“इथेनॉल का माइलेज 30 फ़ीसदी कम होता है”
तेल कंपनी BPCL के बड़े अधिकारी अनुराग सरावगी का ये बयान ANI हैंडल से डिलीट करा दिया गया है!
किस लॉबी ने डिलीट कराया @nitin_gadkari जी?
(Video posted by @AjitSinghRathi)
यह सीरीज भारत-आयरलैंड मैत्री सीरीज थी।
इसका उद्देश्य आयरलैंड क्रिकेट को विश्व मानचित्र पर उभरने में मदद करना था। 2-0 से सीरीज हारकर हम इस उद्देश्य में सफल हुए।
हर चीज को खेल और प्रतिस्पर्धा की नजर से देखना सही नहीं है। इस सीरीज को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के एक महत्वपूर्ण प्रयास के तौर पर याद किया जाएगा।
राज शमानी का पॉडकास्ट देखा जिसमें रशियन Spy एजेंट Aliia Roza आई हुई थीं।
ये वही रशियन Spy हैं जो कभी पुतिन की सीक्रेट एजेंट के तौर पर भी काम किया करती थीं।
इन्होंने पॉडकास्ट में बताया कि
मुझे लोगों को हनीट्रैप में फंसाने की ट्रेनिंग मिली थी मैं किसी भी देश से खुफिया जानकारी निकलवा सकती थीं क्योंकि
मैं वहां के कई बड़े अफसर को अपने खूबसूरती के जाल में फंसा लेती थी और वो आसानी से सब बता देते थे।
सबसे बड़ी बात कि आलिया रोजा आजतक पकड़ी नहीं गई हैं, ये शातिर होने के साथ हॉट स्पाई मानी जाती हैं जो किसी को भी चुटकी में फंसा लेती थीं।
जो गाड़ियां अभी सड़क पर हैं उनके लिए उपयुक्त पेट्रोल की व्यवस्था नहीं है। जिस पेट्रोल की अभी व्यवस्था नहीं है वो गाड़ियां लॉन्च हो रही हैं। एक दिन ऐसा आएगा जब फ्लेक्स इंजन होगा, फ्लेक्स इंधन होगा, और दोनों का मिलन होगा। कितना सुंदर सपना अपना जीवन होगा।झिलमिल सितारों का आँगन होगा। रिमझिम बरसता सावन होगा।
जो लोग यह तर्क दे रहे हैं कि भाजपा के भी सैकड़ों कार्यकर्ता TMC के शासन में मारे गए थे, वो यह न भूलें कि इसी राजनीतिक हिंसा के खिलाफ जनता ने भाजपा को चुनावों में इतना भारी बहुमत देकर विजयी बनाया।
राज्य में नई सरकार का गठन हो चुका है, मुख्यमंत्री शपथ ले चुके हैं। बिना किसी लाग-लपेट और किंतु-परंतु के यही कहा जाएगा कि भाजपा के शासन में विपक्षी पार्टी के प्रमुख नेता पर हमला हुआ है। कोई भी तर्क इसकी गंभीरता को कम नहीं कर सकता।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सभी को सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। लोकतंत्र में विरोध की पूरी गुंजाइश है, असहमति भी हो सकती है, लेकिन हिंसा, पत्थरबाजी और इस तरह की भीड़ आधारित राजनीति किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती। राजनीतिक असहमति को कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर ही व्यक्त किया जाना चाहिए।
यदि किसी जनप्रतिनिधि की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही हुई है, तो इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
Google which is cash surplus, just announced an additional capital raise of $80 bn.
Google annual profit is $160 bn, last quarter $62 bn, and market cap $4.5 trillion. That is close to total profits and market cap of all Indian listed companies put together.
It’s a wake up call to all companies to invest into the future, whatever the present maybe.
Now that IPL is done and dusted, time for India to focus on business of business.
