जाति पूछती है? हिंदू एकता तब खतरे में क्यों नहीं आती जब हमारी बेटियों को भोग की वस्तु बताया जाता है? उससे बड़ी बात हिंदू एकता तब खतरे में क्यों नहीं आती जब भगवान राम को सुप्रीम कोर्ट में हत्यारा बताया जाता है? जातिगत जनगणना से कौन सी हिंदू एकता मजबूत की जा रही थी?
आप यह क्यों नहीं पूछते कि ऐसी परिस्थिति उत्पन्न होने का कारण क्या है? वह समाज जो इतने वर्षों से चुप रहा उसे आज सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है?
हिंदू एकता अगर सच में चाहिए तो वह सिर्फ वोटों तक सीमित नहीं रह सकती, उसे समाज में दिखाया भी जाना चाहिए। अगर बात करनी है तो सबकी करो या फिर चुप ही रहिए।
खतरे में हिंदू नहीं है।
खतरे में भाजपा की सत्ता है।
खतरे में कुछ लोगों का स्वार्थ है।
खतरे में गद्दारों की साजिश है।
इसीलिए भावनाओं का नाटक किया जा रहा है।
बहकावे में मत आओ।
डटकर UGC का विरोध करो।
आदरणीय श्री @narendramodi Ji, श्री @AmitShah Ji यूजीसी रेगुलेशंस ने युवाओं को एक भयावह जातिवाद की अग्नि में झोंक दिया है, त्वरित उपचार और कारगर समाधान ��हीं हुआ तो यह खाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जाएगी।
#UGC #UGCRegulations