इस बार का चुनाव किसी व्यक्ति या पार्टी का चुनाव नहीं था, बल्कि ये चुनाव जनता के अस्तित्व का चुनाव था, संविधान और लोकतंत्र को बचाने और तानाशाह को सबक़ सिखाने का चुनाव था, और जनता ने ये काम बख़ूबी किया।
ये चुनाव जनता ख़ुद लड़ रही थी, और ये समझ रही थी, कि अगर देश, संविधान, लोकतंत्र और इंसानियत को अब नहीं बचाया गया तो सब ख़त्म हो जायेगा।
हालाँकि भाजपा नेता और ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी चुनाव जीतने के लिए झूठ, नफ़रत और विपक्ष को बदनाम करने के लिए जी जान लगा दिया, लेकिन इसके बावजूद उनका एक भी झूठ और नफ़रत काम न आ सका।
प्रधानमंत्री मोदी इस कदर बौखला गए कि वो विपक्ष के घोषणापत्र को मुस्लिम लीग की घोषणापत्र से तुलना करने लगे, चुनाव प्रचार में मोदी मटन, मंगलसूत्र, भैंस से लेकर ख़ुद को बायलॉजिकल साबित करने लगें।
इसके बावजूद लोगों ने बहुमत नहीं दिया और वो हार गए, कहाँ भाजपा 400 पार का सपना संजोए हुए थी, अबकी बार 400 पार का नारा दे रही थी उसे आज चार सौ पार करना तो दूर बल्कि ख़ुद के दम पर सरकार बनाना सपना हो गया।
ये चुनाव तानाशाही, भ्रष्टाचारी, सांप्रदायिक और इतिहास की सबसे झूठी मोदी सरकार और भाजपा के नफ़रती एजेंडे को हराने का भी चुनाव था, जनता ने भाजपा नेताओं को बतला दिया कि अब और धर्म के नाम पर गुमराह करना नहीं चलेगा, इसका सबसे बड़ा उदाहरण अयोध्या से भाजपा प्रत्याशी का हार ही है।
हो सकता है कि भाजपा अपने सहयोगी पार्टी से मिलकर किसी तरह गठबंधन की सरकार बना ले, लेकिन जनता ने उसे ऐसा सबक़ सिखाया है कि अगर वो दुबारा संविधान बदलने की, आरक्षण ख़त्म करने की, चुने हुए सरकार को गिराने की, धर्म के नाम पर लोगों को आपस में लड़वाने की बात करेगा तो उसे हमेशा जनता का डर बना रहेगा।
इंडिया गठबंधन भले ही सरकार न बना पाए, लेकिन ये इंडिया गठबंधन की बड़ी जीत है कि पूरा सिस्टम, गोदी मीडिया, चुनाव आयोग, ED, CBI, IT, NIA आदि के दबाव के बावजूद उनका प्रदर्शन अच्छा रहा, इंडिया गठबंधन और उसके तमाम नेताओं को इसके लिए मुबारक।
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देश के सबसे साफ शहर में गंदा पानी पीने से 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जिस शख्स पर लोगों को साफ पानी पिलाने का जिम्मा है वो सवालों को फोकट बता रहे हैं हमारे सवालों को "घंटे" में उड़ा रहे हैं @manishdekoder@GargiRawat@Abhinav_Pan@sanket
आर्काइव | गोलवलकर : जिसने देश को बांट दिया.
अपनी किताब 'नेशनहुड' में गोलवलकर बेहिचक हिंदू संस्कृति को फैलाने के प्रोजेक्ट की तुलना जमर्नी के यहूदी विरोध के साथ करते हैं. वे लिखते हैं, “नस्ल और संस्कृति को शुद्ध बनाए रखने के लिए जमर्नी ने यहूदियों का सफाया कर दुनिया को चौंका दिया.” “सर्वोत्तम रूप में नस्लीय गौरव वहां प्रकट हुआ. जमर्नी ने यह भी दिखाया है कि भिन्न भिन्न जड़ों वाली नस्लों और संस्कृतियों का एक हो जाना असंभव है. यह हिंदुस्तान के लिए एक अच्छा सबक है.”
गोलवलकर का जाति अत्याचारों का विश्लेषण आजकल के सोशल मीडिया के दक्षिणपंथी कमांडो के तर्कों से अलग नहीं हैं. उनका मानना था कि इस मुद्दे को बहुत अतिरंजित किया जा रहा है. उन्होंने लिखा, “पिछले कुछ सालों में अचानक, हिंदुओं द्वारा हरिजनों पर हमलों की रिपोर्ट समाचारपत्रों में दिखाई देने लगी हैं. “मुझे पक्का विश्वास है कि इस प्रकार की रिपोर्टिंग का उद्देश्य कुछ और ही है. कई बार तो खबर ही गलत होती है.” उन्होंने आगे कहा, “मुझे संदेह है कि यह कोई बाहरी साजिश है अन्यथा ऐसा कोई कारण नहीं है कि इस तरह के समाचारों को इतनी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाए.”
महिलाओं के बारे में उनका विचार था कि वे आधुनिकता के कारण गुमराह हो रही हैं. एक श्लोक का हवाला देते हुए वे कहते हैं कि “एक पवित्र महिला अपने देह को ढांकती है.” उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि “आधुनिक” महिलाएं मानती हैं कि “ज्यादा से ज्यादा लोगों के आगे अंगप्रदर्शन करना आधुनिकता है. कितनी गिरी हुई बात है.”
समानता की मांग उन्हें मजाकिया लगती थी. वे लिखते हैं, “अब महिलाओं के लिए समानता” और “पुरुष से स्वतंत्रता” का हल्ला मचाया जा रहा है.” अलग-अलग पदों पर लैंगिक आधार पर आरक्षण का दावा किया जा रहा है और इस प्रकार जातिवाद, सांप्रदायवाद, भाषावाद की सूची में एक और शब्द जुड़ गया है ‘सेक्सवाद’.”
संघ के भीतर गोलवलकर को जिस प्रकार के आभामंडल में रखा जाता है उसे भेद कर देखने से उनके ये वक्तव्य बीसवीं शताब्दी के शुरू में ऊपरी-मध्य-वर्ग के मराठी ब्राह्मण मर्द के टुच्चे पूर्वाग्रहों और कट्टरपंथी विचार लगते हैं. गोलवलकर ने अपने इन पूर्वाग्रहों को राष्ट्रवाद और फासीवाद की भाषाई चाशनी में लपेट कर पेश किया. डरावनी बात है कि हास्यास्पद से लगने वाले ये विचार आज भारतीय राजनीति और संस्कृति के शीर्ष पर विराजमान हैं.
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मुस्लिम पत्रकार का घर ढहाया, हिन्दू शख्स ने दी जमीन
◆ जम्मू में अधिकारियों ने सरकारी ज़मीन पर बने होने का हवाला देते हुए अरफ़ाज़ अहमद डैंग का घर गिरा दिया
Jammu Kashmir Muslim Journalist | #Kashmir