#अंजुम_मुद्गल का Egypt में चल रही ISSF अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता की 50 मीटर event में Silver 🥈 medal.
#ब्राह्मणी ने विदेशी धरती पर #तिरंगा फहरा भारत मां का गौरव बढ़ाया।
आवश्यक सूचना-
परम पूज्य बागेश्वर धाम सरकार का पूरे भारत वर्ष में कार्यक्रम आयोजित हो रहे है…अनजाने हज़ारो कमिटी और मण्डल धन उपार्जन के लिए आम लोगो को बरगला रहे है…बागेश्वर धाम जन सेवा समिति ये घोषणा करती है ना उनकी कोई शाखा है ना कोई मण्डल ना ऑफिस…किसी के झाँसे में या बहकावे में ना आए…अगर किसी व्यक्ति को बागेश्वर धाम पर चल रहे किसी सेवा प्रकल्प में सहायता करनी तो सीधा कार्यालय में संपर्क करे…गुरुदेव से ना मिलने ना अर्ज़ी की ना चरण डालने की कोई राशी ली जाती है…अगर कोई व्यक्ति आपसे धन माँगे तो आप सीधा धाम पर या कार्यक्रम स्थल के कार्यालय में संपर्क करे-बागेश्वर धाम जन सेवा समिति…
*😡गुजरात: पालीताणा गिरिराज जैन तीर्थ पर अवैध दरगाह पर जैन श्रद्धालुओंको जोर-जबरदस्ती अपना सिर झुकाकर जाने के लिए मुस्लिम मौलवियों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है ☹️😡🤔,,यदि कोई श्रद्धालु मना करे तो मुस्लिम भीड़ मारपीट करती है.*
Please check the fact, If it is true where is police
कड़वा है मगर सच है..
क्या BJP को पसमांदा मुस्लिमों की तरफ झुकाव महँगा पड़ रहा है
वोट वो लोग फिर भी इनको कभी नहीं देंगे
BJP को "सबका विश्वास" जीतने का नाकाम राजनीति ने कर्नाटक में हिंदूवादी संगठन बजरंगदल को बैन करवा दिया।
आप कितनी भी कोशिश करलो, कौम विशेष के वोट कभी आपको नहीं मिलेंगे। बल्कि इससे जो आपके हैं, वो भी आपसे छिटक जायेंगे 2024 के चुनाव से पहले ये बात समझ लें, तो बेहतर होगा।
जय हिंद..🇮🇳🙏🏻
केदारनाथ मंदिर एक अनसुलझी पहेली है !!
केदारनाथ मंदिर का निर्माण किसने करवाया था इसके बारे में बहुत कुछ कहा जाता है। पांडवों से लेकर आदि शंकराचार्य तक।
आज का विज्ञान बताता है कि केदारनाथ मंदिर शायद 8वीं शताब्दी में बना था।
यदि आप ना भी कहते हैं, तो भी यह मंदिर कम से कम 1200 वर्षों से अस्तित्व में है।
केदारनाथ की भूमि 21वीं सदी में भी बहुत प्रतिकूल है।
एक तरफ 22,000 फीट ऊंची केदारनाथ पहाड़ी, दूसरी तरफ 21,600 फीट ऊंची कराचकुंड और तीसरी तरफ 22,700 फीट ऊंचा भरतकुंड है।
इन तीन पर्वतों से होकर बहने वाली पांच नदियां हैं मंदाकिनी, मधुगंगा, चिरगंगा, सरस्वती और स्वरंदरी। इनमें से कुछ इस पुराण में लिखे गए हैं।
यह क्षेत्र "मंदाकिनी नदी" का एकमात्र जलसंग्रहण क्षेत्र है। यह मंदिर एक कलाकृति है I कितना बड़ा असम्भव कार्य रहा होगा ऐसी जगह पर कलाकृति जैसा मन्दिर बनाना जहां ठंड के दिन भारी मात्रा में बर्फ हो और बरसात के मौसम में बहुत तेज गति से पानी बहता हो। आज भी आप गाड़ी से उस स्थान तक नही जा सकते I
फिर इस मन्दिर को ऐसी जगह क्यों बनाया गया?
ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में 1200 साल से भी पहले ऐसा अप्रतिम मंदिर कैसे बन सकता है ?
