देश को ये तस्वीरें जरूर देखनी चाहिए..
देखिए तिजारा (अलवर) में कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों को भाजपा और पुलिस के चंगुल से किस तरह छुड़ाया गया।
हालात ऐसे बना दिए गए कि पार्षदों को मजबूरी में बस के शीशे तोड़कर बाहर निकलना पड़ा। महिला पार्षदों को भी बस से कूदकर बाहर निकलना पड़ा।
21 सितंबर को वोटिंग से पहले 2 दिन तक राजस्थान पुलिस और हरियाणा पुलिस ने सत्ता के इशारे पर कांग्रेस के पार्षदों को बंधक बनाकर रखा, ताकि वो अपने वोट का इस्तेमाल न कर सकें।
सोचिए.. जिस BJP को राजस्थान की जनता ने नकार दिया, उसने प्रदेशभर में लोकतंत्र को लूटने के लिए सत्ता के दुरुपयोग से लेकर पुलिसिया तंत्र के बेजा इस्तेमाल तक तानाशाही के क्या-क्या हथकंडे अपनाए हैं।
सत्ता के दम पर चुने हुए कांग्रेस पार्षदों पर फर्जी मुकदमे लगाए गए, जबरन उठाया गया, बंधक बनाया गया, धमकाया गया, ताकी उनसे वोटिंग का अधिकार छीन सकें। लेकिन भाजपाई सत्ता की सारी ताकत के बावजूद तिजारा की जनता की ताकत के आगे तानाशाही को झुकना पड़ा।
भाजपा और पुलिस के शिकंजे से निकलकर रात 10 बजे कांग्रेस पार्षदों ने तिजारा पहुंचकर वोट किया और कांग्रेस की जीत हुई।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, चुनाव जीतने के लिए आपने जिस तरह लोकतंत्र को कलंकित किया, उसे राजस्थान न कभी भूलेगा, न ही कभी आपको माफ़ करेगा।
Chhatron Ki Goonj में छात्र कम, Congress का talent hunt ज़्यादा दिख गया! मंच पर “आम छात्र” बनकर अपनी परेशानियां बताने वाले congress worker निकल आए तो सवाल उठना लाज़मी है कि Rahul Gandhi के event में students की आवाज़ थी या Congress workers की rehearsed performance?
Tanay Sharma से Radha Malviya और फिर Ranjit Kisanvanshi तक, तीन किरदार, एक मंच और transparency गायब! पूरा मामला देखिए और समझिए क्यों इसे लोग “Chhatron Ki Goonj” नहीं, “Jhooth Ki Goonj” कह रहे हैं।
@harshkumarnayak
Arnab's Pure Gold As Naraaz FooFaa Ji Song For Rahul Goes Viral
Congress Sulks Over BRICS
Twenty-three years ago, Rahul Gandhi made his political debut, hailed by the Lutyens media as India's brightest new hope. Today, Arnab argues, that promise has curdled into something else entirely: the ‘Naraaz FooFaa’ of Indian politics a perpetually disgruntled uncle who finds fault in every national achievement. In this fiery segment, Arnab traces Rahul Gandhi's journey from his hyped 2003 debut to his controversial Parliament moments, including the viral wink and the aisle-crossing hug attempt with PM Modi.
He then rattles off a long list of grievances raised by the 'Naraaz Fufa brigade' from the Statue of Unity and Vande Bharat trains to India's 7.8% GDP growth, the Dedicated Freight Corridor, and the Semicon India push questioning why achievements are met with criticism instead of celebration.
The episode closes with viral meme videos mocking the opposition's constant negativity 😅
Credit : Republic Media Network.
In just 1 hour of Rahul Gandhi’s Jhooth ki Goonj at Indore, we found 11 false statements and 1 misleading statement.
5 Rallies and 52 Lies till now.
Days of Rahul Gandhi shooting lies and scooting away to Thailand are over.
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की स्वर्गीय माताजी के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे जाएं और उस पर राहुल गांधी हंसें—यह दृश्य बेहद शर्मनाक और पीड़ादायक है।
मां राजनीति का विषय नहीं होती। मां का अपमान किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
राजनीतिक विरोध कीजिए, लेकिन प्रधानमंत्री जी की स्वर्गीय माताजी को लेकर कही गई अमर्यादित बात पर हंसना आपके राजनीतिक संस्कारों को स्वयं उजागर करता है।
राहुल गांधी जी, राजनीतिक विरोध में मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ देना न लोकतंत्र है, न सेवा और न ही संस्कार। देश की मातृशक्ति सब देख रही है। ऐसी असंवेदनशीलता और उपहास किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
This woman and her husband have git a camera 📸 that could bring any pictures come too reality. Everything was going real good until greed hit them. What heppened next would make you feel bad but watchannd see.
🎬
Wait For End 🤣🤣
ट्रेन में टिकट मांगने पर मोहतरमा ने अपने कपड़े फाड़ लिए और उल्टा टीटी पर ही छेड़छाड़ का आरोप लगाने लगी
वो तो शुक्र है कि टीटी साहब के दूसरे फोन में थर्ड आई कैमरा चालू था 😄😃
#indianrailways#virelvideo
किसी भूखे को खाना खिलाना सिर्फ पेट भरना नहीं,
बल्कि उसके चेहरे पर मुस्कान लाना है। ❤️
किसी जरूरतमंद की मदद करना छोटी बात नहीं,
क्योंकि इंसानियत का सबसे बड़ा धर्म किसी के काम आना है
. हमारे पास बहुत कुछ हो और हम बाँट न सकें,
तो उस दौलत का क्या फायदा? असली खुशी किसी के चेहरे की मुस्कान में है।
किसी को एक वक्त का खाना देना,
किसी के लिए पूरी दुनिया की उम्मीद बन सकता है।
मदद करने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं,
बस दिल में इंसानियत और हाथों में सच्चाई होनी चाहिए।
. जिंदगी में नाम और पैसा तो बहुत लोग कमाते हैं,
लेकिन किसी के मुश्किल वक्त में साथ खड़े होने वाले ही असली इंसान कहलाते हैं।
जितना हो सके किसी की मदद करो,
क्योंकि आज तुम्हारा हाथ ऊपर है, कल किसी और का सहारा तुम्हें भी चाहिए हो सकता है।
किसी की भूख मिटाने से बड़ा कोई दान नहीं,
और किसी के आँसू पोंछने से बड़ी कोई इंसानियत नहीं। 🙏
BRICS: नॉन वेज गायब
यह जो पूरा इसमें debate ही रहता है। मेरी choice है, मेरी मर्जी है, मुझे जो खाना है मैं खाऊंगा। भाई जितना तुम्हें तुम्हारी मर्जी प्रिय है, कम से कम थोड़ा बहुत उस प्राणी की मर्जी भी पूछ लिया करो कि तू मरने को तैयार है, तेरी मर्जी है कि तू अब कटना चाहता है किसी के स्वाद के लिए?