प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
महाराष्ट्र में आज अंबेडकरवादियों ने आरएसएस पर बैन की मांग करते हुए संविधान बचाने की आवाज़ उठाई। यह संघर्ष नफरत के खिलाफ और बराबरी के हक़ में है। डॉ. बाबासाहब अंबेडकर के अनुयायी आज भी न्याय और इंसाफ़ की राह पर हैं।
जरा सोचिए BJP के राज में एक दलित IPS अधिकारी को जातिसूचक गालियाँ दी गई उसने शिकायत भी की लेकिन जब कोई कार्यवाही नहीं हुई हताशा में उन्होंने आत्महत्या कर ली।
BJP को इन गुनाहो की सजा कब मिलेगी?
संविधान निर्माण में बाबासाहेब के योगदान का क्रेडिट छीना जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट के जज पर जूता फेंका जा रहा है.
भेदभाव के चलते IPS को आत्महत्या करनी पड़ रही है.
सामान्य दलित व्यक्ति की मॉब लिंचिंग कर दी जा रही है.
@Mayawati@bspindia@BhimArmyChief@RahulGandhi@kharge
हरियाणा के IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार जी की आत्महत्या उस गहराते सामाजिक ज़हर का प्रतीक है, जो जाति के नाम पर इंसानियत को कुचल रहा है।
जब एक IPS अधिकारी को उसकी जाति के कारण अपमान और अत्याचार सहने पड़ें - तो सोचिए, आम दलित नागरिक किन हालात में जी रहा होगा।
@kharge@Mayawati
संघीयों को तकलीफ़ “सनातन धर्म के अपमान” से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि सदियों से दबाए गए वर्ग का व्यक्ति न्याय की सर्वोच्च कुर्सी पर कैसे बैठ गया है? यह वही सोच है जो समानता से डरती है, और न्याय को आज भी अपने वर्चस्व की सीमा में बाँधकर रखना चाहती है।
#Cjigavai
#CJI बीआर गवई पर अदालत में जूता फेकने की कोशिश की गई! देश का मुख्य न्यायधीश सुरक्षित नहीं है,धर्म और आस्था के नाम पर बहुजनों को निशाना बनाया जा रहा है, CJI सीजीआई के साथ हुई घटना पर हम कड़ी निंदा करते हैं..
नफ़रती और संकीर्ण मानसिकता के लोग CJI के पद पर एक दलित समाज के व्यक्ति को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।
मोदी राज में नफ़रतियों का दुस्साहस देखिए देश के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने का प्रयास किया गया।
ये घृणा की पराकाष्ठा है।
#cjibrgavai#RahulGandhi#NarendraModi
माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की सरकार ने जातिगत रैलियों, FIR और पुलिस रिकॉर्ड में जाति लिखने पर रोक लगा दी है। सरकार इसे “समानता” का कदम बता रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि यह फैसला जातिवाद को खत्म करने में नाकाम सरकार की हताशा और बहुजन समाज की आवाज़ दबाने की साज़िश है।
हैरत की बात यह है कि अपने धर्म के भगवान को भी अपनी जाति का बताकर जाति पर गर्व करने की नसीहत देने वाले, हनुमान जी की जाति बताने वाले और जाति के नाम पर सम्मेलन करवाने वाली सरकार के मुखिया को अब जाति के नाम पर राजनीति असंवैधानिक और समाज तोड़ने वाली लगने लगी है।
खैर, मान लेते हैं कि यह आदेश स्वागत योग्य है, लेकिन यह अधूरा है। अगर वास्तव में अदालतें और सरकार देश और प्रदेश से जातिवाद मिटाना चाहती हैं, तो सिर्फ जाति आधारित रैलियों को रोककर या FIR और पट्टियों से जाति हटाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि नामों के बाद लगने वाले जाति ‘सरनेम’ हटाने का आदेश भी पारित करना पड़ेगा।
और हां, जातिगत असमानता और भेदभाव खत्म करना है तो जाति देखकर की जाने वाली ट्रांसफर-पोस्टिंग, इंटरव्यू, नियुक्तियाँ, सरकारी ठेके और अपराधियों या माफियाओं पर कार्रवाई में भी रोक लगानी होगी।
हालांकि यह आदेश केवल कागजी खानापूर्ति न बने, इसके लिए यह सरकारों की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है। वरना इन आदेशों की आड़ में कमजोर तबके के लोग परेशान होते रहेंगे, जबकि जाति के नाम पर बनी तमाम सेनाओं को तलवार लहराकर गुंडई करने की खुली छूट मिलती रहेगी।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की लड़ाई जातिवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने और संवैधानिक बराबरी व सामाजिक न्याय की है। इसलिए हमारी मांग है कि अगर जातिवाद वास्तव में खत्म करना है, तो जाति आधारित उत्पीड़न और जाति बताने वाले सरनेम पर कठोर प्रतिबंध का आदेश जारी किया जाए।
"सत्ता के लिए जाति चले तो नियम,
हक़ की लड़ाई में जाति चले तो अपराध!"