1200 साल बाद, भी जहां उस क्षेत्र में सब कुछ हेलिकॉप्टर से ले जाया जाता है I JCB के बिना आज भी वहां एक भी ढांचा खड़ा नहीं होता है। यह मंदिर वहीं खड़ा है और न सिर्फ खड़ा है, बल्कि बहुत मजबूत है।
हम सभी को कम से कम एक बार यह सोचना चाहिए।
वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि यदि मंदिर 10वीं शताब्दी में पृथ्वी पर होता, तो यह "हिम युग" की एक छोटी अवधि में होता।
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी, देहरादून ने केदारनाथ मंदिर की चट्टानों पर लिग्नोमैटिक डेटिंग का परीक्षण किया। यह "पत्थरों के जीवन" की पहचान करने के लिए किया जाता है। परीक्षण से पता चला कि मंदिर 14वीं सदी से लेकर 17वीं सदी के मध्य तक पूरी तरह से बर्फ में दब गया था। हालांकि, मंदिर के निर्माण में कोई नुकसान नहीं हुआ।
2013 में केदारनाथ में आई विनाशकारी बाढ़ को सभी ने देखा होगा। इस दौरान औसत से 375% अधिक बारिश हुई थी। आगामी बाढ़ में "5748 लोग" (सरकारी आंकड़े) मारे गए और 4200 गांवों को नुकसान पहुंचा। भारतीय वायुसेना ने 1 लाख 10 हजार से ज्यादा लोगों को एयरलिफ्ट किया। सब कुछ ले जाया गया। लेकिन इतनी भीषण बाढ़ में भी केदारनाथ मंदिर का पूरा ढांचा जरा भी प्रभावित नहीं हुआ।
भारतीय पुरातत्व सोसायटी के मुताबिक, बाढ़ के बाद भी मंदिर के पूरे ढांचे के ऑडिट में 99 फीसदी मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है I 2013 की बाढ़ और इसकी वर्तमान स्थिति के दौरान निर्माण को कितना नुकसान हुआ था, इसका अध्ययन करने के लिए "आईआईटी मद्रास" ने मंदिर पर "एनडीटी परीक्षण" किया। साथ ही कहा कि मंदिर पूरी तरह से सुरक्षित और मजबूत है।
यदि मंदिर दो अलग-अलग संस्थानों द्वारा आयोजित एक बहुत ही "वैज्ञानिक और वैज्ञानिक परीक्षण" में उत्तीर्ण नहीं होता है, तो आज के समीक्षक आपको सबसे अच्छा क्या कहता ?
मंदिर के अक्षुण खड़े रहने के पीछे :
जिस दिशा में इस मंदिर का निर्माण किया गया है व जिस स्थान का चयन किया गया है I
ये ही प्रमुख कारण हैं I
दूसरी बात यह है कि इसमें इस्तेमाल किया गया पत्थर बहुत सख्त और टिकाऊ होता है। खास बात यह है कि इस मंदिर के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया गया पत्थर वहां उपलब्ध नहीं है, तो जरा सोचिए कि उस पत्थर को वहां कैसे ले जाया जा सकता था। उस समय इतने बड़े पत्थर को ढोने के लिए इतने उपकरण भी उपलब्ध नहीं थे। इस पत्थर की विशेषता यह है कि 400 साल तक बर्फ के नीचे रहने के बाद भी इसके "गुणों" में कोई अंतर नहीं है।
आज विज्ञान कहता है कि मंदिर के निर्माण में जिस पत्थर और संरचना का इस्तेमाल किया गया है, तथा जिस दिशा में बना है उसी की वजह से यह मंदिर इस बाढ़ में बच पाया।
केदारनाथ मंदिर "उत्तर-दक्षिण" के रूप में बनाया गया है। जबकि भारत में लगभग सभी मंदिर "पूर्व-पश्चिम" हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मंदिर "पूर्व-पश्चिम" होता तो पहले ही नष्ट हो चुका होता। या कम से कम 2013 की बाढ़ में तबाह हो जाता। लेकिन इस दिशा की वजह से केदारनाथ मंदिर बच गया है।
इसलिए, मंदिर ने प्रकृति के चक्र में ही अपनी ताकत बनाए रखी है। मंदिर के इन मजबूत पत्थरों को बिना किसी सीमेंट के "एशलर" तरीके से एक साथ चिपका दिया गया है। इसलिए पत्थर के जोड़ पर तापमान परिवर्तन के किसी भी प्रभाव के बिना मंदिर की ताकत अभेद्य है।
टाइटैनिक के डूबने के बाद, पश्चिमी लोगों ने महसूस किया कि कैसे "एनडीटी परीक्षण" और "तापमान" ज्वार को मोड़ सकते हैं।
लेकिन भारतीय लोगों ने यह सोचा और यह 1200 साल पहले परीक्षण किया I
क्या केदारनाथ उन्नत भारतीय वास्तु कला का ज्वलंत उदाहरण नहीं है?
