आज इंडिया गठबंधन के सभी दलों ने बिहार के चुनाव आयुक्त से मुलाकात की। इसमें हमने चुनाव आयोग से पूछा कि "क्या बिहार विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम 2025 के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़वाने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग को केवल 11 दस्तावेज मांगने का ही अधिकार है? इसका संवैधानिक एवं कानूनी आधार क्या है?"
यहाँ एक मौलिक एवं विचारणीय सवाल खड़ा होता है – कि क्या भारतीय निर्वाचन आयोग को यह अधिकार है कि वह केवल उन्हीं 11 दस्तावेजों को मान्य माने और किसी अन्य दस्तावेज को खारिज कर दे?
संविधान का अनुच्छेद 326, वयस्क मताधिकार का आधार तय करता है – अर्थात 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक, जिसे कानून द्वारा अपात्र घोषित न किया गया हो, मतदान का हक रखता है। लेकिन यह अनुच्छेद यह स्पष्ट नहीं करता कि नागरिकता या आयु प्रमाणित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे।
Representation of the People Act, 1950 के Section 16 चुनावी अपात्रता के आधार तथा Section 21-23: नाम जोड़ने, हटाने, आपत्ति दर्ज करने आदि की प्रक्रिया की धाराओं में भी यह स्पष्ट निर्देश नहीं है कि केवल कौन से दस्तावेज ही मान्य होंगे। यह अधिकार मुख्य रूप से चुनाव आयोग की प्रक्रिया और अधिसूचना के अधीन छोड़ा गया है।
हमने आयोग से पूछा कि:-
1. क्या भारतीय निर्वाचन आयोग को केवल वही 11 दस्तावेज स्वीकार करने का विशेषाधिकार प्राप्त है?
2. सरकार द्वारा जारी अन्य दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, इत्यादि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में अस्वीकार्य क्यों है, भले ही वे पहचान या निवास सिद्ध करें?
3. आधार कार्ड जारी करते वक्त सरकार आपकी आँखों की पुतली, फ़िंगरप्रिंट्स सहित पहचान और आवास के कई दस्तावेज माँगती है तभी आधार कार्ड बनता है। फिर सरकार अपने द्वारा बनाए गए आधार कार्ड को क्यों छाँट रही है?
4. यदि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम अथवा संविधान में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है तो यह 11 दस्तावेजों की सूची किस प्रक्रिया से तय हुई? क्या यह न्यायसंगत है?
5. बिहार के 4 करोड़ से अधिक निवासी अन्य राज्यों में स्थायी और अस्थायी कार्य करते है। क्या 18 दिन में वो अपना सत्यापन कर पाएंगे? क्या सरकारी स्तर पर उन्हें बिहार लाने की कोई योजना है अथवा उनके वोट काटना उद्देश्य है?
6. सत्यापन कार्य में मतदाता को सफ़ेद पृष्ठभूमि के साथ अपनी रंगीन फ़ोटो लगानी है। क्या सभी घरों/परिवारों में फ़ोटो उपलब्ध है? क्या अन्य दस्तावेज़ों की फ़ोटोकॉपी उपलब्ध है? उन्हें निर्वाचन आयोग को यह सब उपलब्ध कराने के लिए फ़ोटोस्टूडियो जाकर फ़ोटो खिंचाना होगा। यह प्रक्रिया ग़रीब मतदाताओं के उत्पीड़न के अलावा वित्तीय बोझ भी है।
7. निर्वाचन आयोग Dashboard के ज़रिए सभी को बताए को प्रतिदिन कितने मतदाताओं का अब तक सत्यापन हुआ? कितने मतदाताओं का मत अस्वीकृत हुए? अगर इनकी मंशा ठीक है तो चुनाव आयोग को इस पर Dashboard के माध्यम से Live Realtime अपडेट देना चाहिए।
8. निर्वाचन आयोग ने बताया कि प्रत्येक BLO के साथ 4 स्वयंसेवक लगाए गए है। हमने पूछा कि ये वॉलियंटर्स कौन है और इनके चयन का मानदंड क्या है? क्या वो सरकारी कर्मचारी है अथवा अन्य लोग?? हमने माँग रखी कि चुनाव आयोग BLO की तरह इन वॉलंटियर्स" यानि स्वयंसेवकों की भी सूची प्रकाशित करें ताकि सभी लोग उनका सत्यापन कर सकें।
हमारे प्रतिनिधि मंडल के सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि निर्वाचन आयोग संविधान के अधीन एक स्वतंत्र संस्था है। वह "कानून के अधीन" कार्य करता है, न कि कानून से ऊपर।
यदि दस्तावेज़ों की सूची प्रशासनिक आदेश या आंतरिक गाइडलाइन से बनाई गई है, तो क्या उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों पर प्रभाव डालने की इतनी व्यापक शक्ति दी जा सकती है? निर्वाचन आयोग स्पष्ट रूप से यह बताए कि इन 11 दस्तावेजों का चयन किस विधिक शक्ति या धारा के तहत किया गया।
चुनाव आयोग खासकर ग्रामीण और वंचित तबकों के हित में अन्य प्रामाणिक दस्तावेजों को भी स्वीकार्य बनाने पर पुनर्विचार करे अन्यथा सड़कों पर आंदोलन होगा। #TejashwiYadav #Bihar #RJD #patna #ElectionCommission
बड़ी ख़बर-
ये तो Dictatorship यानि तानाशाही है।
अंग्रेजों का शासन है।
मुख्य आरोपी को छुआ नहीं।
अभी तो प्रधानमंत्री के चारों तरफ की सारी सीटें हारे हैं.... आगे...!!"
