कल रात में Pragyesh sir ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो डाला हैं जिसमें उन्होंने #BPSC मुख्य परीक्षा (Mains) में अपनाई जाने वाली ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में गंभीर तकनीकी सुरक्षा खामियों और डेटा प्रबंधन की चिंताओं पर अपना पक्ष रखा है।
उन्होंने अपने वीडियो में जो खुलासे किए हैं उसको देखकर मैं हैरान और दंग रह गया और मन ही मन सोचने लगा कि ये #Bpsc का विवाद अब इतनी आसानी से सुलझने वाला नहीं हैं लाडले...👽
आइये Pragyesh सर के द्वारा किये गये खुलासे को आसान शब्दों में समझते हैं,यह कहानी तब शुरू होती है जब #Bpsc नें 71th मेंस की Unevaluated कॉपी को डाउनलोड करने के लिए अपने पोर्टल पर एक लिंक साझा किया ये लिंक छात्रों को थर्ड पार्टी वेबसाइट पर लेकर गया,जहां पर छात्रों ने अपने लॉगिन आईडी और पासवर्ड डालकर ओटीपी से वेरीफाई कर अपनी-अपनी उत्तर पुस्तिका को डाउनलोड किया।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब एप्पल के सफारी के प्राइवेट वाले मोड में Pragyesh सर नें कुछ बेसिक कोड का इस्तेमाल किया और बड़ी आसानी से उनको पूरी की पूरी कॉपी का एक्सेस उनको मिल गया।यही नहीं अभी और सुनिए Pragyesh सर को जो कॉपी मिली,वो कॉपी वो नहीं थी जो छात्रों को मुहैया कराई गई।
छात्रों को जो कॉपी मिलती है उसमें पृष्ठ संख्या तीन से शुरूआत होती है,और उस कॉपी में डमी कोड या सेकंड कोड नहीं रहता हैं लेकिन हैरत करने वाली बात यह है की Pragyesh सर को जो कॉपी मिली वह पृष्ठ संख्या 1 से शुरू होती है और उसमें डमी कोड आसानी से देखने को मिल रहीं हैं,जो एक बहुत ही गंभीर मसला है।
डमी नंबर या सेकंड कोड कैंडिडेट की पहचान से जुड़ा हुआ होता है इसका उपयोग आमतौर पर उम्मीदवार की पहचान को गोपनीय रखने के लिए किया जाता है,अभ्यर्थी की पहचान उजागर ना हो इसके लिए इस्तेमाल किया जाता है,ताकि किसी को पता ना चल पाये कि कौन सी कॉपी किसकी हैं?
अगर डमी नंबर का दिखना कोई साधारण बात होता तो कैंडिडेट को भी दिखा दिया जाता, इसको छुपाने की हटाने की जरूरत ही नहीं पड़ती,जिस कोड नंबर से रौल नंबर को रिप्लेस किया गया, उसका इतनी आसानी से एक्सेस हो जाना ये परीक्षा की सुचिता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है
हैरत की बात तो ये भी है कि ये मेंस की स्कैन कॉपी डायरेक्टली सिंगापुर के सर्वर से आ रही थी,ऐसा सर्वर जो भारत सरकार से सूचीबद्ध भी नहीं है।अब सवाल ये है कि प्रतिष्ठित सिविल सेवा जैसी परीक्षा की कॉन्फिडेंशियल कॉपी अगर विदेश में मिले तो पहला सवाल लोकेशन का हो ना हो,प्राधिकार का जरूर होता है कि किसने स्वीकृति दी?किस कॉन्ट्रैक्ट के तहत किया गया? किस प्रतिभूति आकलन के बाद किया गया ?
जब थोड़ी बहुत टेक्निकल समझ रखने वाले Pragyesh सर इतनी आसानी से कॉपी को डमी कोड के साथ एक्सेस कर सकते हैं,तो सोचिये कोई साइबर हैकर और क्या क्या किया होगा ?