2013 में, मंदिर के पिछले हिस्से में एक बड़ी चट्टान फंस गई और पानी की धार विभाजित हो गई I मंदिर के दोनों किनारों का तेज पानी अपने साथ सब कुछ ले गया लेकिन मंदिर और मंदिर में शरण लेने वाले लोग सुरक्षित रहे I जिन्हें अगले दिन भारतीय वायुसेना ने एयरलिफ्ट किया था।
सवाल यह नहीं है कि आस्था पर विश्वास किया जाए या नहीं। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि मंदिर के निर्माण के लिए स्थल, उसकी दिशा, वही निर्माण सामग्री और यहां तक कि प्रकृति को भी ध्यान से विचार किया गया था जो 1200 वर्षों तक अपनी संस्कृति और ताकत को बनाए रखेगा।
हम पुरातन भारतीय विज्ञान की भारी यत्न के बारे में सोचकर दंग रह गए हैं I शिला जिसका उपयोग 6 फुट ऊंचे मंच के निर्माण के लिए किया गया है कैसे मन्दिर स्थल तक लायी गयी I
आज तमाम बाढ़ों के बाद हम एक बार फिर केदारनाथ के उन वैज्ञानिकों के निर्माण के आगे नतमस्तक हैं, जिन्हें उसी भव्यता के साथ 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊंचा होने का सम्मान मिलेगा।
यह एक उदाहरण है कि वैदिक हिंदू धर्म और संस्कृति कितनी उन्नत थी। उस समय हमारे ऋषि-मुनियों यानी वैज्ञानिकों ने वास्तुकला, मौसम विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, आयुर्वेद में काफी तरक्की की थी।
कर्नाटक हार की मुख्य वजह.!!!
कुछ अपने भी आज खुश हैं!
कर्नाटक चुनाव भाजपा हार रही है, यह दुख तुम्हारे अंदर भी है लेकिन फिर भी तुम खुश हो क्योंकि तुम्हारे हिसाब से यह मोदीजी की हार है!
जो पूरी जिंदगी भाजपा के टिकट पर सत्ता सुख भोगते रहे और जब नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का मौका आया तो बगावत करके दल बदल लिया!
भाजपा के वो नेता जो मंत्री पद पर बैठकर जमीनी कार्यकर्ताओं से कट जाते हैं और भ्रष्टाचार में डूब जाते हैं!
संघ परिवार के सभी घटक जो सत्ता के दम पर अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में जुड़े रहते हैं, लेकिन चुनाव के समय अपने घरों में बैठ जाते हैं, क्योंकि उनके अनुसार राजनीति उनका कार्यक्षेत्र नहीं है।
भाजपा के कार्यकर्ता जो आत्मविश्वास में डूबे रहते हैं और जिनके अनुसार चुनाव जिताना केवल मोदी जी और अमित शाह की जिम्मेदारी है, वो आयेंगे, जादू की छड़ी घुमायेंगे और चुनाव जिता देंगे!
वो हिंदू समाज जो पूरे दक्षिण भारत में एकमात्र कर्नाटक में सुरक्षित है, लेकिन चुनाव में वोट देने घर से नहीं निकला!
वो मतदाता जिनके लिए विकास नहीं मुफ्त की रेवड़ियां ज्यादा मायने रखती हैं, उन्हें श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान की स्थिति नहीं दिखाई दे रही है!
मोदी जी और अमित शाह को क्या चुनाव परिणामों की भनक केंद्रीय एजेंसियों ने पहले से नहीं दी थी? उन्हें सब पता था, फिर भी उन दोनों ने अपनी सारी ताकत चुनाव अभियान में झोंक दी, रैलियां, रोड शो, पब्लिक मीटिंग, कार्यकर्ताओं के साथ बैठक, जनसंपर्क किसी में कोई कमी नहीं की, निरंतर मेहनत किया!
