माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM महोदय विगत 15 दिनों से 12 जिले के 2000 सहायक पुलिस के घर चुलहा जलना बंद है। फिलहाल ज़िले में वरीय पदाधिकारी के आदेश पर डियुटी से वंचित कर दिया गया है यह कहकर की मुख्यालय से किसी प्रकार का कोई लेटर नहीं आया है। @JharkhandCMO@JMMKalpanaSoren
झारखंड के मुख्यमंत्री के पिता व अन्य मंत्रियों का इलाज प्रदेश के बाहर प्राइवेट अस्पतालों में होता है ,
लेकिन वहीं एक सहायक पुलिस का जवान अच्छा इलाज न मिलने से मौत का शिकार हो जाता है ।
वाह! रे मुख्यमंत्री जी , वाह ! री आपकी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं, अब समझ आया कि आपके यहां बड़े बड़े लोग प्रदेश के बाहर इलाज कराने क्यों जाते हैं।
@jhsahyakpolice यह बहुत बड़ी विडम्बना है मंत्रियों के वेतन भत्ते में वृद्धि होती है कोई बात नहीं, बीमार होते हैं सीधे ओपोलो,एयर लिफ्ट वही एक आम कर्मी बीमार होता है एक अच्छा अस्पताल भी मय्यसर नहीं है इलाज के अभाव में मौत इसे क्या कहेंगे।
सोचिए........
कहानी — “तेरह हज़ार का सपना”
सूरज की पहली किरण गाँव के कच्चे घर की टूटी खिड़की से झांक रही थी। अभिषेक सोरेन, जो पिछले आठ साल से झारखंड में सहायक पुलिस के रूप में काम कर रहा था, अपने बिस्तर से उठ चुका था। पत्नी राधा चुपचाप चूल्हे पर पानी गरमा रही थी, और कोने में बैठा उनका बेटा किताबों में सिर झुकाए पढ़ने की कोशिश कर रहा था।
अभिषेक सोरेन की जेब में हर महीने तेरह हज़ार रुपये आते थे—उसी में घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, बुज़ुर्ग माता-पिता की दवा, और रोटी-कपड़ा सब कुछ चलता था। कभी-कभी तो महीने का आधा हिस्सा ही बीतता और जेब खाली हो जाती।
ड्यूटी पर निकलते वक्त अभिषेक सोरेन की वर्दी साफ़ तो थी, लेकिन उसके भीतर छुपा दर्द कोई नहीं देख पाता था। दिन में 12-14 घंटे धूप, बारिश और सर्दी में खड़ा रहना, अपराधियों से भिड़ना, और कभी-कभी जान पर खेलकर लोगों की जान बचाना—ये सब वही करता था। मगर जब वेतन की बात आती, तो अधिकारी सिर्फ एक वाक्य कहते—
“तुम अनुबंध पर हो, नियम यही है।”
रात को घर लौटते समय, अभिषेक सोरेन ने बाज़ार से बेटे के लिए किताब खरीदने का सोचा। लेकिन जेब में सिर्फ 80 रुपये थे—दवा और दूध के बीच चुनना पड़ा। अभिषेक सोरेन की आँखों में पानी भर आया, लेकिन बेटे के सामने मुस्कुरा कर बोला,
“पापा अगले महीने ले आएंगे।”
उस दिन अभिषेक सोरेन को समझ आया—यह लड़ाई सिर्फ अपराधियों से नहीं है, यह लड़ाई उस व्यवस्था से है जो उसकी मेहनत को तेरह हज़ार में तौल रही है। उसके सपने छोटे हो गए थे, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं।
क्योंकि अभिषेक सोरेन जानता था—अगर वो हार गया, तो आने वाली पीढ़ियाँ भी तेरह हज़ार के इस पिंजरे में कैद रहेंगी।
ज़ुल्म सहना भी गुनाह है, ये मत भूलो,
अपने हक़ की लड़ाई में कभी पीछे मत झुको।
हक़ उसी का मिलता है जो मैदान में उतरता है
Learn from Dishom Guru Shibu Soren how to get your rights and entitlements.
