सभी बहुत चिंतित हैं। सरकार को बात करनी चाहिए। सरकार नहीं करती है तो समाज को आगे आना चाहिए। सोनम के साथ-साथ छात्र भी अनशन पर बैठे हैं। कितने साल तक परीक्षाओं में चोरी और धांधली को यह देश स्वीकार करेगा। 13 साल बीत गए फिर भी परीक्षाएँ विश्वसनीय नहीं हो सकी हैं। बात केवल परीक्षा की नहीं है, पढ़ाई के मामले में भी जो नुकसान हुआ है, वहाँ से वापसी करना संभव नहीं है।
इसी अवसर पर गंगा की सफाई और अविरलता को लेकर प्रो जी डी अग्रवाल के अनशन को याद करने की ज़रूरत है। 2018 में 109 दिनों के अनशन के बाद उनकी मौत हो गई थी। तब काफी सवाल उठे थे। मीडिया की पुरानी रिपोर्ट आप देख सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को तीन तीन पत्र लिखे। उन पत्रों को निकाल कर पढ़ सकते हैं। गंगा के लिए प्रो जी डी अग्रवाल ने जान दे दी और गंगा के नाम पर राजनीति करने वालों ने उन्हें भुला दिया। गंगा की समस्याओं का समाधान करने के बजाए गंगा के घाट पर आरती का आयोजन कर लोगों के सवालों की धारा मोड़ दी गई। अच्छा होता कि प्रो जी डी अग्रवाल को सुना जाता, गंगा भी साफ होती और तब उसके किनारे आरती की शोभा और दिव्य होती। जो मीडिया जंतर मंतर नहीं जा पा रहा है वह गंगा के नाम पर प्रो जी डी अग्रवाल के अनशन की कहानी के पन्ने फिर से पलट सकता है। गंगा के लिए तो बोल ही सकते हैं।
ये क्या बत्तमीजी है? अब बजरंगदल में महिलाएं भी शामिल हो गई है क्या?
दिल्ली के सेंट्रल पार्क का ये वीडियो है जहां एक हिंदू महिला जैसे ही दाढ़ी टोपी के साथ कमजोर बुजुर्ग पर नज़र पड़ा उस महिला ने अपनी औकाद दिखाना शुरू कर दी!
हेलो @DelhiPolice कार्यवाही होगी या नज़र अंदाज़ करोगे??
एक युवक दुकान से कुछ लेकर आ रहा था,
तभी सड़क पर एक लड़की अचानक छत से गिरी, पहले तो डर गया
जब उसने देखा बच्ची है, उसे उठा कर तुरंत हॉस्पिटल भागा ,अपना सामानभी नहीं उठाया,
वह जानता था लड़की को अगर समय पर इलाज मिल जाए तो उसकी जिंदगी बच सकती है।
युवक की मानवता को सलाम।
15 दिन से सोनम वांगचुक इंतज़ार कर रहे हैं लेकिन सत्ता के दरवाज़े बंद हैं।
क्या अहंकार इतना बड़ा हो गया कि देश के एक वैज्ञानिक और शिक्षाविद से दो मिनट बात करना भी मंज़ूर नहीं।
अंग्रेज़ों पर इतिहास में कई मौकों पर आंदोलनकारियों से बातचीत करने का उल्लेख मिलता है, लेकिन आज सवाल यह है कि लोकतांत्रिक सरकार संवाद से क्यों बच रही है।
जनता ने सरकार चुनी थी, ख़ामोशी नहीं।
59 साल के @Wangchuk66 देश के करोड़ों युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए 14 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं, उनकी हालत बिगड़ रही है, 9 किलो वजन कम हो चुका है, लेकिन मेलोडी मोदी पर घंटों ख़बर चलाने वाला निर्दयी गोदी मीडिया की आत्मा मर चुकी है उसको करोड़ों युवाओं के मुद्दे से कोई मतलब नही।
तुम कब जागोगे युवा शक्ति?
पहुँचो जंतर मंतर।
"मेरे शरीर से चर्बी के साथ मांसपेशियां भी कम हो गई हैं। हड्डियां दिखने लगी हैं, लेकिन मैं अब भी खुद को ऊर्जावान महसूस कर रहा हूं।" — @Wangchuk66
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 13 दिन पूरे होने पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका उपवास अब स्थिर अवस्था में पहुंच गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
Sonam Wangchuk जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
आंदोलन की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है, जिसमें परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।
सोनम वांगचुक सर की तबियत बिगड़ती जा रही है🤯
जागो भारत के लोगों ये तुम्हारे लिए लड़ रहे है, 😳
अब नहीं जागे तो सब खो दोगे!😱🙏
इस्तीफा मिलने तक यही बैठे रहेंगे 😳
लगातार सोनम वांगचुक सर की तबियत बिगड़ रही है,
पर सोई हुई सरकार को कोई मतलब नहीं है,
क्या ये लोग नहीं चाहते कि देश की शिक्षा व्यवस्था सही हो,
आप अपना समर्थन कमेंट के माध्यम से ज़रूर करिए।
यह है दीपांशी. यूपी के बदायूं की रहने वाली हैं। कोविड में मां-बाप खत्म हो गए थे, तो इनका जिम्मा लिया रियासत उर्फ बबलू सिद्दीकी ने।
बबलू सिद्दीकी ने भाई का हक अदा करते हुए दीपांशी की शादी कमलकांत से हिंदू रीति रिवाज से पूरे धूमधाम से बदायूं के एसएस ग्रीन पैलेस में किया।
बबलू सिद्दीकी ने दीपांशी को अगर बहन माना तो उस रिश्ते का मान रखते हुए दीपांशी की जिम्मेदारी उठाई और उसका कन्यादान भी किया।
मुसीबत में फिर आगे आए मुस्लिम भाई लेकिन देश का मीडिया थोड़ी दिखाएगा , जब कोई एक मुसलमान कुछ ग़लत करे तो मीडिया सब को ग़लत दिखाता है लेकिन आज कोई नहीं दिखाएगा इनकी अच्छाई .
यह मुर्दों का देश है साधो।।
सोनम वांगचुक की हालत और ज्यादा गंभीर। अब तो खङे होने में भी मुश्किल हो रही है ।
पेपर लीक जैसे गंभीर मसले पर वांगचुक प्रोटेस्ट कर रहे हैं पर क्या मजाल जो सरकार पर असर पङे।