अगर एक परीक्षा का पेपर सुरक्षित तरीके से एक जगह से दूसरी जगह नहीं पहुँचाया जा सकता, और उसके लिए भी राफेल जैसी व्यवस्था का सहारा लेना पड़े, तो यह शिक्षा व्यवस्था की सफलता नहीं, सरकार की नाकामी का प्रमाण है।
ऐसे शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
2005 में सेवा निवृत्त हुए उस ऑफिसर ने विवेकानंद फाउंडेशन बनाया, जिसने कई एक्टिविस्ट्स को इकट्ठा कर के सुचारू रूप से देश चलाती UPA सरकार को गिराया.
इस फाउंडेशन को भारत का “डीप स्टेट” कह सकते हैं, जिसकी बुद्धि से पहले ‘झाड़ू’ आई और अब शायद कॉकरोच की उत्पत्ति हो रही है!
बात के एक दूसरे छोर को पकड़ें, तो मसूद अज़हर को छोड़ कर आने, पुलवामा में कई किलो विस्फोटक से अटैक और पहलगाम में बेरोकटोक आतंकवादियों के पहुँच जाने की कड़ियाँ भी साथ जुड़तीं दिखतीं हैं!!
लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार तुम्हारा
तुम झूठ को सच लिख दो अखबार तुम्हारा
इस दौर के फरियादी जायें तो कहा जायें
कानून तुम्हारा है, दरबार तुम्हारा !
(मीनाक्षी नटराजन जी के केस में @DrAMSinghvi की दलील सुनिए… ‘न्याय’ और ‘अन्याय’ का अंतर तुरन्त समझ जाएँगे)
“जहाज़ किसी भी देश के झंडे वाला क्यों न हो अमेरिका कैसे हमले कर रहा है? क्या ये सैन्य जहाज़ थे? अमेरिकी हमले ग़ैरक़ानूनी हैं। ट्रंप की दादागिरी है। इनमें भारतीयों की जान गई है। हमारे देश के प्रधानमंत्री ने एक शब्द तक नहीं बोला है” : @asadowaisi
अमरीका ने चार दिन में हिंदुस्तान के तीन जहाज़ों पर हमला किया, बिना चेतावनी दिए, और हमारे कई नागरिकों को मार दिया। फिर भी मोदी सरकार चुप्पी साधे हुए हैं!
4000 EVM जलाने वाली आग हो या शिक्षा मंत्रालय की आग; देशवासी सब समझ रहे हैं.
पूरा देश भाजपा की नागरिकखोर सरकार के महाभ्रष्टाचार का एक बहुत बड़ा सुबूत बन चुका है. आख़िर कितने सुबूत ख़त्म किए जाएँगे?🤔
मकाफ़ात ए अमल की चक्की चलती बहोत आहिस्ता है, मगर पीसती बहोत बारीक़ है।
किसी की मौत पर जश्न मनाने से पहले ये ज़रूर सोचना, मौत का फ़रिश्ता तुम्हारे पास भी पहुँचना है। 👇