क्योंकि उनको अपनी नहीं देश की, जनता की, पार्टी की चिंता थी, हो सकता है उनके कई फैसले वक्त के आधार पर गलत साबित हो गए लेकिन क्या उनके पुरुषार्थ में कोई कमी थी?
उनको दोषी ठहराने के पहले अपने गिरेबान में झांके हमने अपने कर्तव्य का पूर्णतया पालन किया क्या? क्यों यूपी नगरनिगम चुनाव में भाजपा जबर्दस्त बहुमत पा रही है?
शायद यह जीत कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं, जन प्रतिनिधियों के सामुहिक ईमानदार प्रयास का नतीजा है, इनकी मेहनत से ही जीत हासिल की जा सकती है, मोदीजी का नाम तो बोनस रूपी प्रचंड बहुमत दिला देता है!
अत: अपनी सामुहिक ईमानदार मेहनत और मोदी पर भरोसा रखें और भारत के उत्थान में लगे रहे हैं, भारत, भाजपा के उत्थान में ही विकास, शांति, समृद्धि और धार्मिक स्वतंत्रता संभव है!
👉 लेकिन, मोदी जी को भी सोचना होगा
१. सबका साथ सबका विकास कीजिए पर विश्वास अपनो का कीजिए
२. आप अपने कार्यकर्ताओं को और समर्थकों को बुरे वक्त में अकेला नहीं छोड़ सकते
३. हम धर्म का झंडा जरूर उठाते हैं उसका फायदा आपको डायरेक्टली मिलता है तो हमारे सुरक्षा की जिम्मेवारी आपकी बनती है!
४. विधर्मी और जिहादियों से हम अपनी ताकत के बल पर लड़ सकते हैं लेकिन जब कानून और प्रशासन की बात आती है तो वहां पर आपको मदद करना होगा
५. अगर आप राष्ट्रवादी हिंदुओं के साथ खुलकर रहेंगे तभी आप को राष्ट्रवादी हिंदुओं का समर्थन मिलेगा क्योंकि देश और धर्म सिर्फ आपका या हमारा जिम्मेवारी नहीं हम सबका जिम्मेवारी है!
६. आप जिन लोगों के वोट के चक्कर में अपने लोगों को बलिदान करने को तैयार हो जाते हैं, वह कुछ वोट आपको कभी नहीं मिलेगा इसके लिए आपको जितना जोर लगाना है लगा लीजिए क्योंकि हम भी जमीनी लेवल से जुड़े हुए हैं और हमें सत्यता की जानकारी है!
बहनो के साथ सत्य घटना पर आधारित इस्लामिक कट्टरता एवं लव जिहाद पर बनी #thekerlastory फ़िल्म देखी…
युवाओं से आग्रह है विशेषकर बहन बेटियों से यह फ़िल्म ज़रूर देखें🙏🏻
ये महिलाए जेएनयू के " टूकड़े-टूकड़े " गेंग कि सदस्य है !
पहलवानों के समर्थन में, काफी दिनो बाद "डफली" बजाने का मौका मिला !
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बांकी सब तो ठीक था, लेकिन " बजरंग पुनिया " के साथ किसने " यौन शोषण " कर लिया भाई !
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आप भी सुनिये!
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अपनी निजी संपत्ति पर जानवरों के लिए पानी पीने का तालाब बनाया ॥ सब आप लोगो के प्यार के कारण ही हो पा रहा है , आशा करता हूँ आप लोग ऐसे ही प्यार देते रहोगे ॥ 🥹♥️ - पूरा वीडियो ये रहा - https://t.co/404TpDnPwi
अरे खड़गे जी, आप पार्टी " अध्यक्ष " है !
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आप कब तक "खड़े" रहेंगे, " राजमाता " और "राजकुमार" दोनो कुर्सी पर बैठ गए है !
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अब भी बैठ जाइये !
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अच्छा यहां भी " आदेश " का इन्तजार !
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अपने मित्र ब्रायन की अस्थियां विसर्जित करने मोक्ष की नगरी काशी पहुंचे आस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट कप्तान स्टीव वा
अब ऐसी एक बड़ी आबादी विश्व भर में हो गई है जो जन्म से तो हिंदू नहीं हैं
पर हिंदू धर्म और भारत की संस्कृति ने उन्हें प्रभावित कर लिया है क्योंकि सत्य ही सनातन है।
ब्रायन का कोई परिवार नहीं था ओर उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनकी अस्थियाँ गंगा में प्रवाहित की जाये