कमलेश बिंद के एनकाउंटर पर अपनी ही सरकार पर बरस पड़े योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद।
हर कोई भरा पड़ा है।
हर कोई झेल रहा है।
चूंकि दिल्ली की आंखे बंद हैं।
इसलिए लोगों ने अपनी जुबान सिल रखी है।
इस सबके बावजूद आक्रोश का लावा फूट ही जाता है।
इसी से समझ लीजिए कि कैसे भीतर ही भीतर आक्रोश की नील नदी बह रही है!!
इसका मतलब मेरा स्वप्न सही निकला?
ये मामला तो मेरे आराध्य प्रभु श्री राम के अयोध्या स्थित भव्य मंदिर का प्रतीत होता है।
क्या यहीं पर दानपात्र से करोड़ों रुपए चोरी हुए हैं?
संत बोल रहे है कि जिसने किया होगा, प्रभु राम उसे नहीं छोड़ेंगे।
मीडिया अयोध्या से बाइट्स ले रहा है।
मामला बढ़ गया है।
स्वप्न कभी कभी अंत:शक्ति की अंतस चेतना के प्रस्फुटीकरण होते हैं।
और अंतस चेतना कभी झूठ नहीं बोलती!!
योगी आदित्यनाथ पर दंगा करने का मुकदमा दर्ज है फिर भी उन्हें हम दंगायी नहीं कहते
हत्या करने के प्रयास का मुकदमा दर्ज है फिर भी हम उन्हें हत्यारा नहीं कहते
चोरी करने का मुकदमा दर्ज है फिर भी हम उन्हें चोर नहीं कहते
वाह भाटी साहब मान गए आपको 🤣
क्षत्रियों को प्रधानमंत्री अगर किसी ने बनाया था तो वह मुलायम सिंह यादव जी ने बनाया था..
अगर मुलायम सिंह यादव ने चंद्रशेखर को प्रधानमंत्री न बनाया होता क्षत्रिय कभी प्रधानमंत्री न बन पाता..
जो संतों तक की सगी नहीं
वो ‘भाजपा’ अब और नहीं!