#WamanMeshram
मेरे दाढ़ी में जितने बाल है उतने बहुजनों के बच्चों को शिक्षित कर उन्हें जब तक ब्राह्मणों के छाति पर चढ़ाकर नचवाता नहीं, तब तक मैं पैरो में चप्पल नहीं पहनूँगा.
रयत शिक्षण संस्था के संस्थापक कर्मवीर भाऊराव पाटील जी के 138 वें जयन्ती के अवसर पर सभी मूलनिवासी बहुजनों को हार्दिक बधाईयां!
चीफ जस्टिस B.R. गवई जी पर किसी भी तरह का हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे बहुजन समाज की गरिमा पर हमला है।
आज हमें एकजुट होकर यह संदेश देना होगा कि हम अपने न्यायप्रिय और समाज सुधारक चीफ जस्टिस के साथ खड़े हैं।
#We_Stand_With_BR_Gavai#BahujanUnity
#देश_में_ब्राह्मणवाद केवल 3% है।
लेकिन एकतरफ़ा मलाई में सबसे आगे ब्राह्मण क्यों ? (1) लोकसभा में - 48% ब्राह्मण
(2) राज्यसभा में - 36% ब्राह्मण
(3) मंत्रीसचिव में - 64% ब्राह्मण
(4) अतिरिक्त सचिव - 62% ब्राह्मण
(5) पर्सनल सचिव - 70% ब्राह्मण
(7) सुप्रीम कोर्ट में - 85% ब्राह्मण
जस्टिस गवई की टिप्पणी बुरी लग गई है?
धार्मिक भावनाएं आहत हो गई हैं?
भगवान विष्णु को बोलो इन्हें भी दंड दे दें।
पुजारियों को बोलो सीधे नर्क वाला श्राप
#We_Stand_With_BR_Gavai
जो लोग मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई जी से माफ़ी माँगने की मुहिम चला रहे हैं उन्हें समझ लेना चाहिए कि बी आर गवई साहब अम्बेडकरवादी हैं, माफ़ीवीर नहीं। #We_Stand_With_BR_Gavai
सुप्रीम कोर्ट ने एमपी के खजुराहो में स्थित भगवान विष्णु की सिर कटी प्रतिमा के पुनर्निर्माण की मांग को खारिज कर दिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस बी आर गवई ने कहा कि
“ जाइए और अपने देवता से कहिए कि वे इस मामले में खुद कुछ करें ”
बिहार में अपनी कुछ मांगें लेकर बीजेपी कार्यालय पहुंचे संविदाकर्मियों पर बर्बर पुलिस लाठीचार्ज की जितनी निंदा की जाए, कम है।
जो सरकार युवाओं को रोजगार के अवसर देने की जगह यातना देने पर उतारू हो, उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है। बिहार के युवा इस बार अधिकार छीनकर अत्याचार करने वाली जेडीयू-बीजेपी सरकार को करारा सबक सिखाने जा रहे हैं।
एंकर से लेकर सभी प्रवक्ता लोग एक ही समुदाय से आते है ब्राह्मण, और चर्चा कर रहे हैं भारत के लोकतंत्र पर। सही कहते हैं वामन मेश्राम साहब भारत में लोकतंत्र नहीं ब्राह्मण तंत्र चल रहा है।
यह लोकतंत्र दिखाकर असल में ब्राह्मण तंत्र पर चर्चा करते हैं .
@aajtak@anjanaomkashyap