तेरे चेहरे की वो खूबसूरत तस्वीर कहाँ से लाऊँ,
हर लम्हा तेरे साथ गुज़रे, वो तक़दीर कहाँ से लाऊँ। मैं माँगता हूँ हर जनम में साथ तेरा,
तू ही बता... मेरे हाथों में वो लकीर कहाँ से लाऊँ।
सुधरना और बिगड़ना मनुष्य के स्वभाव पर निर्भर करता है,न कि माहौल पर
विभीषण रावण के राज्य में रहकर भी नही बिगड़ा!
और कैकई राम के राज्य में भी रहकर नही सुधरी....