अगर ये बात सच निकलती है, तो यह कंपनी इतिहास का मदर ऑफ ऑल घोटाला साबित हो सकता है।
राजेश एक्सपोर्ट्स नाम की एक बहुत बड़ी कंपनी है, जिसका मुख्य काम गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी कारोबार से जुड़ा है। इस कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता हैं।
मामला यह है कि SEBI ने इस कंपनी और राजेश मेहता पर अपनी एक अंतरिम जांच में बड़ा आरोप लगाया है।
आरोप है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच, यानी पांच वर्षों की अवधि में, लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के consolidated revenue को लेकर गलत जानकारी दी। यह कंपनी के कुल revenue का लगभग 97- 99% हिस्सा बताया जा रहा है। साथ ही फंड का गलत इस्तेमाल का भी आरोप है।
अब सोचिए, यह किस स्तर की संभावित धोखाधड़ी हो सकती है।
अब इस कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट यह है कि इसी राजेश एक्सपोर्ट्स में LIC की 10.8% हिस्सेदारी है।
आज जैसे ही यह खबर सामने आई, राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 5% लोअर सर्किट पर पहुंच गया।
इसका असर LIC के शेयर पर भी पड़ा और वह 1% भी नीचे चला गया।
अगर जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो फिर एक बहुत बड़ा कॉरपोरेट फ्रॉड होगा ही साथ ही देश की वित्तीय निगरानी व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। इतने बड़े स्तर पर इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर वर्षों तक नजरों से कैसे बची रही, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
LIC एक सरकारी कंपनी है, जिसमें देश के करोड़ों लोग भरोसे के साथ निवेश करते हैं। ऐसे में अगर इतनी बड़ी हिस्सेदारी रखने के बावजूद संभावित अनियमितताओं का पता नहीं चल पाया, तो यह आम निवेशकों के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाने वाली बात होगी।
यकीन कीजिए, वीडियो दिन में रिकॉर्ड हुआ है
बीकानेर के नौरंगदेसर से रायसर के बीच का दृश्य है। आंधी इतनी घनी आई कि दिन में अंधेरा हो गया और गाड़ियों की लाइट जलानी पड़ी।
बीकानेर जिले में जन्मे और पले-बढ़े लोगों का कहना है कि उन्होंने जीवन में इससे पहले इतनी खतरनाक आंधी नहीं देखी। नहीं ही देखी होगी। लेकिन आज देख ही ली।
कॉकरोच 30 करोड़ साल से धरती पर हैं। इनकी ताकत जानकार आप हैरान हो जाएंगे। अपने वजन से पचास गुना वजन खींच सकता है। इनके बारे में कहा जाता है -न्यूक्लियर युद्ध हुआ तो धरती पर सिर्फ कॉकरोच ही बचेंगे….
एक बात देश के नागरिक समझ लें कि ना तो धर्म खतरे में है और ना लोकतंत्र खतरे में है। अगर कुछ खतरे में है तो इस देश का लॉजिक खतरे में हैं।
तेल बचाने की अपील के बीच प्रधानमंत्री जी ने ये नहीं कहा कि बिजली को बर्बाद कर देना है। सीएम साहब ने काफिला कम किया अच्छी बात है। वे इलेक्ट्रॉनिक कार से आना जाना शुरू किए ये भी अच्छी बात है लेकिन शोषेबाजी और पीआर स्टंट की ऐसी क्या सनक है कि बिना लॉजिक के अब EV बस में ही चल दिए।
लॉजिक समझिए
एक बड़ी EV बस 100 किलोमीटर चलने में लगभग 200 यूनिट बिजली की खपत करती है। कॉमर्शियल बिजली चार्ज जोडा जाए तो 8×200 = 1600 ₹ का खर्च आ जाता है।
दूसरी तरफ एक सामान्य डीजल कार 15 से 16 किलोमीटर पर लीटर का एवरेज निकालती है। डीजल की दर आज के भाव से देखें तो 93 रुपए लीटर है। यानी एक डीजल कार 100 किलोमीटर चलने के लिए मुश्किल से 600 रुपए के डीजल की खपत करती है।
बस कोई मुझे ये समझाए कि प्रधानमंत्री जी की राष्ट्रीय अपील के बीच सीएम साहब को 100 किलोमीटर चलने के लिए 1600 रुपए खर्च करने चाहिए या 600 रुपए ?
प्रधानमंत्री जी ने एक जरूरी और महत्वपूर्ण अपील की है। जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत थी और बिना पीआर स्टंट के उसका पालन करना था। मैं बीते 6 महीने से EV एक्टिवा से सफर कर रहा हूँ। मुझे अच्छा लगता है कि एक राष्ट्रीय अपील का भागीदार मैं 6 महीने पहले बन गया था।
लेकिन हमारे राजनेताओं को कौन समझाए कि पीआर भले करो लेकिज लॉजिक का इस्तेमाल जरूरी है।