यहाँ तक कि पिछले 6 महीने से प्रगयेश सर #Bpsc से ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग के ऑडिट ट्रेल की जानकारी मांग रहें हैं कि आपके OSM प्रणाली में किसी भी बदलाव का कोई पारदर्शी और अपरिवर्तनीय रिकॉर्ड नहीं दिखता है।मार्क्स बदलने की सुविधा है,ये बात तो आपके परीक्षा नियंत्रक ने भी कबूला है लेकिन सवाल हैं कि किसने, कब और क्यों बदला, इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिलता हैं।
ये बहुत ही हास्यास्पद है कि एकतरफ #Bpsc निष्पक्षता,सुचिता,पारदर्शिता और अपने अभेद किला का ढ़ोल पिटती हैं,चयनित छात्रों से और सरकार से अपना #PR करवाती हैं, वहीं दूसरे तरफ इनके सेंसेटिव और गोपनीय से गोपनीय इनफॉरमेशन का भी एक्सेस कोई व्यक्ति आसानी से निकाल लें रहा हैं।
एक मिनट में आपका #अभेद किला ढह गया और साहब चले थे यूपीएससी जैसे संस्थान को टक्कर देने,खाली झमकवला से होई 😂
उम्मीद करते हैं कि आयोग मामले की गंभीरता को समझ कर Pragyesh सर के द्वारा लगाये गये आरोपों का जल्द से जल्द खंडन करें।
#BpscScam
23 जून को जंतर-मंतर की घटना पर पुलिस कहती है कि संजय कुमार की चोटें सामान्य थीं और खोपड़ी में दरार की बात निराधार है। लेकिन आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में वह खुद “7 टांके”, “मरने की स्थिति” और “307 बनता था” जैसी बातें कह रहा हैं।
वह यह भी दावा कर रहा हैं कि संजय कुमार की बेटी निशु, थाने के बाहर खड़े होकर कह रही थी कि “अगर मेरे बाप को इंसाफ नहीं मिला तो हम जहर खाकर मर जाएंगे।” साथ ही उनका दावा है कि वे जेल तक नहीं गए और “कपिल मिश्रा अपने बड़े भाई हैं”, “चिराग पासवान अपने बड़े भाई हैं” तथा “सबका सपोर्ट है।"
तो सवाल है कि अगर घायल की हालत इतनी गंभीर थी और 7 टांके लगे थे, तो पुलिस की MLC में चोटें सामान्य कैसे बताई गईं? अगर धारा 307 का मामला बनता था, तो आरोपी जेल क्यों नहीं गया?
“कपिल मिश्रा के फोन के बाद छोड़ने का दावा सच है या झूठ? क्या पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच करेगी? जब राजनीतिक संरक्षण का इतना स्पष्ट दावा सामने आ रहा है, तो पुलिस यह क्यों नहीं स्पष्ट कर रही कि इस मामले में किसी अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप की कोई भूमिका थी या नहीं?”
आखिर पुलिस के रिकॉर्ड और आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में इतना बड़ा अंतर क्यों है? हमें इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अपने पीड़ित परिवार को न्याय दिला कर रहेंगे। जय भीम, जय भारत।।
पॉडकास्ट सुनने के बाद सबको अपनी सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए। इस तरह के लोग जो प्रधानमंत्री तक से संपर्क का दावा कर रहे हैं, हिंसा की बात कबूल कर रहे हैं, किसी के लिए भी ख़तरा बन सकते हैं। सबसे पहले तो प्रधानमंत्री को ही आगे आकर पूछना चाहिए कि अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई है।
ऐसे ही नेताओं से रिश्तों के दम पर ये शख़्स हिंसक बयान देता है . मुस्लिमों को मारने की धमकी देता है . दलितों पर हमले करता है और इसका कुछ नहीं बिगड़ता है .
स्वतंत्र भारद्वाज जैसे नफरती गुंडों की जगह जेल है .
आप स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो सुनिए और सोचिए...
खुले मंच से इतना सब कहने के बाद भी दिल्ली पुलिस ने सिर्फ एक मामूली FIR दर्ज की, लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया।
जबकि इस मामले में हत्या के प्रयास की धारा लगनी चाहिए थी, लेकिन यह धारा नहीं लगाई गई।
स्वतंत्र भारद्वाज ने वीडियो में यह भी बताया कि उसका किन बड़े नेताओं से संपर्क है और उसे किनका संरक्षण प्राप्त है।
उसने अपने वीडियो में दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा से लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान तक का जिक्र किया है।
वीडियो वायरल होने के बाद निशु आज़ाद ने नेता विपक्ष राहुल गांधी जी से न्याय दिलाने की मांग की है।
: महिला कांग्रेस अध्यक्ष @LambaAlka जी
📍 दिल्ली