आज एक न्यूज़ कही दब सी गई
फिरोजपुर जिले के एक गांव में 6 साल की नाबालिग बच्ची से बलात्कार का मामला सामने आया है। पीड़ित लड़की की हालत गंभीर होने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है…गाँव के ही जैसम नाम के लड़के ने 6 साल की लड़की को क़ब्रिस्तान में ले जाकर उसके साथ ऐसी घिनौनी हरकत की….अब जैसम जिस भी जाति का हो सजा उसको ऐसी मिले के रूह काँप जाये
20 वर्षों से डायबिटीज झेल रहीं 65 वर्षीय महिला जो दिन में दो बार इन्सुलिन लेने को विवश थीं, आज इस रोग से पूर्णतः मुक्त होकर सामान्य सम्पूर्ण आहार ले रही हैं | जी हाँ मिठाई भी ।।
डाक्टरों ने उस महिला को इन्सुलिन और अन्य ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां भी बंद करने की सलाह दी है ।
और एक ख़ास बात । चूंकि केवल दो सप्ताह चलने वाला यह उपचार पूर्णतः प्राकृतिक तत्वों से घर में ही निर्मित होगा, अतः इसके कोई दुष्प्रभाव होने की रत्ती भर भी संभावना नहीं है ।
अतः निवेदन है कि इस उपयोगी उपचार को अधिक से अधिक प्रचारित करें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें |
देखिये कितना आसान है इस औषधि को घर में ही निर्मित करना |
आवश्यक वस्तुएं–
1 – गेंहू 100 gm.
2 – वृक्ष से निकली गोंद 100 gm.
3 - जौ 100 gm.
4 - कलौंजी 100 gm.
( बनाने की विधि )
ऊपर बताई हुई सभी सामग्री को 5 कप पानी में रखें । आग पर इन्हें 10 मिनट उबालें । इसे स्वयं ठंडा होने दें । ठंडा होने पर इसे छानकर पानी को किसी बोतल या जग में सुरक्षित रख दें ।
( उपयोग विधि )
सात दिन तक एक छोटा कप पानी प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेना ।
अगले सप्ताह एक दिन छोड़कर इसी प्रकार सुबह खाली पेट पानी लेना । मात्र दो सप्ताह के इस प्रयोग के बाद आश्चर्यजनक रूप से आप पायेंगे कि आप सामान्य हो चुके हैं ...और बिना किसी समस्या के अपना नियमित सामान्य भोजन ले सकते हैं ।
जिस किसी को भी य़ह प्रॉब्लम हो उपयोग करे और आगे फॉरवर्ड करे साभार.. 🙏🙏
काफी लोग फायदा उठा सकते है....
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बाबर की पूरे खानदान की जानकारी हमे पढ़ाई गई लेकीन हमारे पूर्वज प्रभु राम जी के वंश की जानकारी किसी ने नहीं पढ़ाई आइए जानते हैं प्रभुजी के 39 पीढ़ियों की अदभुत दिव्य जानकारी
मौलवी जी को सुन कर,प्रभु-कृपा से मुझे फ़ारसी के मशहूर कवि मसीह थानेसरी जी की सैंकड़ों वर्ष पूर्व,सीता जी पर फ़ारसी में लिखी कविता याद आ गई जो नेशनल म्यूज़ियम में आज भी सुरक्षित है।
तन–श रा पैरहन उरियान् न दीदे
चू जान् अन्दर तन् ओ तन् जान् न दीदे।
تنش را پیرهن عریان ندیده
چو جان اندر تن و تن جان ندیده
सीताजी के कपड़ों ने भी उन्हें कभी कपड़ों के बिना नहीं देखा था।
जिस तरह आत्मा शरीर के अन्दर रहती है,लेकिन शरीर ने कभी आत्मा को नहीं देखा।
Even Sitaji ji’s clothes had never seen her without clothes, just as soul lives inside body,but the body has never seen the soul.