Author - The Monk Who Became Chief Minister - Biography of @mYogiAdityanath l @UniofOxford - @CheveningFCDO scholar, @XLRIJamshedpur & Shishu Mandir Alum
.@myogiadityanath launched cover of my book:The Monk Who Became Chief Minister Dr. @davidfrawleyved wrote foreword https://t.co/m4gOpniNXB https://t.co/XVu2qgZo6p
मुख़्तार-अतीक की मूँछें तो आपको भाती थीं,
उनकी दबंगई में भी आपको शान नज़र आती थी।
शिवाजी-राणा की मूँछें आज भी याद आती हैं,
बार बार वीरों की मूँछें आपको क्यों डराती हैं?
क्यों हर मूँछ में आपको जाति नज़र आती है?
सिर पर ‘सत्ता-सजातीय’ हाथ है
इसीलिए इनकी मूंछों पर ताव है
ऐस लोगों से क्या होना इंसाफ़ है
पर अब ये कुछ दिनों की बात है
क्योंकि दस्तक दे रहा बदलाव है
हम निलंबन की माँग नहीं करेंगे!
अखिलेश जी, भारत को नीचा दिखाने की इतनी जल्दी कि Yale-Columbia की ranking देखी और बिना methodology पढ़े ट्वीट कर दिया? @yadavakhilesh
देश के विपक्ष के नेता बनिए, विदेशी ranking के salesman नहीं।
एक छोटी-सी Masterclass on this “विदेशी Index” 👇
जिस EPI methodology पर आप भरोसा कर रहे हैं, भारत सरकार ने उसकी बाकायदा point-by-point पोल खोली है—
• 2050 के emissions की भविष्यवाणी पिछले कुछ वर्षों की trend line को आगे खींचकर — मान लिया कि भारत अगले दशकों में technology और policy बदल ही नहीं सकता।
• इस अनुमान को भारी weightage, लेकिन per-capita emissions और equity को बहुत कम महत्व। यानी historically ज्यादा pollution करने वाले अमीर देश को फायदा, developing India को नुकसान।
• भारत के forests और wetlands जैसे carbon sinks को projected emissions में पर्याप्त रूप से नहीं जोड़ा गया।
• Renewable-energy capacity, energy efficiency और sustainable consumption जैसे महत्वपूर्ण parameters की अनदेखी पर भी भारत ने सवाल उठाए।
• और मज़ेदार बात—Yale खुद कहता है कि EPI की methodology और datasets editions के बीच बदलते हैं, इसलिए अलग-अलग editions के scores सीधे compare नहीं करने चाहिए।
भारत को गाली देने वाली हर विदेशी table सत्य नहीं हो जाती, अखिलेश जी।
पहले methodology पढ़िए, फिर राजनीति कीजिए। 🇮🇳
Jai Sri Ram Air Marshal Jeetendra Mishra ji🙏
5,585 applications → 1,580 eligible → 108 online interactions → 16 called to Ayodhya → 3 recommended → 1 selected.
राम मंदिर का CEO बनना, शायद Congress President बनने से ज्यादा competitive है.
The Rampur Syndicate.
It flourished when @yadavakhilesh was in power. Azam Khan was its political boss, Rampur its fiefdom, and power its protection.
Today, Azam and members of his family face multiple convictions and jail terms.
Akhilesh Raj nurtured the Syndicate. @myogiadityanath Raj made it face the law.
अखिलेश सरकार के सबसे ताकतवर मंत्रियों में से एक आज़म ख़ान ने अनुसूचित जाति के 26 किसानों की करीब 17 बीघा ज़मीन दबाव और ज़बरदस्ती से रामपुर जौहर यूनिवर्सिटी के लिए कब्ज़ाई 😔
2020 में योगी सरकार के दौरान प्रशासन ने इन किसानों को उनकी ज़मीन पर दोबारा कब्ज़ा दिलाया।
अब आप ही तय कीजिए—किसकी ज़मीन छीनी और किसने वापस दिलाई?
Akhilesh Yadav (2012–2017) vs Yogi Adityanath (2017–present).
I asked ChatGPT to compare both governments across 10 key parameters, focusing on data rather than political narratives.
Here’s the scorecard:
⚠️ जनहित में चेतावनी!
UP के “दो वृद्ध लड़के” — राहुल जी और अखिलेश जी — अगले कुछ महीनों जातिवाद की राजनीति का तापमान बढ़ाने निकलेंगे।
लंबे समय से सत्ता से बाहर हैं, और फ्रस्ट्रेटेड भी है, दिखाने को न कोई नया विज़न, न नीति, न शासन का कोई मॉडल। 2024 में जातीय समीकरणों से मिली क्षणिक सफलता ने ऐसा स्वाद लगाया कि अब 2027 तक उसी सामाजिक वैमनस्य की रेसिपी को और तीखा करके परोसने की तैयारी है।
बात बात पर जाति पूछेंगे, जाति बाँटेंगे — बस विकास का हिसाब मत पूछ लेना!
उत्तर प्रदेश की जनता सावधान रहे। वोटर के पास दो विकल्प हैं - जातिवाद का गणित या विकास की राजनीति।
भाजपा की दलित विरोधी सोच ही उत्तराखण्ड में मंच धुलवाती है और नेता प्रतिपक्ष पर एफ़आइआर करवाती है। घोर निंदनीय!
भाजपा ने अपनी हार के पराजय-पत्र पर ख़ुद ही दस्तख़त कर दिये हैं।