ब्रह्ममुहूर्त में अगर “आंखें खुल गई हो” तो
सबसे पहले “श्री रामलला” के श्री चरणों में प्रणाम करके दिन की मंगलमय शुरुआत करें।
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालनहर, दशरथ नंदन श्री रामलला सरकार के दिव्य अलौकिक दर्शन..
राम रामेति यो ब्रूयात् स याति परमां गतिम्॥
जय श्री राम 🚩
भीष्म जानते थे कि कौरव गलत राह पर हैं,
पर घर की शांति के नाम पर चुप रहे।
यही चुप्पी आगे चलकर
हस्तिनापुर के विनाश का कारण बनी।
आज भी, जब बड़े बोलना छोड़ देते हैं,
तो गलतियाँ परंपरा बन जाती हैं।
डूब के मर जाना चाहिए उन सरपंचों को
जो 5 साल सरपंच रहने के बाद भी
दूसरी बार लोगो के सामने हाथ जोड़ने पड़े
काम ऐसा कराओ कि लोग खुद
आगे रहकर बोले कि सरपंच तो आप ही रहोगे।
लोगों के दिलों में जगह बनाना मेरी नजर में
एक सरपंच की सबसे बड़ी उपलब्धि है।