27 फ़रवरी को वित्त-विनियोग विधेयक 2026 पारित किया जायेगा जिसमें माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा काफ़ी घोषणाएँ किये जाने की संभावना है। #प्रोबेशन_में_पूर्ण_वेतन यह एक ज्वलंत व भावनात्मक मुद्दा है, इसमें सफलता मिलने की काफ़ी संभावना हैं। सभी को प्रयास जारी रखने चाहिए।
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भजनलाल सरकार.... बेरोजगारो के सपने !
BJP प्रवक्ता ने प्रशासनिक अफसरो पर RAS MAINS के पेपरलीक करने का लगाया आरोप। परीक्षा अभी होनी है.
#RAS_MAINS_स्थगित_करो#RASMAINSPOSTPONE
RPSC द्वारा आयोजित होने वाली RAS Mains परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कारण-
◾️सरकार द्वारा अपने 40 विधायकों और दोनों डिप्टी CM की अनुशंसा को दरकिनार करके परीक्षा स्थगित ना करना।
◾️बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष श्री मदन राठौर द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद भी सरकार का अड़ियल रवैया।
◾️बीजेपी के प्रवक्ता द्वारा पेपर लीक की संभावना जताना।
◾️आरपीएससी और DIPR के ट्वीट पर परीक्षा के समर्थन में पीआर टीम से कॉमेंट करवाना।
◾️आंदोलनरत हजारों अभ्यर्थियों की माँग को दरकिनार करना।
आपको इस बारे में क्या मत है?
सवाल यह है कि संगठन के मुखिया, सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के लोग और कई विधायकों के बोलने के बाद भी सुनवाई तो छोड़ो कोई ध्यान तक नहीं दिया जाना दर्शाता है की आपस में सबकुछ ठीक नहीं है। सरकार की हठधर्मिता के क्या कारण हो सकते हैं? यहीं सवाल हर युवा की जुबान पर है।
#RASMAINSPOSTPONE
#जयपुर
RAS-2024 मुख्य परीक्षा स्थगित करने की मांग
अभ्यर्थियों ने भूख हड़ताल की शुरू
छात्रों का धरना तीसरे दिन भी जारी
सरकार की चुप्पी अब पीड़ादायक- छात्र
10 मंत्री, 40 MLA भी समर्थन पत्र दे चुके
पहले RAS-2023 की प्रक्रिया पूरी की जाए.
#Jaipur#RajasthanWithNews18
ये परीक्षा नहीं, सूली है!
कहते हैं फिल्में समाज का आईना होता है। सिस्टम का भी। यह वीडियो यही दर्द है। बैचेनी है। माता पिता की चिंता है। यह बताता है कि परीक्षाएं नहीं है। ये तंत्र की क्रूरता का महापर्व है। जहां छात्र नहीं, कैदी जाते हैं। जहां ज्ञान नहीं, अपमान मिलता है।
लड़कियों की नथ? उतरवा लो। चूड़ियां? तोड़ दो। कान के झुमके? खींच लो। रक्षा सूत्र? अपवित्र घोषित।
लड़कों की बेल्ट? हटा दो। कमीज की बटन? काट दो। जूते? शक की निगाह से देखो। घड़ी? मानो बम हो।
एक मिनट लेट? दरवाज़ा बंद। सपना खत्म। साल बर्बाद। तंत्र को शर्म नहीं आती। सरकारें अंधी हैं।व्यवस्था बहरी है। इनका ईमान लूटा हुआ है।
पेपर लीक? कोई जवाब नहीं। घोटाले? मौन व्रत।रिश्तेदारों की सेटिंग? सरकारी चुप्पी।
सिर्फ आम छात्र पर वार। क्योंकि वो सबसे आसान है। क्योंकि वो जवाब नहीं दे सकता। क्योंकि उसके पास मंत्री नहीं है।
ये नकल विरोधी नहीं है। ये "छात्र विरोधी" है। ये विद्या का चीरहरण है। और चुप दर्शक हैं हम सब।
सरकारें कहती हैं – सुरक्षा चाहिए। मैं पूछता हूं–आत्मसम्मान की हत्या क्यों? कपड़े काटना जरूरी था? बेटियों की नथ तोड़ना कब से नीति बन गई?
हर साल यही तमाशा। हर साल यही बर्बरता। हर साल वही माफ़ी मांगती आंखें –साहब, बस एक मौका दे दो…
और जवाब होता है –बाहर जाओ। नियम तोड़ दिया।
नियम किसके लिए हैं? गरीब के बच्चे के लिए।कोचिंग न जाने वाले के लिए। रेलवे से सफर कर आने वाले के लिए।
क्यों नहीं पूछते –वो पेपर कहां से लीक हुआ? वो जवाब किसने बेचा? वो सीट किस नेता के रिश्तेदार को मिली?
लेकिन नहीं। सत्ता को दोष नहीं देना है। छात्र को कटघरे में खड़ा करना है। उसका कंधा टूटे, सपना बिखरे –कोई परवाह नहीं।
अब बहुत हुआ। अब गुस्सा चाहिए। अब सवाल चाहिए। अब प्रतिरोध चाहिए। वरना अगली बार –परीक्षा में जाने से पहले कफ़न पहनना पड़ेगा।
माननीय मुख्यमंत्री जी,
“मुट्ठी भर बाजरे के लिए राजस्थान की बादशाहत मत खो दीजिएगा”
चुनावों के समय वोट सिर्फ ब्यूरोक्रेसी के लोग नहीं देंगे बल्कि RAS Mains और स्कूल व्याख्याता के अभ्यर्थी और उनके परिवार के लोग भी देंगे।
जनभावना को समझने की आवश्यकता है।
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RAS Mains तो पिछली बार भी पोस्टपोन्ड नही हो रही थी। अधिकारियों और RPSC ने साफ मना कर दिया था।
बाद में किरोड़ी जी ने शाम दंड भेद सब लगाया। दिल्ली तक। तब जाकर आगे खिसकी थी। किरोड़ी जी ने आश्वाशन दिया था धरनास्थल पर। वादा निभाया
हर कोई किरोड़ी लाल नही बन सकता
लेकिन इस बार