हमारे महाकाव्यों की यही सीख है कि जो संत-यज्ञ में और सद्-कर्म में बाधा बनते हैं, उनका अंत प्रभु स्वयं करते हैं।
🚨 एंकर अंजना ओम कश्यप सोच रही होगी यार किधर से इस कवि को 2 मिनट का टाइम दे दिया 😂
कवि "दमदार बनारसी" ने 2 मिनट में मीडिया द्वारा बनाया गुब्बारा फोड़ दिया🔥 👇
मोदी ने जिस सिस्टम को कंट्रोल किया था,
वो अब अंदर से कोलैप्स कर गया है,
आर्थिल बदहाली की सुनामी आ रही है,
मुख्य चुनाव आयुक्त, इंटेलीजेंस चीफ, जुडीशल चीफ मुझे मैसेज कर रहे हैँ कि
मोदी के हाथ से चीजें निकल गई हैँ,
मोदी, अमित शाह, जय शाह के खिलाफ एविडेंस मुझे भेज जा रहे हैँ,
मोदी ने जो किला बनाया था, उसे अब वो संभाल नहीं पा रहे हैँ,
या तो मोदी इमरजेंसी लगाएंगे,
या एक साल के अंदर उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ेगी,
@RahulGandhi
एंकर और यूट्यूब टीचर के विवाद में अंजना ओम कश्यप को अगर कोई सबसे खतरनाक जवाब दिया है तो वो हैं Khan Sir 🔥
Khan Sir ने कहा
जब ऐसे पत्रकार घर जाते होंगे तो घर में लोग पूछते होंगे कि खाना खाई हैं या 'तलवे चाटकर' आई हैं।😀
अंजना ने गलत आदमी से पंगा ले लिया है।
देखो अंजना हम तुमको एक बात समझाते हैं ध्यान से समझना
मेहनत की कमाई में कॉन्फिडेंस होता है कि आप नाम लेकर बोल सकते हो, जैसे मैं बोल रहा कि अंजना तुम गलत हो
और दलाली की कमाई में एक खराबी है अंजना कि तुम लपेटकर बोलोगी की यूट्यूब के टीचर्स, तुम्हारे अंदर कॉन्फिडेंस ही नहीं आयेगा कि किसी का नाम लेकर बोल सको।😂
इसलिए हम नाम लेकर बोल रहे हैं कि अंजना तुम बेवकूफी करती हो।
ये बकचोद गवार पढ़ा लिखा नहीं है इसको इतिहास की जानकारी नहीं है आजमगढ़ महर्षि दुर्वासा, राहुल सांकृत्यायन, शिब्ली नोमानी और कैफ़ी आज़मी जैसी महान विभूतियों की धरती है। इस जिले ने देश को साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया है।
आजमगढ़ को बदनाम करने वाले पहले उसका इतिहास पढ़ लें। यह ज्ञान, संघर्ष और प्रतिभा की भूमि है। पूरे जिले को कटघरे में खड़ा करना अज्ञानता और सस्ती राजनीति का परिचायक है। कुछ लोगों की सोच भले छोटी हो, लेकिन आजमगढ़ का इतिहास और सम्मान बहुत बड़ा है।
आजमगढ़ कोई आतंक की नहीं, बल्कि महापुरुषों, विद्वानों और देशभक्तों की धरती है। इसलिए पूरे जिले को बदनाम करने वाले ऐसे बयानों को जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
@brajeshlive@bstvlive@ArunrajbharSbsp@arvindrajbhar07@SamajwadiUsa@SamajwadManthan@apnarajeevnigam
सरकार ठाकुरों की है आगे भी ठाकुरों की ही आएगी।
सब कुछ ठाकुरों ने किया है कोई सेना उठाकर देख लो सिर्फ ठाकुर ही है बाकी जाति के बस का नहीं।
सही बोल रहा है लड़का क्योंकि कुछ जातियों को यादवों के गमछे से दिक्कत है गानों से दिक्कत है लेकिन ठाकुरों के तानों से दिक्कत नहीं है।😉
CUET के बच्चों को सुनिए। सीधे स्टुडियो में बैठ कर अपनी बात बहादुरी से कह रहे हैं। डर का माहौल ख़त्म होता जा रहा है। हक़ के लिए जागरूकता प्रबल होती जा रही है।
इस पर बात कीजिए। कहां पड़े हैं किसी और चक्कर में!
अब माइक टीचर्स के हाथ में है 🔥 अंजना का क्या होगा 😃
अंजना: YouTube टीचर्स फ़र्ज़ी व्यूज़ के पीछे भागते हैं और बकवास बातें करते हैं।
B.M सर 🎯: ये वही YouTube टीचर्स हैं जो NEET, NET, लेखपाल और SI पेपर लीक के मुद्दे उठाते हैं।
अंजना: टीचर्स को सिर्फ़ पढ़ाना चाहिए।
B.M सर ⚡️: बिल्कुल सही। पेपर लीक के मुद्दे उठाना आपका काम था। अगर आप यह करते, तो टीचर्स को यह करने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
अंजना: वे यह सब व्यूज़ के लिए करते हैं।
B.M सर 🔥: टीचर्स गाँवों के गरीब छात्रों को बहुत कम फ़ीस में पढ़ाते हैं। वे छात्रों के लिए लाठियाँ खाते हैं, लेकिन वे अपनी ज़मीर नहीं बेचते।
काला धन के नाम पर देश का धन चाट लिया,
लोग कहते हैं मोदी जी फकीर आदमी है क्या ऐसे ही हैं,
फिर इतने महंगे कपड़े कैसे?
: अभिनय शर्मा (विद्वान,गणित)
AN ERA OF PAPER LEAK!