#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
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नहीं, माननीय जस्टिस दीपांकर दत्ता जी ने All India Bar Exam (AIBE) नहीं उत्तीर्ण किया है।
उन्होंने 1989 में हाजरा लॉ कॉलेज, कलकत्ता यूनिवर्सिटी से LL.B. किया और उसी वर्ष (16 नवंबर 1989) बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल में advocate के रूप में enroll हुए। AIBE पहली बार 2011 में शुरू हुआ, इसलिए उनके समय में यह अनिवार्य नहीं था। वे दशकों तक प्रैक्टिस कर चुके हैं।
नहीं, यह परीक्षा अब संवैधानिक रूप से उन पर लागू नहीं की जा सकती।
AIBE केवल 2009-10 से graduating law students के लिए अनिवार्य है (BCI नियम)। Justice दीपांकर दत्ता जी 1989 में graduate और enroll हुए, इसलिए exempt हैं।
पहले से enrolled advocates/judges पर retrospectively AIBE की शर्त लगाना Article 14, legitimate expectation और vested rights का उल्लंघन होगा। Judges की योग्यता Constitution (अनुच्छेद 124/217) में तय है। BCI के अनुसार pre-2010 graduates को छूट है।
नहीं, माननीय जस्टिस दीपांकर दत्ता जी ने जूडिशियरी की कोई परीक्षा (जैसे WBJS) उत्तीर्ण नहीं की है।
वे 1989 में हाजरा लॉ कॉलेज से LL.B. करके उसी साल एडवोकेट के रूप में एनरोल हुए। करीब 17 साल प्रैक्टिस के बाद 2006 में कलकत्ता हाई कोर्ट के जज के रूप में **बार से सीधे एलीवेट** किए गए।
हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट के जज अक्सर अनुभवी एडवोकेट्स में से चुने जाते हैं, बिना ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम के। AIBE की तरह यह भी उनके समय में अनिवार्य नहीं था।
हाँ, 2014 में संसद ने 99वां संविधान संशोधन अधिनियम और NJAC एक्ट पास किया था। इसका मकसद कॉलेजियम प्रणाली को बदलना था।
लेकिन 16 अक्टूबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने 4:1 फैसले में दोनों को असंवैधानिक घोषित कर दिया, क्योंकि यह न्यायिक स्वतंत्रता (मूल संरचना) का उल्लंघन था। परिणामस्वरूप कॉलेजियम प्रणाली बहाल हो गई।
अभी तक कोई नया कानून नहीं बना है।
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath
गत 10 वर्षों से कतिपय ऐसे लोग जो कोर्ट में टेट और नॉन टेट के मुक़दमे करके पदोन्नति फँसाये हुए हैं वे लोग 1 सितम्बर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही अपने मनसूबे पूरे होते देख रहे हैं ।रिव्यू स्वीकार होने पर यही लोग कह रहे थे कि सेवा में बने रहने के लिए टेट से छूट मिलेगी लेकिन पदोन्नति में नहीं मिलेगी,13 की सुनवाई के बाद इनके सुर बदल गए और अब व्याख्या कर रहे हैं कि सेवा में बने रहने के लिए टेट करना होगा ।
राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009 बनने के बाद से लेकर आज तक मूल अधिनियम हो या उसके बाद के संशोधन — कहीं भी “Teacher Eligibility Test (TET)” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। हर जगह केवल “Minimum Qualification / न्यूनतम अर्हता” शब्द का प्रयोग हुआ है।
RTE Act की धारा 23(1) के अंतर्गत केंद्र सरकार ने NCTE को Academic Authority बनाया। इसके बाद NCTE ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना द्वारा पहली बार TET को “Minimum Qualification” का हिस्सा बनाया।
NCTE ने अपने राजपत्र में स्पष्ट किया कि—
• 23 अगस्त 2010 के बाद होने वाली नियुक्तियों की न्यूनतम अर्हता “with TET” होगी।
• 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त/कार्यरत शिक्षकों की न्यूनतम अर्हता “without TET” मानी जाएगी।
बाद में 2017 के संशोधन में यह कहा गया कि 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत शिक्षकों को Section 23(1) के अंतर्गत निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करनी होगी। अब यदि कोई शिक्षक 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त है, तो उसकी निर्धारित न्यूनतम अर्हता वही होगी जो उस समय लागू थी, अर्थात without TET।
जिस एनसीटीई को TET लागू करने की शक्ति है तो क्या उसे परिस्थितियों के अनुसार relaxation देने की शक्ति नहीं है? यह विषय अभी भी न्यायिक व्याख्या के अधीन है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा।
यदि आरटीई में कहीं टेट प्रयोग हुआ है तो उपलब्ध करायें ।चाहे सुप्रीम कोर्ट से हो या संसद से एनसीटीई के राजपत्र 23अगस्त 2010 से टेट आया है उसी के आधार पर mimimum qualification decide होगी ।
Teachers Federation of India के बैनर तले देश के कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लाखों शिक्षकों ने रामलीला मैदान दिल्ली पहुँच कर बता दिया कि शिक्षकों के साथ अन्याय को बर्दास्त नहीं किया जायेगा ।रैली में उपस्थित सभी शिक्षकों ने साफ़ कहा कि भर्ती के समय सरकार द्वारा जो भी नियम और योग्यता निर्धारित की उसे अर्जित करने के बाद ही सभी शिक्षक नियुक्ति पाये है ।सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरटीई से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता थोपा जाना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा ।शिक्षकों ने कहा कि उनकी नियुक्ति सरकार द्वारा की गई इसलिए उसकी सेवा शर्तों की सुरक्षा का दायित्व भी सरकार का है ।फेडरेशन ने माँग की कि भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के retrospective effect को समाप्त करने के लिये क़ानून बनाए ।
रैली के मुख्य अतिथि मा सांसद श्री जगदंबिका पाल ने रैली को संबोधित करते हुए कहा हम देश के शिक्षकों की आबाज को देश यशस्वी प्रधानमंत्री जी तक पहुँचाएँगे और शिक्षकों का अहित नहीं होने दिया जायेगा ।
हम देश भर से आये सभी साथियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं ।
#NoTetBeforeRteAct
@narendramodi@jagdambikapalmp@dpradhanbjp@AmitShah@PMOIndia
दिल्ली
➡रामलीला मैदान में शिक्षकों की रैली
➡टीईटी के खिलाफ शिक्षकों की रैली
➡देशभर के शिक्षक दिल्ली में इकट्ठा
➡सभी शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य
➡SC के फैसले का विरोध कर रहे शिक्षक
#TeachersProtest#DelhiRally#TETOpposition
पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री आदरणीया दीदी @smritiirani जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं 💐 माँ जगदम्बा आपको उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु प्रदान करें।🙏💐
#04_April_MarchToDelhi#NoTetBeforeRteAct
आगामी 04 अप्रैल को रामलीला मैदान में होने वाली महा रैली की तैयारियों को दृष्टिगत रखते उत्तर प्रदेश के संगठन उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की बैठक संपन्न हुई जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के सभी जिला अध्यक्ष और मंत्रियों ने भाग लिया ।सभी ने अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने का संकल्प लिया ।