असली दिक्कत YouTube Teachers से नहीं, बल्कि उनकी आवाज़ से है। आज किसी भी परीक्षा में गड़बड़ी हो, पेपर लीक हो, रिज़ल्ट में अन्याय हो या छात्रों के साथ गलत हो, तो यही YouTube Teachers सबसे पहले छात्रों के हक़ की लड़ाई में कूद पड़ते हैं। लाखों छात्रों की आवाज़ बन जाते हैं। सरकार पर दबाव बनता है, सवाल पूछे जाते हैं और जवाब माँगे जाते हैं।
शायद यही कारण है कि कुछ लोगों को शिक्षक नहीं, उनकी सक्रियता खटकती है।लोगों की आँखों की किरकिरी बन जाता है।
इसलिए जो बातें सत्ता सीधे नहीं कह सकती, वही बातें कुछ चेहरे अपने मुख से कह देते हैं।
ध्यान रहे कि "सरकार कहना चाहती थी, अंजना ने कह दिया"
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
लेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने की कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?
अंग्रेज़ डंडा और गोली, जाति देखकर नहीं चलाते थे।
लेकिन यह संघी अंग्रेज तो अंग्रेजों से भी नीच है जो कह रहे हैं कि यदि पुलिस एनकाउंटर करे तो जाति देखकर गोली चलाई जानी चाहिए।
I have written to the Prime Minister recording my dissent from the CBI Director selection process.
I cannot abdicate my constitutional duty by participating in a biased exercise.
The Leader of Opposition is not a rubber stamp.
आप गौर कीजिएगा
देश में सत्ता विरोधी लहर हमेशा वहीं होगी, जहां विपक्ष की सरकारें हैं. एंकर आपको बताएंगे लोग सरकार से परेशान थे.
लेकिन…
वही सत्ता विरोधी लहर BJP सरकारों के लिए नहीं होती. हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र.. कहीं कोई लहर नहीं.
लगभग एक सी स्कीम, एक से फायदे जनता को दिए जाते हैं. फिर भी विपक्ष की सरकार रिपीट नहीं कर पाती.
सत्ता विरोधी लहर का होना स्वाभाविक है, लेकिन BJP की सरकारों के खिलाफ ये क्यों नहीं दिखता?
हरियाणा का किसान मार खाकर भी BJP को चुनता है, क्या ये संभव है?
पहली बार देखा किसी को सस्ते अस्पताल से दिक्कत हो रही है ?
“ख़ान सर इतना पैसा कमा लिए हैं कि 25 रुपये में एक्सरे और 50 रुपये में अल्ट्रा साउंड कर रहे हैं”
“वो टीचर हैं तो बच्चों को पढ़ायें, डॉक्टर बनने की कोशिश ना करें”
यदि 24 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई—चाहे वे जिंदा पकड़े जाएं या मुर्दा—तो फिर सरकार और प्रशासन मुझे फतेहपुर जाने से नहीं रोक पाएगा। साथ ही, प्रदेशव्यापी आंदोलन के लिए तैयार रहें।
“मिस्टर प्रेसिडेंट, आपने हाल ही में कहा था कि अगर यूनाइटेड स्टेट्स नहीं होता, तो यूरोपियन देश जर्मन बोल रहे होते। क्या मैं यह कह सकता हूँ कि अगर हम नहीं होते, तो आप फ्रेंच बोल रहे होते” : किंग चार्ल्स
इसे कहते हैं घर में घुस कर (बोली से) मारना 😄
This boy’s clarity of thought and honesty of expression on caste-based disparities are commendable.
Hats off to you, young man!
He is so right. Reservation is not a poverty alleviation programme but a means to bring equity and equilibrium to the social structure. 🫡🫡
@abhinaymaths मैडम को भी कंफ्यूजन है कि मेरी भाषा शायद गलत है क्या ऐसी भाषा को अपने लिए प्रयोग करना चाहेंगे डर्टी स्वाइन गंदी सूअर इन पर तुरंत कार्रवाई हो और इनको स्कूल से निकाला जाए । टीचर के नाम पर कलंक है । यह जब गार्जियन से ऐसा बर्ताव कर रही है तो बच्चों से कितना गंदा बर्ताव कर रही होंगी
लोगों का एक सवाल रहता है कि संविधान प्रारूप समिति में 7 सदस्य थे फिर अंबेडकर जी को ही संविधान निर्माता क्यों कहा जाता है। बाबा साहेब एक जाति समाज के नहीं बल्कि के वो महापुरुष थे जिन्होंने भारत की संस्कृति, संस्कार को बढ़ाने के लिए संविधान के अंदर शिक्षा का अधिकार दिया। शत शत नमन
“ஒரு சமூகத்தின் முன்னேற்றத்தை, பெண்கள் எட்டியுள்ள முன்னேற்றத்தின் அளவினாலே நான் அளவிடுகிறேன்.” – அண்ணல் அம்பேத்கர்.
புரட்சியாளர் அம்பேத்கர் பிறந்தநாளில், அரசியலமைப்பைப் பாதுகாக்கவும், சமூகநீதியை நிலைநாட்டவும், ஒடுக்கப்பட்ட ஒவ்வொரு குரலையும் காக்கவும் நமது உறுதியை வலிமைப்படுத்துவோம்!
இந்தியாவின் வலிமை நம் பன்மைத்துவம்தான்; திணிக்கப்படுகிற ஒற்றைத்தன்மை அல்ல.
முன்னேற்றமே அளவுகோல் எனில், ஒற்றைத்தன்மையையும், ஏற்றத்தாழ்வுகளையும் புறந்தள்ளி, பன்மைத்துவத்தையும் சமத்துவத்தையும் தேர்ந்தெடுப்போம்; நீதியை நிலைநாட்டுவோம்!
“I measure the progress of a community by the degree of progress which women have achieved.” – B. R. Ambedkar
On the birth anniversary of Babasaheb, let us strengthen our resolve to defend the Constitution, uphold social justice, and protect every oppressed voice.
India’s strength lies in its pluralism, not in imposed uniformity.
If progress is the measure, let us reject uniformity and hierarchy; choose pluralism and equality, and uphold justice.
#JaiBhim 🖤♥️💙