@sunny_sharad@ZeeBiharNews@JharkhandCMO@DainikBhaskar@JagranNews
आर्थिक तंगी के बीच इलाज के अभाव में सहायक पुलिस जवान की मौत
चतरा :- आर्थिक तंगी और इलाज के अभाव ने आखिरकार एक सहायक पुलिस जवान की जिंदगी छीन ली। चतरा जिला में पदस्थापित सहायक पुलिस रविन्द्र कुमार दांगी, ग्राम जोरी थाना राजपुर निवासी, जो वर्तमान में कोर्ट गेट ड्यूटी पर तैनात थे, जिनका आज निधन हो गयाl करीब 15 दिन पहले ड्यूटी के दौरान अचानक पेट दर्द से पीड़ित होने पर उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल चतरा लाया गया। डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देखते हुए पहले हजारीबाग सदर अस्पताल और फिर रांची रिम्स रेफर किया। स्थिति को नाजुक देखते हुए परिजनों ने बेहतर इलाज के लिए कोलकाता ले गए , जब यहां भी कोई सुधार नहीं दिखा तो फिर उन्हें मुंबई के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इलाज का खर्च वहन नहीं कर सका और लौटने के दौरान ही रविन्द्र दांगी की मृत्यु हो गई। कल (सोमवार) को चतरा पुलिस लाइन में दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। मृतक अपने पीछे छह महीने की मासूम बेटी और परिवार को छोड़ गए हैं। उनकी असामयिक मृत्यु से सहकर्मियों और परिजनों में शोक की लहर है।
अब सवाल ऐ है कि जो छः माह का बच्ची और पत्नी है उसका भरण पोषण कैसे होगा। जो माता पिता एक बेटे को पाल पोष कर बड़ा किया ताकि बुढ़ापे का सहारा बन सके। उस माता पिता का क्या होगा?
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सहायक पुलिस में सेवा देते हुए 8 वर्ष हो गए हैं इसलिए नियमावली के अनुरूप झारखंड पुलिस संवर्ग के आरक्षी के पद पर सीधी नियुक्ति हेतु अधिसूचित नियुक्ति नियमावली-2014 मे संशोधन करते हुए 2200 सहायक पुलिस को झारखंड पुलिस में सीधी नियुक्ति दी जाए🙏🙏🙏
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren
क़लम, कंधे और पसीने का मूल्य अगर न मिले,
तो सवाल सरकार से है ?
हम मेहनत के सौदागर, रोटी के भिखारी क्यों?
काबिल होते हुए भी लाचारी हमारी क्यों?
यदि आप योग्य हो, और आपकी योग्यता के अनुसार मेहनता न मिलें, तो सरकार के मुखिया और सरकार में बैठे अधिकारी से सवाल तो बनता है कि हमें कब तक बंधुआ मजदूर की जिंदगी जीना पड़ेगा।
#jharkhand_sahayak_police
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👇🏿👇🏿 ध्यान दें।
ऐ एक Guardian security pvt. Ltd , Security Guard कंपनी है.. जो गार्ड का भर्ती करता है जिसमें युवा को सिर्फ उंचाई और उम्र देखकर बहाल करती है। जिसमें एक गार्ड को प्रति माह 18500 रू और सुरक्षा सुपरवाइजर को 22500 रू देती है , जब एक निजी सुरक्षा गार्ड कंपनी 18500 रु देती है..तो @JharkhandCMO सहायक पुलिस को 13000 में 24*7 । 🤔
माननीय मुख्यमंत्री महोदय@HemantSorenJMM आप छत्तीसगढ़ की इस नीति का अवलोकन करते हुए हम सभी झारखण्ड सहायक पुलिसकर्मिओ की समस्या का समाधान करने की कृप्पा करे 🙏हम सभी झारखण्ड सहायक पुलिस पूर्ण रूप से प्रशिक्षित एवं अनुभवी हूँ और अपने राज्य मे 08 साल से निष्ठा पूर्वक सेवा दे रहा हूँ!
@ShahiPratap@HemantSorenJMM माननीयों को गरीबों के बच्चों पर भी विशेष ध्यान देना होगा आदरणीय बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन का भी यही सपना था उन्होंने हमेशा झारखंडियों के हक अधिकार के लिए आवाज उठाए थे सहायक पुलिस में जितने भी बच्चे हैं सभी झारखंड के स्थाई निवासी हैं उनका शीघ्र ही स्थाई किया जाना अति आवश्यक है ।
सरकारी नौकरी में तनख्वाह कुर्सी की कद्र पर मिलती है…
अनुबंध वाला चाहे पसीना बहाए या खून, हिसाब हमेशा आधा ही होता है।
This is truth.....
#jharkhand_sahayak_police#we_want_justice
@HemantSorenJMM@JAYDEEP_JMM सर, हम झारखंड सहायक पुलिस का क्या होगा? हमलोग अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हैं सर? सर हम लोग झारखंड के आदिवासी मूलवासी 100 प्रतिशत है. सर आपसे पर विश्वास और आपसे उम्मीद है कि आप हमलोग के साथ जरूर न्याय किजियेगा.
@HemantSorenJMM@Kalpanasoren76
हम बोलते-बोलते थक गए,
वो सुनते-सुनते सो गए,
पूछो सवाल तो कहते हैं—
‘माफ़ कीजिए, हम बहरें और गूंगे हैं।’"
दिशोम गुरु ने झारखंड की मिट्टी के लिए जंग जीती,
हम अपने हक़ और अधिकार के लिए जंग हार कैसे सकते हैं?
जागो भाइयों ,जागो बहना, ऐ लड़ाई अपने आने वाला कल के लिए है अपने आने वाले बच्चों के भविष्य के लिए है। यदि आप अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं तो लड़ना पड़ेगा, झारखंड का इतिहास गवाह है कि अधिकार मांगकर नहीं, लड़कर लिया जाता है।
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